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मध्य प्रदेश: पहली बार किसानों में जगी कर्ज मुक्त होने की उम्मीद, पहले हफ्ते 20 लाख आवेदन जमा

मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि रविवार तक कुल छह दिनों में करीब 20 लाख किसानों ने कर्जमाफी के आवेदन जमा करवा दिए हैं, और किसानों में भी पहली बार कर्ज मुक्त होने की उम्मीद जगी है। लेकिन बीजेपी को इससे तकलीफ है और वह इसे धोखा बताने पर तुली हुई है।

फोटो : सोशल मीडिया

संदीप पौराणिक, IANS

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार की 'जय किसान फसल ऋण माफी योजना' की शुरुआत हुए एक सप्ताह हो चुका है। सरकार का दावा है कि रविवार तक कुल छह दिनों में 19 लाख 54 हजार 219 किसानों ने कर्जमाफी के आवेदन जमा करवा दिए हैं। विपक्षी बीजेपी इसे किसानों के साथ छल बता रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि कर्जमाफी की इस कसरत से किसानों को कितनी उम्मीद है?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक रविवार तक 'जय किसान फसल ऋण माफी योजना' के तहत शुरुआती छह दिनों में ही 19 लाख 54 हजार 219 किसानों ने ग्राम पंचायतों में कर्जमाफी के आवेदन-पत्र जमा करवा दिए हैं। जमा आवेदन-पत्रों में 60.11 प्रतिशत हरे, 35़ 01 प्रतिशत सफेद और 4़ 88 प्रतिशत गुलाबी आवेदन-पत्र शामिल हैं। आधिकारियों के अनुसार, अभी तक 11 लाख 74 हजार 868 हरे, छह लाख 84 हजार 209 सफेद और 95 हजार 324 गुलाबी आवेदन-पत्र भरे जा चुके हैं।

सरकार की इस कसरत से फिलहाल किसानों में कर्ज मुक्त होने की आस जगी है।

मंदसौर जिले के बाबुल्डा गांव के किसान कैलाश चौधरी का कहना है, "लगभग दो साल पहले पिपलिया मंडी में छह किसानों ने अपने हक के लिए शहादत दी थी। उनके हक की लड़ाई की जीत जीत में बदलने की शुरुआत अब जाकर हुई है।" उन्होंने कहा, "दो लाख रुपए तक की कर्जमाफी के लिए आवेदन भराए जा रहे हैं। हमें लगता है कि यह सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से ले रही है।"

गौरतसह है कि मंदसौर 2017 के किसान आंदोलन का केंद्र रहा था। छह जून, 2017 को आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में छह किसान मारे गए थे। इस घटना के बाद पूरे राज्य में किसान आंदोलन भड़क उठा था, और उसके बाद यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया था।

किसान नेता केदार सिरोही का कहना है, "राज्य के कई हिस्सों के किसान कर्जमाफी को लेकर उत्साहित हैं। वे बड़ी संख्या में आवेदन जमा कर रहे हैं। किसानों को किसी तरह की दिक्कत न आए, इसके लिए किसान संगठनों के नेता और सदस्य उनकी मदद कर रहे हैं। सरकारी अमला भी किसानों के लिए सजग व सतर्क है। अलग-अलग रंग के आवदेन होने से किसानों को आवेदन करना आसान हो गया है।"

लेकिन विपक्षी दल बीजेपी लगातार इसे किसानों के साथ छल बता रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्जमाफी के आवेदन भराए जाने की प्रक्रिया शुरू होने पर कहा, "मुख्यमंत्री (कमलनाथ) और कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि किसानों की कर्जमाफी का उनका वादा पूरा हुआ। लेकिन वादा अभी पूरा कहां हुआ है, घोषणा का अर्थ पूरा होना नहीं होता है।"

राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव शिवराज के इस तर्क को खारिज करते है। उन्होंने कहा कि, "किसान कर्जमाफी के कमलनाथ सरकार के फैसले से बीजेपी परेशान है। वह घृणित व झूठ की राजनीति कर रही है। किसानों की कर्जमाफी कांग्रेस सरकार का एक ऐसा निर्णय है, जो बीजेपी सरकार के 15 सालों में किसानों के लिए लिए गए निर्णयों से कई गुना अधिक है।" उन्होंने कहा कि बीजेपी 2008 के विधानसभा चुनाव में ही किसानों को 50 हजार रुपये की कर्ज माफी की घोषणा कर वोट बटोर लिए थे, मगर सत्ता में आने के बाद वह कर्जमाफी से मुकर गई।

कांग्रेस प्रवक्ता सैयद जाफर ने कहा, "प्रदेश के 55 लाख किसानों का कर्ज माफ किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया जरूरी है। बीजेपी चाहे जो आरोप लगाए, मगर सच्चाई यह है कि किसान खुश हैं, उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "जिन किसानों पर कर्ज है, न तो उन्हें बैंक के नोटिस जा रहे हैं और न उनकी संपत्ति ही कुर्क की जा रही है। बीजेपी के शासनकाल में तो बिजली का बिल न देने पर किसान जेल गए और संपत्ति कुर्क हो गई।"

किसान नेता शिव कुमार शर्मा 'कक्काजी' इस योजना को किसान हितैषी बताते हैं। उनका कहना है कि, "मध्य प्रदेश सरकार ने एक किसान हितैशी फैसला किया है। राजनीतिक दल भ्रम फैला रहे हैं, किसानों पर राज्य में बीते डेढ़ दशक में कई गुना कर्ज बढ़ गया था। अब दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जा रहा है। सरकार नई है, उसके काम का इंतजार करना चाहिए, किसी भी तरह की टिप्पणी जल्दबाजी होगी।"

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ ग्रहण करते ही किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए थे। उसके बाद 15 जनवरी से आवेदन भरे जाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो पांच फरवरी तक चलेगा। सरकार के मुताबिक 22 फरवरी से कर्ज की राशि किसानों के खातों में जाने लगेगी।

इस योजना के तहत तीन रंग के आवेदन-पत्र भरवाए जा रहे हैं। सूची दो रंगों की है। जिन किसानों के बैंक खाते आधार कार्ड से जुड़े हैं, उनकी सूची हरे रंग की है, जिनके खाते आधार से जुड़े नहीं हैं, उनकी सूची सफेद रंग की है। इसलिए जिस रंग की सूची में किसान का नाम है, उसे उसी रंग का आवेदन-पत्र भरना है। जिन किसानों के नाम दोनों सूची में नहीं हैं, उन्हें गुलाबी रंग का आवेदन-पत्र भरना होगा। कमलनाथ ने इस योजना से 55 लाख किसानों को लाभ होने और कुल 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ होने की बात कहीं है।

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