खड़गे ने मनरेगा के बकाये पर मोदी सरकार को घेरा, ‘जी राम जी’ के प्रावधानों पर भी मांगा जवाब
खड़गे ने दावा किया कि मार्च, 2026 तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मनरेगा के तहत 17,144.13 करोड़ रुपये बकाया था और इसमें 7,846.25 करोड़ रुपये की मजदूरी देनदारी शामिल है, जिसका भुगतान अब तक मजदूरों को नहीं किया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ लागू होने से एक दिन पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ग्रामीण भारत से काम का अधिकार छीनने का आरोप लगाया और कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के बकाया भुगतान और नई योजना के विभिन्न प्रावधानों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि मार्च, 2026 तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मनरेगा के तहत 17,144.13 करोड़ रुपये बकाया था और इसमें 7,846.25 करोड़ रुपये की मजदूरी देनदारी शामिल है, जिसका भुगतान अब तक मजदूरों को नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से केंद्र सरकार ने राज्यों पर नई योजना ‘विकसित भारत-जी राम जी’ लागू की है लेकिन मनरेगा का बकाया भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि कर्नाटक के 700 करोड़ रुपये और झारखंड के 900 करोड़ रुपये सहित कई राज्यों को बकाया राशि नहीं मिली है। खड़गे ने कहा, ‘‘कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी जबकि नई योजना में राज्यों पर कुल खर्च का 40 प्रतिशत बोझ डाल दिया गया है।’’ उन्होंने दावा किया कि बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों ने भी इस वित्तीय व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि नई योजना के तहत खेती के अहम मौसम में 60 दिनों तक काम बंद रखने के प्रावधान का कई राज्यों ने विरोध किया है, लेकिन केंद्र सरकार इसे किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर थोप रही है। उन्होंने दावा किया कि 125 दिनों के रोजगार के वादे को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश पर 20,037 करोड़ रुपये और बिहार पर 15,939 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने खड़गे कहा कि कम से कम पांच राज्यों ने मनरेगा मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। उनके मुताबिक, कांग्रेस शुरू से ही 400 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग करती रही है जबकि बिहार ने दैनिक मजदूरी 255 रुपये से बढ़ाकर 413 रुपये और जम्मू-कश्मीर ने 272 रुपये से बढ़ाकर 311 रुपये करने की मांग की है।
खड़गे ने दावा किया कि जून में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है और खरीफ फसलों की बुआई में 22.7 प्रतिशत की कमी आई है। उनका कहना था कि 300 से अधिक जिले सूखे की चपेट में आ सकते हैं और ग्रामीण भारत में आजीविका का संकट गहरा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में मनरेगा को खत्म करना क्या मजदूरों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और गरीबों पर हमला नहीं है?
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
