कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, 17 लोगों की मौत की पुष्टि, 30 से ज्यादा घायल

कोलकाता के पूजा पंडाल में भगदड़ में कम से कम 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस हादसे में कम से कम 30 लोग जख्मी हुए हैं। राहत और बचाव कार्य चल रहा है।

फोटो - पीटीआई
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  • उत्तरी कोलकाता के चोर बागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, कम से कम 17 लोगों की मौत

  • भारी भीड़ और बारिश के बीच, बाहर निकलने वाले गेट पर मची अफरा-तफरी, कम से कम 35 लोगों को एमसीएच अस्पताल ले जाया गया

  • पंडाल फिलहाल लोगों के लिए बंद, बचाव कार्य तथा चिकित्सा सहायता के लिए आपातकालीन टीमें तैनात

शनिवार रात उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में जश्न का माहौल उस समय मातम में बदल ग. जब महासप्तमी के मौके पर भारी बारिश और अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस भगदड़ में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा दर्जनों लोग घायल हुए हैं। न्यूज एजेंसियों ने खबर लिखे जाने तक मरने वालों की संख्या 17 होने की पुष्टि की है।

खबरों के मुताबिक 40 से 50 घायल लोगों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल लाया गया। बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोगों की हालत गंभीर है, जबकि 11 घायलों को एसएसकेएम अस्पताल भेजा गया है। इस घटना ने कोलकाता के सबसे बड़े वार्षिक त्योहारों में से एक के दौरान भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन पहुंच और यहां आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक शनिवार शाम कोलकाता में जिस समय मूसलाधार बारिश शुरू हुई, तो उस समय पंडाल के अंदर और बाहर हजारों लोग मौजूद थे। बताया जा रहा है कि बारिश से बचने के लिए कई लोग अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कुछ अन्य लोग दुर्गा प्रतिमा के दर्शन करने के बाद बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। लोगों की इन विपरीत दिशाओं में आवाजाही के कारण भीड़भाड़ वाले रास्ते में खतरनाक दबाव बन गया।


एक चश्मदीद ने बताया कि, "अचानक पीछे से धक्का लगा। लोग एक के बाद एक गिरने लगे। जो लोग सबसे आगे थे, वे बिल्कुल भी उठ नहीं पाए।" इस चश्मदीद ने, जो अपनी तीन महिला दोस्तों के साथ था, बताया कि वे भीड़ के नीचे दब गए थे। उसने कहा, "उनमें से एक सबसे नीचे दबी हुई थी। वह लगभग 40 से 45 मिनट तक सांस नहीं ले पाई।" चश्मदीद ने बताया कि शुरुआत में महिलाओं को बाहर निकालने की कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि उनके आस-पास मौजूद लोग खुद वहां से निकलने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

इस भगदड़ ने गुस्साए लोगों का आरोप है कि आपात स्थिति के दौरान पुलिस बहुत कम संख्या में नजर आई और मौके पर एम्बुलेंस भी आसानी से उपलब्ध नहीं थी। एक युवक ने सवाल किया, "भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया? लोगों को अंदर क्यों आने दिया गया? पुलिस कहाँ थी?" उसने आरोप लगाया कि पीड़ितों को निजी वाहनों—जिनमें उबर (Uber) और ओला (Ola) से बुक की गई टैक्सियाँ भी शामिल थीं—में अस्पताल ले जाया जा रहा था। उसने दावा किया, "यहां न तो एम्बुलेंस हैं और न ही पुलिस।"

एक अन्य महिला ने आरोप लगाया कि पीड़ितों को बचाने में स्थानीय लोगों ने सबसे आगे बढ़कर मदद की। उन्होंने आयोजकों पर गलत सार्वजनिक घोषणाएं करने का भी आरोप लगाया, जिससे भ्रम और बढ़ गया। बचाव कार्य के दौरान पंडाल के आसपास जूते, बैग और पानी की बोतलें बिखरी हुई थीं। सजावटी लाइटें बंद कर दी गईं और लोगों का प्रवेश रोक दिया गया। दमकल विभाग और आपदा प्रतिक्रिया दल मौके पर पहुंच गए।

कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, 17 लोगों की मौत की पुष्टि, 30 से ज्यादा घायल

जानकारी के मुताबिक इस पंडाल में एक ऊंचा गोलाकार गलियारा है, जिससे होकर गुजरने वाले लोगों को बाहर निकलने से पहले पूरा 360-डिग्री का चक्कर लगाना पड़ता है। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि भीड़ का दबाव इसी रास्ते पर बना था। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ढांचे का एक हिस्सा ढह गया हो सकता है, हालांकि पूरे घटनाक्रम और भगदड़ के कारणों की अभी जांच होनी है।

शाम के समय पंडाल में हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। तभी अचानक बारिश शुरू हो गई, जिससे 'चोरबगान सार्वजनिक पंडाल' में मौजूद लोग परेशान होकर इधर-उधार जाने और दौड़ने लगे।यह जगह एक संकरी गली में स्थित है, जहां से मुख्य पंडाल तक जाने के लिए कुछ रास्ते हैं।

बाहर गली में मौजूद बहुत से लोग बारिश से बचने के लिए भागकर पंडाल के अंदर जाने लगे। जो लोग पहले से ही पंडाल के अंदर थे, वे बाहर नहीं निकल पाए, जबकि बाहर फंसे लोग बारिश से बचने के लिए अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इस अफरा-तफरी में लोग एक अस्थायी सीढ़ी पर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।

बताया जाता है कि पंडाल में लोहे का एक ढांचा बना था, जिसके नीचे देवी दुर्गा की प्रतिमा रखी थी। आशंका है कि इस ढांचे का एक हिस्सा ढह गया, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ गई। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 5 से 7 मिनट के भीतर घटी।


एक संकरी गली चोरबागन के पूजा पंडाल की ओर जाती है, जहां इस साल 91वां पूजा उत्सव मनाया जा रहा है। आम लोगों के बाहर निकलने का रास्ता ऊबड़-खाबड़ था, जो कहीं 10 फीट तो कहीं 30 फीट चौड़ा था। जो लोग सीढ़ियां पार करके बाहर निकलने वाले गेट तक पहुंच भी गए, वे भी बाहर नहीं निकल पाए।

पंडाल में आए एक व्यक्ति ने बताया, "पास की पार्वती घोष लेन बंद थी। एम्बुलेंस को अंदर नहीं आने दिया गया। पुलिस वहां से भाग गई थी। अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े।" एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसके साथ आए तीन दोस्त ज़मीन पर गिर गए। उसने कहा, "मैंने उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुआ। फिर कुछ और लोग मेरी मदद के लिए आए और हमने मिलकर उन्हें बाहर निकाला।"

पुलिस के अनुसार, लगभग 35 लोगों को एमसीएच अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद पंडाल को लोगों के लिए बंद कर दिया गया। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और एम्बुलेंस सेवाओं की कमी के कारण, घायलों को ओला-उबर कैब में अस्पताल ले जाया गया। घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल, दमकलकर्मी, आपदा प्रबंधन समूह की टीम और मेडिकल टीमों के साथ एम्बुलेंस तैनात की गईं। पुलिस ने बताया कि घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुँचाया गया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पताल का दौरा किया।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के ज़रिए इस घटना पर हैरानी और दुख जताया है। उन्होंने घायलों के जल्द ठीक होने और उनके परिवारों को हिम्मत मिलने की प्रार्थना की है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है। कई केंद्रीय मंत्रियों और अन्य राजनेताओं ने भी घटना पर शोक जताया है।


इस बीच पूजा आयोजक विकास दास ने कहा कि अभी सबसे ज़रूरी काम लोगों को बचाना और उन्हें मेडिकल सुविधा देना है। उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य काम घायलों को अस्पताल पहुँचाना है।" उन्होंने यह भी बताया कि घटना की असल वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। इस बीच राज्य सरकार ने मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर, 18003455678, जारी किया है।

इस त्रासदी ने आयोजन में आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी प्रबंधन, आपातकालीन रास्तों की उपलब्धता और पुलिस तथा चिकित्सा सेवाओं के प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन मुद्दों की जांच पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए, न कि केवल जिम्मेदारी तय करने के लिए लगाए गए अनुमानों के आधार पर।

(कुणाल चटर्जी और न्यूज एजेंसियों के इनपुट के साथ)