यूपी चुनाव टालने का आग्रह करने वाले जस्टिस शेखर पहले भी देते रहे हैं बिन मांगी सलाह, गाय को राष्ट्रीय पशु बनाना चाहते हैं

यूपी में चुनाव टालने की सलाह देने वाले जस्टिस शेखर गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने और गौरक्षा को बुनियाद अधिकार बनाने की सलाह भी दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि 'गाय अकेला ऐसा पशु है जो सांस से ऑक्सीजन छोड़ता है।'

प्रतीकात्मक फोटो
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आसिम खान

उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों में तेजी के साथ ही राजनीतिक पंडित माहौल में बदलाव की हवा भी महसूस करने लगे हैं, तभी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सम्माननीय जज ने अचानक सलाह दे डाली है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी रैलियों पर रोक लगा दी जाए क्योंकि कोरोना का प्रसार बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं जज साहब ने यह आग्रह भी कर दिया कि विधानसभा चुनाव दो-एक महीनों के लिए टाल दिए जाएं।

निस्संदेह कोरोना वायरस और इसका नया वेरिएंट ओमिक्रॉन तेजी से पैर पसार रहा है, और आशंका है कि भीड़-भाड़ वाली चुनावी रैलियों के कारण इसमें और तेजी आ सकती है। जज साहब को इसी सब का उस वक्त अचानक एहसास हुआ जब उन्होंने कोर्टरूम में वकीलों की भीड़ देखी जो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे थे और मास्क आदि भी नहीं पहने हुए थे। बस इसी से जज साहब शेखर कुमार यादव को लगा कि जनसभाएं वायरस की सुपर स्प्रेडर बन सकती हैं।

उन्होंने कहा, “अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो नतीजे दूसरी लहर से भी ज्यादा भयावह होंगे।” उन्होंने कहा, “जान है तो जहान है...” याद है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सिर्फ 4 घंटे के नोटिस पर देश भर में अचानक लॉकडाउन का ऐलान किया था तो इन्हीं शब्दों को लोगों के सामने रखा था।

जस्टिस शेखर यादव ने अपनी सलाह में पूरा एक पैराग्राफ पीएम मोदी और उनकी सरकार की तारीफ करते हुए लिखा है। मुफ्त वैक्सीनेशन की भी तारीफ की और कोर्ट रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि इस सलाह की प्रति चुनाव आयोग और इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी जाए।

कोर्ट की इस सलाह पर तीखी प्रतिक्रिया देते हे समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने ऐसी बिन मांगी सलाह देने के लिए जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस किस्म के फैसले सुना रहे हैं। किसी ने इसकी मांग नहीं की थी। मेरी अपील है कि सुप्रीम कोर्ट इस का संज्ञान ले और इस किस्म के निर्देश देने वालों के खिलाफ कार्यवाही करे।”


गौरतलब है कि स्वतंत्र मीडिया समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की रैलियों में भारी भीड़ जुटने की खबरें दिखा रहे हैं। इन नेताओं की रैलियों में भारी संख्या में लोग स्वत: ही जुट रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी को प्रधानमंत्री मोदी तक की रैली के लिए सरकारी मशीनरी और संसाधनों का जोर लगाना पड़ रहा है। यहां तक कि पीएम की रैलियों के लिए दूरदराज के इलाकों से लोगों को सरकारी बसों में भरकर लाया जा रहा है।

वैसे जस्टिस शेखर यादव पहले भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। पिछली बार उन्होंने कहा था कि ‘गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है...’ उस समय भी उनकी इस टिप्पणी का उस केस से कोई लेना देना नहीं था जिसकी सुनवाई के दौरान उन्होंने यह बात कही थी।

एक सितंबर को उन्होंने कहा था, वैज्ञानिकों का विश्वास है कि गाय अकेला ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है।“ उन्होंने संसद से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गौरक्षा को बुनियादी अधिकार बनाने की मांग की थी।

ध्यान रहे कि दिसंबर 2019 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज के रूप में प्रोन्नति से पहले जस्टिस शेखर यादव उत्तर प्रदेश के सरकारी वकील थे। उन्होंने अक्टूबर में भी एक इसी किस्म का आदेश दिया था। उन्होंने बिन मांगी सलाह देते हुए कहा था कि सरकार को भगवान राम, कृष्ण, रामायण और भगवद गीता, महर्षि वाल्मीकि और महर्षि वेदव्यास को राष्ट्रीय गौरव और विरासत का दर्जा देना चाहिए।

धर्मांतरण पर भी जस्टिस शेखर के विचार अनूठे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के धर्म परिवर्तन विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार शख्स की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा था कि, “देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए बाहर से आए धर्म और बाहरी मदद से लोग गरीब, विकलांगों और महिलाओं के धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रहे हैं।”

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