कोरोना वायरस के चलते बंद हुआ करतारपुर कॉरिडोर, एसजीपीसी ने केंद्र के कदम को नाजायज करार दिया

करतारपुर कॉरिडोर बंद किये जाने को लेकर जहां श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस कदम को सही ठहराया है, वहीं एसजीपीसी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोगोंवाल ने केंद्र सरकार के इस कदम को नाजायज करार देते हुए खोलने की मांग की है।

फोटोः सोशल मीडिया
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अमरीक

कोरोना वायरस के खतरे की वजह से केंद्र सरकार ने 16 मार्च से भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित करतारपुर कॉरिडोर से होकर ऐतिहासिक गुरुद्वारा करतारपुर साहिब की यात्रा पर रोक लगा दी है। सोमवार सुबह भारत की ओर से श्री करतारपुर साहिब की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया।

इसके बाद सोमवार को देश के सुदूर हिस्सों से आए उन श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया, जिन्हें गलियारे के जरिये पाकिस्तान स्थित श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारे जाना था। अब ये श्रद्धालु भारतीय सीमा के अंदर से ही दूरबीन के जरिये गुरुद्वारा के दर्शन कर रहे हैं। खास बात ये है कि करतारपुर कॉरिडोर बनने से पहले भी दूरबीन के जरिये ही दर्शन किये जाते थे।

करतारपुर कॉरिडोर बंद किये जाने को लेकर दो सर्वोच्च सिख संस्थाओं एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) और श्री अकाल तख्त साहिब की प्रतिक्रियाएं परस्पर विरोधी हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कॉरिडोर बंद करने को सही ठहराया है तो एसजीपीसी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोगोंवाल ने केंद्र सरकार के इस कदम को नाजायज करार दिया है।

गोबिंद सिंह लोंगोवाल कहते हैं कि बेशक कोरोना विश्व के लिए महामारी बन चुका है लेकिन श्री करतारपुर साहिब का गलियारा सिख पंथ की भावनाओं और आशाओं से जुड़ा हुआ है और जो श्रद्धालु वहां जाकर दर्शन करना चाहते हों, केंद्र सरकार को उन्हें अनुमति देनी चाहिए।


वहीं 72 साल बाद खुले करतारपुर कॉरिडोर को 128 दिन में ही फौरी तौर पर बंद करने की बाबत श्रद्धालुओं में भी मिली-जुली प्रतिक्रिया है। जालंधर के हरनाम सिंह के अनुसार पहले भी श्रद्धालुओं को पूरे मेडिकल चेकअप के बाद ही श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने दिया जाता था और वहां से आते हुए भी चेकअप होता था। जब से कोरोना वायरस फैला है, करतारपुर कॉरिडोर के जरिये आने-जाने वाले लोगों में से कोई भी संदिग्ध नहीं पाया गया। वहां लोग अच्छी सेहत के लिए अरदास करने जाते हैं, इसलिए इससे बंद नहीं किया जाना चाहिए। जबकि कपूरथला के अरुण सिंह कालड़ा कहते हैं कि यह सही फैसला है, क्योंकि सेहत बचेगी तो धर्म भी बचा रहेगा।

गौरतलब है कि करतारपुर कॉरिडोर 9 नवंबर, 2019 को खोला गया था। तब से इस साल 15 मार्च तक 62,774 श्रद्धालु इस कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान स्थित श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा दर्शन के लिए गए। 9 नवंबर के बाद ये पहला मौका है जब कॉरिडोर अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।

इधर पंजाब के तमाम छोटे-बड़े धार्मिक स्थलों और डेरों पर भी कोरोना वायरस के खतरे का गहरा असर पड़ा है। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम हुई है। रोज बड़ी तादाद में आने वाले विदेशी श्रद्धालु और पर्यटक अब नदारद हैं। हालांकि यहां पूरी एहतियात बरती जा रही है। राधा स्वामी सत्संग घर ब्यास और निरंकारी मिशन ने भी अपने तमाम कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद में भी भारी कमी आई है। सिर्फ स्थानीय लोग ही पहुंच रहे हैं।

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