'BJP सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त', अजमेर जेल में जगन गुर्जर की हत्या को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अजमेर जेल के भीतर हुई यह हत्या अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है और इससे जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।

राजस्थान के अजमेर की उच्च सुरक्षा वाली जेल के भीतर कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या को लेकर विपक्षी नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए इस घटना के लिए राज्य सरकार और जेल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
अजमेर की एक जेल में बंद जगन गुर्जर की सोमवार दोपहर कथित तौर पर एक अन्य बंदी ने आपसी कहासुनी के बाद हत्या कर दी। आरोपी विष्णु उसी बैरक में जगन गुर्जर के साथ रह रहा था।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अजमेर जेल के भीतर हुई यह हत्या अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है और इससे जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर (सरकार) उच्च सुरक्षा वाली जेल भी बंदियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, तो सुरक्षा व्यवस्था कहां है?’’
डोटासरा ने कहा कि हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में राजस्थान देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है और एक वर्ष में करीब 20 ऐसी मौतें इस बात का संकेत हैं कि जेल ‘‘गंभीर चिंता का केंद्र’’ बन चुकी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में जेलों के भीतर से रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी और गैंग गतिविधियां संचालित होने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
डोटासरा ने कहा कि सरकार को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए, किसी भी संगठित साजिश का पर्दाफाश करना चाहिए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि इस घटना ने जेल प्रशासन और राज्य की कानून-व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अजमेर की जेल में जगन गुर्जर की हत्या जेल प्रशासन और बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) सरकार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि राज्य की सबसे सुरक्षित जेल में भी किसी व्यक्ति का जीवन सुरक्षित नहीं है, तो बाहर आम जनता की सुरक्षा की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।’’
जूली ने दावा किया कि राजस्थान पहले से ही न्यायिक हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है और इस ताजा घटना ने सरकार के सुरक्षा और जेल प्रबंधन संबंधी दावों की पोल खोल दी है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बीजेपी सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और प्रदेश को अपराधियों के हवाले कर दिया गया है। सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।’’
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के संयोजक एवं नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘जेल में जगन गुर्जर की हत्या बेहद गंभीर घटना है। इससे जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।’’
बेनीवाल ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है और इसमें मिलीभगत या किसी बड़ी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ विभागीय जांच से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सच्चाई सामने आना संभव नहीं है। मैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील करता हूं कि वह तत्काल सीबीआई जांच के आदेश दें, ताकि इस घटना के पीछे की साजिश और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका उजागर हो सके।’’
इस बीच, जगन गुर्जर के परिजनों ने अजमेर के जेएलएन अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर प्रदर्शन किया और मामले की सीबीआई जांच तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
धौलपुर जिले का निवासी जगन गुर्जर विभिन्न थानों में दर्ज 100 से अधिक आपराधिक मामलों में आरोपी था। वह 2008 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित आवास को बम से उड़ाने की कथित तौर पर धमकी दी थी।
बाद में 2009 में उसने कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया था।
जून 2019 में दो महिलाओं के साथ कथित मारपीट और उनके कपड़े फाड़ने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उस समय उसे पकड़ने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों को अभियान में लगाया गया था।
फरवरी 2022 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज मलिंगा को जान से मारने की कथित धमकी देने के एक अन्य मामले में भी उसे गिरफ्तार किया गया था।
जगन गुर्जर राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल के बीहड़ों में सक्रिय रहा था।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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