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झारखंड: लालू यादव ने सीबीआई कोर्ट में किया सरेंडर, कहा, अब सरकार की होगी मेरे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी

चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने गुरुवार को रांची की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर किया है। इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने लालू यादव की जमानत अवधि को बढ़ाने से इनकार करते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। 

फोटो: सोशल मीडिया 

नवजीवन डेस्क

चारा घोटाले में सजा काट रहे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने आज सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट ने लालू यादव को बिरसा मुंडा जेल ले जाने का आदेश दिया है। इसके बाद जेल के डॉक्टर तय करेंगे कि लालू का जेल के अस्पताल में इलाज होगा या उन्हें रिम्स भेजे जाने की जरूरत है। झारखंड हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को लालू यादव को विशेष सीबीआई कोर्ट के सामने सरेंडर करने के आदेश दिया था। जिसके बाद उन्हें मुंबई के अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

इस दौरान लालू यादव के सरेंडर करने के बाद उनके वकील प्रभात कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “डॉक्टर लालू यादव की जांच करेंगे, इसके बाद उनकी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी।”

सरेंडर करने से पहले लालू यादव से पहले झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने रांची में उनसे मुलाकात भी की। बाबूलाल मरांडी से मुलाकात के बाद लालू यादव रांची सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने के लिए रवाना हुए। इस दौरान गेस्ट हाउस से निकलते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मेरी कोई इच्छा नहीं है। सरकार मुझे जहां चाहे वहां पर रख सकती है और मेरे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी अब सिर्फ सरकार की है।

इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान लालू यादव की चारा घोटाले के देवघर कोषागार समेत सभी तीन मामलों में स्वास्थ्य कारणों से दी गई अंतरिम बेल की अवधि को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था और उन्हें विशेष अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि जरूरत होने पर अब लालू का रांची के रिम्स अस्पताल में ही इलाज होगा।

चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसम्बर 2017 को दोषी करार दिए जाने के बाद से लालू यादव रांची के जेल में थे। इस केस में इसी साल 6 जनवरी को लालू समेत 16 दोषियों को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई। उन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। तबीयत बिगड़ने पर लालू यादव को 17 मार्च को रिम्स में भर्ती किया गया। सुधार नहीं होने पर 28 मार्च को दिल्ली के एम्स रेफर कर दिया गया था। एम्स से उन्हें 30 अप्रैल को डिस्चार्ज कर रिम्स भेज दिया गया था।

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