लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, देवघर चारा घोटाला मामले में जमानत रद्द करने से इनकार
देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने CBI की याचिका पर राहत नहीं दी और हाई कोर्ट से अपील पर जल्द सुनवाई करने को कहा है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने की CBI की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के उस आदेश में भी दखल देने से मना कर दिया, जिसके तहत लालू यादव को जमानत मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लालू यादव को जमानत मिले सात साल हो चुके हैं और यह अपील वर्ष 2018 से लंबित है। अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को मामले की अपील पर जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया। हालांकि, CBI की ओर से दाखिल याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया।
CBI ने जमानत पर क्या उठाए सवाल?
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने तथ्यात्मक रूप से गलत आधार पर लालू यादव की सजा निलंबित की थी। उन्होंने कहा कि इससे पहले सजा निलंबन की दो अर्जियां खारिज हो चुकी थीं, लेकिन तीसरी बार यह मानते हुए राहत दे दी गई कि दोषी अपनी आधी सजा पूरी कर चुका है, जबकि यह तथ्य सही नहीं था।
ASG ने अदालत को बताया कि इस मामले में अलग-अलग मुकदमों में सजा सुनाई गई है, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 427 लागू होती है। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहले से एक सजा काट रहा हो और बाद में किसी अन्य मामले में दोषी ठहराया जाए, तो दूसरी सजा पहली सजा पूरी होने के बाद शुरू होती है, जब तक अदालत दोनों सजाओं को साथ-साथ (समवर्ती) चलाने का आदेश न दे।
धारा 427 को लेकर CBI की दलील
CBI की ओर से कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने सभी मामलों को एक मानकर चलने की गलती की, जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में स्पष्ट किया जा चुका है कि धारा 427 सामान्य नियम है। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने यह मान लिया कि लालू यादव आधी सजा पूरी कर चुके हैं, जबकि यह नहीं देखा गया कि उनकी सजाएं समवर्ती नहीं थीं। इसी आधार पर CBI ने जमानत रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और मामले की लंबित अपील पर जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया।
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