अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन की मुश्किलें बढ़ी, साकेत कोर्ट ने सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत बढ़ाई, ED को भी भेजा नोटिस
सिद्दीकी ने अपनी याचिका में आरोपपत्र से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिस पर अदालत ने ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 27 मार्च को साकेत कोर्ट में होगी।

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। शुक्रवार को अदालत ने इसी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
सिद्दीकी ने अपनी याचिका में आरोपपत्र से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिस पर अदालत ने ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 27 मार्च को साकेत कोर्ट में होगी।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज ने जांच एजेंसी से स्पष्ट जवाब मांगा कि आरोपपत्र से जुड़े दस्तावेज आरोपी को उपलब्ध कराए गए हैं या नहीं। अदालत के इस निर्देश के बाद ईडी को निर्धारित समय में अपना पक्ष रखना होगा।
इससे पहले ईडी ने 16 जनवरी को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सिद्दीकी और ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों के माध्यम से अवैध रूप से धन जुटाया। ईडी के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) मान्यता दिखाकर छात्रों से भारी फीस वसूली गई। इसके अलावा सरकारी एजेंसियों को गुमराह करने, फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति करने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के भी कथित सबूत मिलने का दावा किया गया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट की जांच से हुई थी। जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आए थे। आरोप है कि यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक डॉक्टर 10 नवंबर 2025 को हुए उस विस्फोट में कथित तौर पर शामिल पाया गया था, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया।
ईडी ने कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी से जुड़ी लगभग 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें करीब 54 एकड़ जमीन और कई इमारतें शामिल बताई गई हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सिद्दीकी ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के संचालन पर पूरी तरह नियंत्रण रखता था और कथित अवैध कमाई का मुख्य लाभार्थी था। एजेंसी ने जांच में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और छात्रों के साथ कथित छल के संकेत मिलने की भी बात कही है।
फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और 27 मार्च की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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