कर्नाटकः बसवराज कैबिनेट के 29 मंत्रियों ने ली शपथ, येदियुरप्पा को दोहरा झटका, बेटे को नहीं मिली जगह

येदियुरप्पा को पद छोड़ने के लिए मनाते समय बीजेपी ने उनके बेटे विजयेंद्र को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी, लेकिन मंत्रियों की अंतिम सूची में उन्हें मंत्री तक नहीं बनाया गया। येदियुरप्पा ने बेटे को राज्य पार्टी प्रमुख बनवाने का भी प्रयास किया, जो असफल रहा।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कर्नाटक में बुधवार को मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली बीजेपी की नई सरकार का कैबिनेट गठन हो गया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बेंगलुरु के राजभवन में 29 मंत्रियों को शपथ दिलाई। हालांकि, बसवराज कैबिनेट गठन के साथ ही पूर्व सीएम बी.एस. येदियुरप्पा को उस समय दोहरा झटका लगा जब उनके बेटे बी.वाई. विजयेंद्र को कैबिनेट में जगह नहीं मिली। इससे पहले बीजेपी ने विजयेंद्र को राज्य पार्टी प्रमुख बनाने से भी इनकार कर दिया था।

दरअसल येदियुरप्पा सरकार में विजयेंद्र पर सुपर मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने के आरोप लगते रहे थे। आरोपों के अनुसार कथित तौर पर वह अपने पिता के लिए सब कुछ तय कर रहे थे। सूत्रों ने कहा कि यह उस पार्टी की छवि के लिए हानिकारक होगा जो येदियुरप्पा के साये से आगे बढ़ना चाहती है। सूत्रों ने कहा कि येदियुरप्पा को पद छोड़ने के लिए राजी करने के समय पार्टी ने विजयेंद्र को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी। हालांकि, येदियुरप्पा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए बदले में विजयेंद्र को राज्य पार्टी प्रमुख बनवाने का एक निर्थक प्रयास किया, जिसे पार्टी ने खारिज कर दिया।


सूत्रों का कहना है, अपने इस्तीफे के बाद येदियुरप्पा ने अपना विचार बदल दिया और अपने बेटे के लिए मंत्री पद की मांग रखी। हालांकि, शीर्ष नेताओं ने इसे भी खारिज कर दिया। यह भी पता चला है कि नए मंत्रियों की सूची की घोषणा को लेकर अंतिम समय तक असमंजस की स्थिति थी। येदियुरप्पा, पार्टी के फैसले के बारे में जानने के बाद परेशान थे और शीर्ष नेताओं को उन्हें शांत करने के लिए व्यक्तिगत रूप से फोन करना पड़ा।

वहीं आज शपथ लेने वाली मुख्यमंत्री बोम्मई की नई टीम वरिष्ठ और नए चेहरों का मिश्रण है। इसमें गोविंद करजोल, के.एस. ईश्वरप्पा, आर. अशोक, वी. सोमन्ना, वी. उमेश कट्टी, वी. सुनील कुमार अरागा ज्ञानेंद्र, हलप्पा आचार और बी.सी. नागेश नए चेहरे के रुप में शामिल हुए है। एक अकेली महिला प्रतिनिधि पूर्व मंत्री शशिकला जोले हैं। जबकि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बसवनगौड़ा पाटिल यतनाल और अरविंद बेलाड भी कैबिनेट बर्थ से चूक गए।


नए कैबिनेट में मंत्रियों में गोविंद करजोल, के.एस. ईश्वरप्पा, आर. अशोक, बी. श्रीरामुलु, वी. सोमन्ना, वी. उमेश कट्टी, एस. अंगारा, जे.सी. मधुस्वामी, अरागा जननेद्र, डॉ. अश्वत्नारायण सी.एन., सी.सी. पाटिल, आनंद सिंह, कोटा श्रीनिवास पुजारी, प्रभु चौहान, मुरुगेश निरानी, शिवराम हेब्बार, एस.टी. सोमशेखर, बी.सी. पाटिल, भैरथी बसावराजू, डॉ के सुधाकर, के गोपालैह, शशिकला जोले, एमटीबी नागराजू, के.सी. नारायण गौड़ा, बी.सी. नागेश, वी. सुनीलकुमार, हलप्पा बसप्पा आचार, शंकर पाटिल मुनेनकोप्पा और मुनिरत्न शामिल है।

मुख्यमंत्री बोम्मई की कैबिनेट में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाए, लेकिन 13 जिले बिना प्रतिनिधित्व के चले गए। छह जिलों को दो कैबिनेट बर्थ आवंटित किए गए हैं। राजधानी बेंगलुरु को 7 कैबिनेट पदों से नवाजा गया है। कैबिनेट में आठ लिंगायत, 7 वोक्कालिगा, 7 ओबीसी, 3 दलित, 1 एसटी, 1 महिला और 2 ब्राह्मण हैं।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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