लॉकडाउन ग्राउंड रिपोर्टः लोग खुद निकलना नहीं चाहते, मजबूरी में निकल भी रहे तो सामान नहीं मिल रहे

कोरोना वायरस को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन करते हुए मोदी सरकार ने दावा किया था कि खाने-पीने के सामान की दिक्कत नहीं होगी, पर पूरे देश में सप्लाई चेन भयंकर रूप से प्रभावित हो गई है। इसकी वजह से जरूरी सामान नहीं मिल रहे और अब तो दूध-सब्जी पर भी आफत है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

केंद्र सरकार ने दावा तो किया था कि लॉकडाउन के दौरान खाने-पीने के सामान की दिक्कत नहीं होगी, पर पूरे देश में सप्लाई चेन भयंकर रूप से प्रभावित हो गई है। इसकी वजह से सामान नहीं मिल रहे और मिल भी रहे हैं, तो अधिक दामों पर। ताजा सामान- जैसे, दूध, उससे बनी चीजें और सब्जियों की भी किल्लत होने लगी है। इस आपात स्थिति में भी मुनाफाखोर और जमाखोर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। लगभग सभी राज्यों में यही हाल है।

पश्चिम बंगाल

बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर तक के इलाकों में नाॅनवेज फूड आम है। इस पूरे इलाके में लॉकडाउन की वजह से इसकी किल्लत हो रही है। ट्रेन-बस बंद होने की वजह से छोटे व्यापारी बहुत दूर तक जा नहीं पा रहे। दुकानें बंद हैं या काफी कम समय के लिए खुल रही हैं। ऐसे में, ग्राहक आएं भी तो कहां से? यही दिक्कत सब्जियों के साथ हो रही है। राज्य में सबसे अधिक दिक्कत रसोई गैस की हो रही है। लाॅकडाउन शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी होम डिलिवरी शुरू नहीं हो पाई है। समझा जा सकता है कि इस पर ही निर्भर लोग आखिर कैसे खा-पका रहे होंगे।

असम

असम में डेयरी उद्योग में ठहराव-सा आ गया है। इसे 42 वर्षीय शिवलाल शर्मा के उदाहरण से समझा जा सकता है। वह करीब 80 जर्सी गाय पालते हैं। उन्होंने नवजीवन को बताया, “सभी होटल और रेस्तरां बंद हैं, इसलिए थोक व्यापारी हमसे दूध नहीं खरीदते हैं। मार्च के अंतिम दिन मैं 120 लीटर दूध लेकर आया, पर केवल 20 लीटर बेचने में कामयाब रहा।” जोराबाट के एक अन्य दुग्ध उत्पादक प्रदीप घोष ने कहा कि “समझ नहीं आ रहा, हम अपने जानवरों को खिलाएं कैसे? लाॅकडाउन से पहले चारे की कीमत 1,000 रुपये थी और एक सप्ताह बाद ही यह बढ़कर 1,300 रुपये हो गई है।”

बिहार

बिहार में तो आटा-चावल-दाल की भी दिक्कत होने लगी है। इसकी वजह यह भी है कि हड़बड़ी में काफी सारे लोगों ने जरूरत से ज्यादा सामान अपने घरों में जमा कर लिया और इस वजह से बाजार में इसकी शाॅर्टेज हो गई। पैकेट बंद आटा ज्यादातर दुकानों से गायब है, जबकि खुला आटा मिल भी रहा है, तो ज्यादा कीमतों पर। वैसे, बिहार राज्य खुदरा विक्रेता संघ के महासचिव रमेश तलरेजा कहते हैं कि आम लोगों की भीड़ में बाजार के बहुत सारे खिलाड़ियों ने पैकेट बंद आटा कालाबाजारी के लिए जुटा लिए थे, लेकिन वह भी प्रिंट रेट से ज्यादा में नहीं बिक सके क्योंकि सरकार ने तब तक सख्ती कर दी थी।

सब्जियों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बाहरी राज्यों से ट्रकों में सब्जी की जगह लोगों के भरकर आने के कारण बाजार ठंडा है। हरी की जगह सूखी सब्जियों से लोग किसी तरह काम चला रहे हैं। हालांकि खरीदार कम रहने के कारण दाम नीचे ही हैं। शुक्र है, आपाधापी तो है लेकिन अधिकतर जगह रसोई गैस के सिलेंडर लोगों को मिल जा रहे हैं। हां, ब्रांडेड नूडल्स और बिस्किट मिलना फिलहाल मुश्किल है।


हरियाणा

हरियाणा में भी सरकार की नाकाफी व्यवस्थाओं की वजह से सामानों की सप्लाई लाइन पूरी तरह से टूट चुकी है। दूध से लेकर सब्जी मंडी और किराना की दुकानों तक सब जगह हाल एक-जैसा ही है। दुकानदारों का कहना है कि सरकार ने दैनिक जरूरतों से जुड़े सामान की सप्लाई अगर यकीनी नहीं बनाई तो हमारे पास लोगों को देने के लिए कुछ नहीं बचेगा।

हाल यह है कि सरकार ने शहरों और गांवों में लोगों के घरों तक दैनिक जरूरत का सामान पहुंचाने के लिए दुकानदारों के नंबर सार्वजनिक किये थे, लेकिन सामान न होने की वजह से इनमें से तमाम नंबर काम ही नहीं कर रहे हैं। जिन दुकानदारों के नंबर काम कर भी रहे हैं, उनमें से अधिकांश सामान न होने की बात कर रहे हैं।

दूध के मुख्य स्रोत वीटा के आउटलेट्स कई जगह बंद ही दिख रहे हैं। दूध की गंभीर किल्लत हो गई है। दरअसल, वीटा तक दूध पहुंच ही नहीं पा रहा, तो सप्लाई कहां से होगी। रोहतक मिल्क प्लांट के चेयरमैन राजबीर अहलावत का कहना है कि दूध कम होने के कारण हमने घी, पनीर, लस्सी और दही का उत्पादन भी कम कर दिया है।

पंजाब दिखा रहा राह

दिक्कतें तो वही सब हैं, जो अन्य राज्यों में हैं, पर पंजाब में सरकार ने डोर टु डोर किराना और सब्जियां पहुंचाने की बेहतर व्यवस्था की है और इस वजह से लोगों में आपाधापी नहीं है। हालांकि, यहां भी सामान की किल्लत दुकानदार महसूस कर रहे हैं लेकिन तमाम शहरों, कस्बों और गांवों में घरों के अंदर से किराना की दुकानें चलाईं जा रही हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कई जगह थोक व्यापारियों ने उधार में सामान देना बंद कर दिया है और इससे रीटेल व्यापारियों को दिक्कत हो रही है।

पंजाब सरकार ने शासनादेश जारी किये हैं कि किराना उत्पादों और फलों, सब्जियों के दाम की लिस्ट विक्रेताओं को लगानी होगी। राज्य में घर-घर दूध सप्लाई करने वालों और रेहड़ी के जरिये गलियों-मोहल्लों में फल-सब्जियां बेचने वालों को अतिरिक्त छूट दी गई है। राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु के अनुसार, “लोगों को खाद्य पदार्थों की कमी नहीं आने देने के लिए हरसंभव व्यवस्था की जा रही है।”

(शिशिर, अमरीक, दिनकर कुमार और धीरेन्द्र अवस्थी के इनपुट के साथ )

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