गूंज बनाए रखना, सरकार को पता चले देसी घी पीने वालों से पाला पड़ा है- अलीगढ़ किसान पंचायत में गरजे जयंत चौधरी

अलीगढ़ किसान पंचायत में जयंत चौधरी ने कहा कि इन पंचायतो में जुट रही भीड़ किराए की नहीं है, बल्कि अपने अधिकार के लिए जुट रही है। इस भीड़ को कोई सब्जबाग नहीं दिखाया गया है और यह अपने अकाउंट में 15 लाख लेने भी नहीं आई है। यह किसान हैं और जमीन के लिए लड़ रहे हैं।

फोटोः आस मोहम्मद कैफ
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आस मोहम्मद कैफ

अलीगढ़ के मोरवाल में मंगलवार को आयोजित किसान महापंचायत में एक बार फिर हजारों की भीड़ देखी गई। लगातार घूम रहे आरएलडी नेता जयंत चौधरी यहां किसान पंचायत को संबोधित करने पहुंचे तो बिल्कुल भी थके नहीं दिखे, बल्कि और भी अधिक जोश में दिखाई दिए। लगातार पंचायतों में शामिल होने के बावजूद यहां भी उनका जोश बढ़ा हुआ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि वो न थकेंगे और न रुकेंगे क्योंकि किसानों ने अपने इस बेटे को देसी घी पिला कर अखाड़े में उतारा है। बड़े बुजुर्गों का भी आर्शीवाद है। महिलाओं ने भी आशीष दिया है। बच्चे तक आगे बढ़कर सेल्फी लेते हैं, माला पहनाते हैं।

फोटोः आस मोहम्मद कैफ
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महापंचायत को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा, आज मैं आह्वान करना चाहता हूं कि अपनी अंतरात्मा की आवाज पर समस्त समाज किसानों की लड़ाई का ईमानदारी से विश्लेषण करें और हमारा साथ दें। सरकार जिद पकड़ कर बैठ गई है तो हम भी देशी घी पीकर लड़ रहे हैं। हटने वाले हम भी नहीं हैं। बहुत से लोगों का कन्फ्यूजन दूर हो चुका है। लड़ाई एकदम सच्ची है। किसान हित की है। सरकार का मिजाज सही नहीं है। वो हमारी बात कहने वाले समाजसेवियों पर, पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज कर रही है। हमें इन पत्रकारों और समाजसेवियों की भी लड़ाई लड़नी है, जो हमारे साथ हैं, हम मरते दम तक उसके साथ हैं।”

फोटोः आस मोहम्मद कैफ
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जयंत चौधरी की इस बात पर किसान पंचायत में जोश से लबरेज भीड़ लगातार नारे लगाती रही। जयंत चौधरी ने यहां भी वही बात कही जो इससे पहले की 6 पंचायतो में कह चुके हैं, मगर इस बार जोश बहुत ज्यादा था। 10 दिन की सातवीं पंचायत में भी हजारों लोगों का जुटना और नई बात और नए नेता का ना होना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत के लिए पहली और बड़ी बात है। यही वो बात है जिसे जयंत चौधरी ने मंच से किसान क्रांति बताया और कहा कि किसानों में इतना बड़ा इंकलाब वो पहली बार देख रहे हैं। उन्होंने अलीगढ़ में कहा कि इन पंचायतो में जुट रही भीड़ किराए की नहीं है, बल्कि अपने अधिकार के लिए जुट रही है। इस भीड़ को कोई सब्जबाग नहीं दिखाया गया है और यह अपने अकाउंट में 15 लाख लेने भी नहीं आई है। यह किसान हैं और जमीन के लिए लड़ रहे हैं।

फोटोः आस मोहम्मद कैफ
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अलीगढ़ के मोरवाल के मैदान में आयोजित इस पंचायत को राष्ट्रीय लोकदल ने ही आयोजित किया था। खास बात यह है जयंत चौधरी रात में भी अलीगढ़ ही रुकेंगे और बुधवार को इसी जिले के इगलास में एक और महापंचायत में शिरकत करेंगे। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के चलते पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह पौत्र जयन्त चौधरी इस पूरे महीने गोंडा, खुर्जा, बलदेव, फतेहपुर सीकरी, भरतपुर, सादाबाद, शेरगढ़, छाता और गोवर्धन में भी पंचायत करेंगे। इस तरह वो सिर्फ 20 दिन में 16 महापंचायतों को संबोधित करेंगे। खास बात यह है कि जहां भी यह पंचायत आयोजित की जानी है अथवा हो चुकी है वो सभी जाट बहुल इलाके हैं। हालांकि जयंत चौधरी लगभग हर पंचायत में पूरा जोर लगाकर कहते हैं कि किसान की कोई जाति नहीं है और यह 36 बिरादरी की लड़ाई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंचायतों का यह दौर 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर खेत-खलिहान बचाने के लिए लड़ रहे किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं के बहने के बाद शुरू हुआ है। यहां राकेश टिकैत को आरएलडी के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के साथ खड़ा करने के बाद उनके पुत्र जयंत चौधरी इस सैलाब को गांव-गांव लेकर जा रहे हैं। यह पंचायतें उसी कड़ी का हिस्सा हैं।

जयंत चौधरी किसानों को नेतृत्व दे रहे हैं। कृषि बिल को वापस कराने को लेकर चल रहे आंदोलन से पैदा हुए आक्रोश को संगठित कर रहे हैं। जयंत चौधरी की इस कवायद के दूरगामी राजनैतिक परिणाम होंगे और सिर्फ सात दिनों में इन पंचायतों के प्रभाव से सत्ताधारी दल की नींव हिल गई है। कई गांवों में बीजेपी के नेताओं का विरोध हुआ है। बहिष्कार के बैनर टंग गए हैं और सजातीय बीजेपी नेताओं के हुक्का-पानी बंद करने की आवाजें उठाई गई हैं।

अलीगढ़ की इस किसान पंचायत में शामिल हुए अलीगढ़ के पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को कृषि बिल वापस लेने ही होंगे। यह अंग्रेजी शासनकाल में लाए गए डलहौजी के काले कानून जैसा है। अभी सिर्फ किसानों में आक्रोश है और उनके खेतों पर मजदूर काम कर रहे हैं। जरूरत पड़ेगी तो किसान खेती बंद कर देगा और किसान-मजदूर सब मिलकर आंदोलन करेंगे।

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Published: 09 Feb 2021, 10:27 PM
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