महाराष्ट्र चुनाव: सीएम पद को लेकर शिवसेना-बीजेपी में है रार? आदित्य की दावेदारी पर फडणवीस ने दिया ये बयान

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर देवेंद्र फडणवीस का बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही दिनों बाद यानी 21 अक्टूबर को राज्य में मतदान होना है। मतदान से ठीक पहले उन्होंने सीएम पद पर अपनी दावेदारी सुनिश्चित की है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ रह है। बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि शिवसेना और उसके बीच सबकुछ ठीक चल रहा है। लेकिन खबरों की मानें तो सीट बंटवारे को लेकर उपजे विवाद और फिर सीटों के बंटवारे के बाद भी दोनों पार्टियों के बीच अभी भी खटास बरकरार है। दोनों पार्टियों के बीच सीटों के साथ सीएम पद को लेकर भी बयान सामने आते रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद को लेकर ताजा प्रतिक्रिया दी है।

देवेंद्र फडणवीस ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में सीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना का अटूट गठबंधन है और दोनों ही पार्टियां साथ चुनाव लड़ रही हैं। फडणवीस ने कहा कि वे सिर्फ बीजेपी के सीएम पद उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि शिवसेना के भी सीएम पद के उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि किसी को शक नहीं है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के बाद अगर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य को उप मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब कुछ ही दिनों बाद यानी 21 अक्टूबर को राज्य में मतदान होना है। मतदान से ठीक पहले उन्होंने सीएम पद पर अपनी दावेदारी सुनिश्चित की है। शिवसेना की तरफ से भी आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठती रही हैं। शिवसेना के कुछ नेताओं का कहना है कि बालासाहेब ठाकरे ने कहा था कि एक दिन शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा। ऐसे में पार्टी नेताओं का कहना है कि आदित्य ठाकरे चुनाव लड़ रहे हैं और अगर जीतते हैं तो क्यों न उन्हें सीएम बनाया जाए।

सीट बंटवारे को लेकर शिवसेना के अंदर नाराजगी चल रही है। महाराष्ट्र की 288 सीटों में से शिवसेना ने आधी सीटों की मांग की थी, लेकिन बीजेपी ने उसे सिर्फ 125 सीटें दीं। इसके बाद शिवसेना के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की थी। 10 अक्टूबर को पार्टी के 26 पार्षदों और करीब 300 कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया था। पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने अपना इस्तीफा शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भेजा था। ऐसे में इतने मतभेदों के बीच बीजेपी और शिवसेना यह दिखाने की कोशिश में जुटी हुई हैं कि उनके बीच सबकुछ ठीक चल रहा है।

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