हरियाणा में शराब घोटाले ने खोली खट्टर सरकार की कलई, सीएम-डिप्टी सीएम और गृहमंत्री के बयानों में विरोधाभाष क्यों?

कांग्रेस ने खट्टर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि लॉकडाउन के दौरान हरियाणा में हुए खुलेआम ‘शराब घोटाले’ और चोर दरवाजे से सैकड़ों-हजारों करोड़ की शराब बिक्री, तस्करी की परतें खुलने के बाद साफ है कि शराब माफिया के तार सीधे-सीधे उच्च पदों पर बैठे राजनीतिज्ञों और आला अधिकारियों से जुड़े हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया
user

धीरेंद्र अवस्थी

हरियाणा में शराब घोटाले ने सरकार की दशा और दिशा की कलई खोल दी है। विशेष जांच दल की रिपोर्ट के बाद सरकार गंभीर असमंजस में है। कमाल की बात यह है कि पहले गृहमंत्री कुछ कहते हैं। फिर मुख्‍यमंत्री कुछ और कहते हैं। आखिर में उप-मुख्‍यमंत्री कुछ और कहते नजर आते हैं। राज्‍य की सत्‍ता के इन तीन ध्रुवों के बीच विरोधाभास किसी गंभीर गड़बड़ की तरफ इशारा कर रहा है।

कांग्रेस ने खट्टर सरकार पर फिर हमला बोलते हुए कहा है कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के दौरान हरियाणा में हुए खुलेआम ‘शराब घोटाले’ और चोर दरवाजे से सैकड़ों-हजारों करोड़ की शराब बिक्री, तस्करी की परतें खुलने के बाद साफ है कि शराब माफिया के तार सीधे-सीधे उच्च पदों पर बैठे राजनीतिज्ञों और आला अधिकारियों से जुड़े हैं।

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और प्रदेश अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा है कि बीजेपी-जेजेपी सरकार में हड़कंप मचा है और प्रदेश के इतिहास में पहली बार परस्पर इल्जामात की राजनीति का खुला खेल चल रहा है।

गृहमंत्री अनिल विज उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के एक्साइज और टैक्टेशन विभाग को दोषी ठहराते हैं। उप-मुख्यमंत्री गृहमंत्री के विभाग पर जिम्मेदारी और दोष मढ़ देते हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शराब घोटाले की जांच के लिए जिस ‘स्पेशल इंक्वायरी टीम’ (एसईटी) का गठन किया था उप-मुख्यमंत्री उसकी रिपोर्ट को ही सिरे से खारिज कर देते हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री उप-मुख्यमंत्री की बात को ही सिरे से नकार देते हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि शराब माफिया के घालमेल में बड़े पदों पर बैठे लोग इस प्रकार के इल्जामात की राजनीति कर रहे हैं। प्रदेश में ‘जूतों में दाल’ बंट रही है। इस सारे विवाद में शराब माफिया और शराब तस्करों की पौ बारह है और दोषी खुलेआम घूम रहे हैं।

11 मई, 2020 को स्पेशल इंक्वायरी टीम के गठन से लेकर आज तक के घटनाक्रम में सीधे-सीधे जिम्मेवारी और जवाबदेही की आंच मुख्यमंत्री की ड्योढ़ी पर ला खड़ी की है। सुरजेवाला और सैलजा ने कहा है कि अब एसईटी के गठन को लेकर गृहमंत्री और मुख्यमंत्री की फाइल नोटिंग सार्वजनिक हो गई है। लिहाजा, मनोहर लाल खट्टर को 5 पहलुओं का जवाब प्रदेश की जनता को देना होगा।

1.पहला यह कि सोनीपत शराब गोदाम से शराब तस्करी का खुला खेल उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री ने ‘स्पेशल इन्‍वेस्टिगेशन टीम’ की जांच को सिरे से खारिज क्यों कर दिया?

2.क्या एसआईटी की जांच से और सोनीपत शराब घोटाले के खुलासे से सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के नाम उजागर होने का खतरा था? क्या कारण है कि मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ने एसआईटी यानि स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम को खारिज कर एसईटी यानि स्पेशल इंक्वायरी टीम का गठन कर दिया?

3.क्या यह सही नहीं कि एसईटी को क्रिमिनल प्रोसिजर कोड, 1973 की धारा 2 (एच) और 2 (0) के तहत कागजात जब्त करने, रेड़ करने, शराब ठेकों और गोदामों में जाकर जांच करने, शराब फैक्ट्रियों की जांच करने, एक्साइज विभाग का रिकोर्ड जब्त करने और दोषियों की गिरफ्तारी करने का अधिकार ही नहीं दिया गया?

4.क्या गृहसचिव और गृहमंत्री ने 7 मई को एसईटी का गठन करते हुए उसे शराब के ठेकों और शराब गोदामों (एल-1) तथा (एल-13) के स्टॉक की तफ्तीश कर शराब की शॉर्टेज, तस्करी, नाजायज बिक्री की जांच का अधिकार देने की सिफारिश की थी?

5.फिर, मुख्यमंत्री ने एसईटी को यह अधिकार देने से इंकार क्यों किया? क्या मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस इंकार से शराब तस्करों और नाजायज शराब बेचने वालों को चिन्हित करने में रोड़ा नहीं अटकाया गया? क्या गृहसचिव और गृहमंत्री ने शराब ठेकों, शराब गोदामों और पुलिस मालखानों से चोरी हुई शराब के बारे में दर्ज हुई एफआईआर और की गई कार्रवाई की सूचना एकत्र करने, कार्रवाई करने के बारे में सिफारिश मुख्यमंत्री को नहीं की? फिर मुख्यमंत्री ने इस सारी जानकारी की अवधि को मात्र 25 दिन के समय में ही सीमित कर (15 मार्च से 10 अप्रैल, 2020) एसईटी के हाथ क्यों बांध दिए? इसका सीधा फायदा किसको मिला?

6.क्या गृहसचिव और गृहमंत्री द्वारा 2019-20 के बीच नाजायज शराब पकड़े जाने, नाजायज शराब की ट्रांसपोर्टेशन और पकड़ी गई शराब की स्टोरेज के बारे में हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट एसईटी द्वारा दिए जाने की सिफारिश की गई थी? तो फिर मुख्यमंत्री ने इस जांच को एसईटी को ना देकर अलग से फाइल मंगवाने के बारे में क्यों लिखा? वह क्या रहस्य था और वह कौन से नाम थे जिनकी जांच मुख्यमंत्री एसईटी द्वारा नहीं करवाना चाहते थे?

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एसईटी की रिपोर्ट में सफेदपोशों और अफसरशाही की शराब ठेकेदारों और शराब माफिया से संलिप्तता का षडयंत्र खुले तौर से सामने आया है। पर उप-मुख्यमंत्री ने एसईटी की रिपोर्ट को ही सिरे से खारिज कर दिया और मुख्यमंत्री ने उप-मुख्यमंत्री की बात से किनारा कर उनके दावे को खारिज कर दिया। ऐसे में जब मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री अलग-अलग राजनीतिक दलों से हैं और गठबंधन की सरकार चलाते हैं, तो एक–दूसरे पर अविश्वास की स्थिति स्पष्ट है। साफ है कि दोनों दलों ने एक-दूसरे में विश्वास खो दिया है। सवाल यह है कि ऐसे में क्या खट्टर सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार रह गया है? मुख्यमंत्री और दुष्यंत चौटाला इसका जवाब हरियाणा की जनता को दें।

Published: 10 Aug 2020, 11:13 AM
लोकप्रिय
next