इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकीलों का हंगामा, जस्टिस भनोट के कक्ष में जमकर नारेबाजी और तोड़फोड़
एक दिन पहले हुए विवाद की प्रतिक्रिया में बुधवार को न्यायमूर्ति अयज भनोट के अदालत कक्ष में पहुंचने पर वकीलों ने विरोध जताया और उनमें से कुछ ने जमकर नारेबाजी की। वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर अदालत कक्ष में घुसकर वहां रखी मेज-कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बुधवार को न्यायमूर्ति अजय भनोट के अदालत कक्ष में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और वहां रखी मेज-कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया। उच्च न्यायालय ने इसे गंभीरता से संज्ञान लेते हुए घटना में शामिल वकीलों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले एक दिन पहले हुए विवाद की प्रतिक्रिया में बुधवार को न्यायमूर्ति अयज भनोट के अदालत कक्ष में पहुंचने पर वकीलों ने विरोध जताया और उनमें से कुछ ने जमकर नारेबाजी की। वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर अदालत कक्ष में घुसकर वहां रखी मेज-कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया। वकीलों के हंगामे को देखते हुए जस्टिस भनोट को वहां से निकलना पड़ा।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने अदालत के गलियारे में नारेबाजी और शोर-शराबे का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को अदालत कक्ष संख्या 66 के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हासिल करने और घटना में शामिल वकीलों की पहचान करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर, 2026 तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वकीलों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जा सकता है और उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार किया जा सकता है। उच्च न्यायालय को बताया गया कि कुछ वकील अदालत कक्ष संख्या 49 में अधिवक्ता की गरिमा से जुड़े एक घटनाक्रम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
न्यायमूर्ति देशवाल ने इस तरह का आचरण न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि वादी अपनी शिकायतों के निवारण के लिए उच्च न्यायालय आते हैं, ऐसे में किसी विशेष अदालत से असहमति होने पर वकीलों को नारेबाजी कर अन्य अदालतों की कार्यवाही बाधित करने या न्यायालय को डराने वाले शब्दों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।उच्च न्यायालय ने ऐसे आचरण को पूरी तरह अनुचित बताते हुए इसे अवमाननापूर्ण करार दिया।
यह घटनाक्रम उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति भनोट के खिलाफ कार्रवाई की मांग किये जाने के एक दिन बाद हुआ है। बार एसोसिएशन ने महापंजीयक के माध्यम से भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि 27 अक्टूबर को अदालत की कार्यवाही के दौरान न्यायमूर्ति भनोट ने एक अधिवक्ता को अपमानित किया और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. पी. श्रीवास्तव का उपहास किया।
पत्र के मुताबिक पुलिस अधीक्षक स्तर के एक अधिकारी अपर शासकीय अधिवक्ता (एजीए) के पीछे वाली पंक्ति में बैठे थे। इसी दौरान एक वकील ने यह कहते हुए उनसे पीछे की पंक्ति में बैठने को कहा कि वह सीट उनकी नहीं है। आरोप है कि इस पर एजीए ने अधिवक्ता को फटकार लगाई और कहा कि वह इसकी शिकायत न्यायाधीश से करेंगे।
बार एसोसिएशन के अनुसार, अदालत कक्ष में पहुंचने के बाद न्यायमूर्ति भनोट ने अधिवक्ता की ओर उंगली उठाई और कड़े शब्दों में उसे जेल भेजने का आदेश दिया। पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ता ने जब माफी मांगी तो न्यायाधीश ने उन्हें पुलिस अधिकारी से माफी मांगने का निर्देश दिया।
बार एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति भनोट ने वरिष्ठ अधिवक्ता वी. पी. श्रीवास्तव का उपहास किया। एसोसिएशन के मुताबिक इस घटनाक्रम से विधिक समुदाय की गरिमा प्रभावित हुई है। पत्र में कथित आचरण को अवमाननापूर्ण बताते हुए मुख्य न्यायाधीश से मामले का गंभीर संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया था। इन घटनाक्रमों के बाद बुधवार को न्यायमूर्ति भनोट के अदालत कक्ष में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और इसी दौरान कथित तोड़फोड़ की घटना हुई।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
