'प्लेन क्रैश या साजिश?' अजित पवार की मौत पर संजय राउत ने जस्टिस लोया केस से तुलना कर उठाए सवाल
संजय राउत ने अपने बयान में सिंचाई घोटाले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन फाइलों के जरिए अजित पवार को वर्षों तक घेरा गया, उन्हीं फाइलों के आधार पर उन्होंने जवाब देना शुरू किया था।

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार की मौत के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
राउत ने साफ कहा है कि अजित पवार की प्लेन क्रैश में हुई मौत को सिर्फ एक दुर्घटना मानकर आगे बढ़ जाना सही नहीं होगा और इस पूरे मामले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
“जो दिख रहा है, उससे सवाल पैदा होते हैं”
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अजित पवार जैसे बड़े नेता की मौत अगर प्लेन क्रैश में होती है, तो सवाल उठेंगे ही। जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे संदेह पैदा करते हैं। सवाल पूछना गलत नहीं है।”
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी और इस पर आंख बंद करके भरोसा कर लेना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
‘घर लौटने’ की बात और सियासी दबाव का जिक्र
अपने बयान में संजय राउत ने यह भी कहा कि अजित पवार हाल के दिनों में यह संकेत दे चुके थे कि वह राजनीतिक रूप से घर लौटना चाहते हैं।
राउत के मुताबिक, अजित पवार NCP के दोनों गुटों को एक साथ लाने की दिशा में सक्रिय थे।
उन्होंने दावा किया, “जब उन्होंने यह रुख दिखाया, तब अचानक पुराने मामलों और फाइलों का दबाव बनाया जाने लगा। इसके बाद बहुत कम समय में उनकी मौत हो गई।”
‘सिंचाई घोटाले’ की फाइलों का संदर्भ
संजय राउत ने अपने बयान में सिंचाई घोटाले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन फाइलों के जरिए अजित पवार को वर्षों तक घेरा गया, उन्हीं फाइलों के आधार पर उन्होंने जवाब देना शुरू किया था।
राउत के अनुसार, “जब कोई नेता खुद को मजबूती से खड़ा करता है, तभी सबसे ज्यादा खतरा पैदा होता है।”
‘जस्टिस लोया केस’ से की तुलना
संजय राउत ने इस पूरे मामले की तुलना जस्टिस लोया केस से करते हुए कहा, “हमने पहले भी देखा है कि कैसे कुछ मौतों को जल्दबाजी में हादसा घोषित कर दिया गया। बाद में सवाल उठे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”
उनका कहना था कि इतिहास खुद को दोहराता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
NCP एकता को लेकर भी बयान
संजय राउत ने कहा कि अजित पवार NCP और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के बीच एकता के सबसे बड़े सेतु थे। उनके मुताबिक, अगर दोनों गुट एक हो जाते, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आता।
उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को यह एकता मंजूर नहीं थी। क्योंकि इससे कई राजनीतिक समीकरण बिगड़ जाते।”
मराठी नेतृत्व पर जोर
अपने बयान में संजय राउत ने यह भी कहा कि NCP मूल रूप से मराठी समाज की पार्टी है और इसका नेतृत्व मराठी हाथों में रहना चाहिए। उन्होंने इशारों में कहा कि पार्टी के अंदर बाहरी नियंत्रण को लेकर भी सवाल हैं।
“जांच से डर क्यों?”
संजय राउत ने अंत में सवाल उठाया कि अगर सब कुछ साफ है, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से डरने की जरूरत क्यों है?
उन्होंने कहा, “हम किसी पर आरोप नहीं लगा रहे, लेकिन सवाल पूछना हमारा अधिकार है। सच्चाई सामने आनी चाहिए।”
राजनीतिक माहौल और आगे की राह
अजित पवार की मौत की आधिकारिक पुष्टि पहले ही हो चुकी है और हादसे से जुड़े दृश्य भी सामने आ चुके हैं।
लेकिन संजय राउत के ताजा बयान के बाद यह मामला अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस बयान के बाद कोई औपचारिक जांच या राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आती है, या यह सवाल भी बाकी अनसुलझे मामलों की तरह समय के साथ दबा दिए जाएंगे।
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