जानें मोदी कैबिनेट में यूपी के मंत्रियों का सामाजिक समीकरण, आगामी चुनाव में गणित साधने की पूरी तैयारी

बीजेपी ने यूपी से एक बार फिर गैर यादव, ओबीसी और गैर जाटव दलितों पर दांव लगाते हुए राज्य में 2017 की जीत को दोहराने का फॉर्मूला अपनाया है। हालांकि सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार किसी जाट चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है।

फोटोः ANI
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नवजीवन डेस्क

आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले हुए मोदी कैबिनेट के पहले बड़े विस्तार में राज्य से 7 लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। सबसे खास बात ये है कि कैबिनेट विस्तार में यूपी से मंत्रियों को शामिल करने में जातियों का खास ध्यान रखा गया है और चुनावी समीकरण को ध्यान में रखते हुए ओबीसी और दलित नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिसका असर आगामी चुनाव पर होगा।

आज के विस्तार में यूपी के मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर, आगरा से सांसद एसपी बघेल, महराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, राज्यसभा सांसद बीएल वर्मा, लखीमपुर खीरी से सांसद अजय मिश्रा, जालौन से सांसद भानु प्रताप वर्मा और सहयोगी अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाया गया है।

इन नामों से ही साफ है कि बीजेपी ने चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातियों का जबरदस्त मैनेजमेंट किया है। खास बात ये है कि बीजेपी ने यूपी से एक बार फिर गैर यादव, ओबीसी और गैर जाटव दलितों पर दांव लगाते हुए राज्य में 2017 की जीत को दोहराने का फॉर्मूला अपनाया है। हालांकि सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार किसी जाट चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है।

सबसे पहले बात करें महराजगंज से 6 बार के सांसद पंकज चौधरी की तो वह कुर्मी जाति से आते हैं। पंकज चौधरी बड़े व्यवसायी हैं और पूर्वांचल में खासा असर रखते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके मधुर संबंध माने जाते हैं। इसी तरह पीएम मोदी ने पूर्वांचल का दूसरा सिरा अनुप्रिया पटेल से साधा है। अनुप्रिया भी कुर्मी जाति से आती हैं और इस जाति का अच्छा असर वाराणसी में भी है। इसीलिए इस बार पूर्वांचल से दोनों मंत्री इसी बिरादरी से हैं। अनुप्रिया के बहाने बीजेपी ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि जो सहयोगी दल बीजेपी का वफादार रहेगा उसे उसका इनाम मिलेगा।


इसके अलावा इस बार पहली बार मोदी कैबिनेट में लोध जाति (पिछड़ी जाति) को भी प्रतिनिधित्व मिला है। इस जाति के बीएल वर्मा को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। लोध जाति को बीजेपी का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। बीएल वर्मा को कैबिनेट में जगह देकर कट्टर समर्थक बड़ी बिरादरी को साधने की कोशिश की गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इसी बिरादरी से आते हैं।

इसी तरह मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर भी मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं, जो दलित बिरादरी में पासी जाति से आते हैं। वह बीजेपी से दूसरी बार सांसद बने हैं। यूपी में जाटवों के बाद पासी दूसरी सबसे बड़ी दलित जाति है जो बीजेपी की समर्थक है और पूरे उत्तर प्रदेश में फैली है। इसीलिए इस जाति को साधने की कोशिश की गई है। वहीं दलित वर्ग से दूसरे सांसद भानु प्रताप वर्मा भी कैबिनेट में शामिल हुए हैं, जो कोरी जाति से आते हैं। कोरी जाति भी दलितों में बीजेपी की समर्थक जाति मानी जाती है, जिससे खुद राष्ट्रपति भी हैं।

इसी तरह अति पिछड़ी जाति पाल/गडेरिया से आने वाले एसपी सिंह बघेल भी मंत्री बनाए गए हैं। कभी मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी रहे बघेल पूर्व पुलिस अधिकारी हैं और पहले समाजवादी पार्टी से सांसद रह चुके हैं, लेकिन बीजेपी में आने के बाद योगी सरकार में मंत्री हुए और फिर 2019 में आगरा से सांसद बने और अब उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया है। इस जाति का प्रदेश के बृज क्षेत्र यानी इटावा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, मथुरा और आगरा के इलाकों में अच्छा दबदबा है।

इसके अलावा अजय मिश्रा टेनी इस कैबिनेट विस्तार में यूपी से अगड़ी जाति से एकमात्र मंत्री बनाए गए हैं। ब्राह्मण बिरादरी से आने वाले मिश्रा लखीमपुर खीरी से सांसद हैं और लगातार दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे हैं। उनका तराई के इलाके में अच्छा खासा असर माना जाता है। साथ ही यह माना जा रहा है कि अगड़ी जाति के कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए इन्हें ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मोदी कैबिनेट शामिल किया गया है।

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