गंभीर आरोपों के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त हुए शामिल, लिए कई अहम फैसले

चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर के तहत नोटिस पाए लोगों के घर बीएलओ दस्तावेज लेने जाएंगे। कुछ मामलों को छोड़कर वोटर को सुनवाई के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी। आयोग ने दोहराया कि फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है।

गंभीर आरोपों के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त हुए शामिल, लिए कई अहम फैसले
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ज्ञानेश कुमार पर आरोपों के बीच चुनाव आयोग की बैठक

लंबे समय बाद दोनों चुनाव आयुक्त भी शामिल

बैठक के बाद तीनों चुनाव आयुक्तों की फोटो भी जारी

बैठक में तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर कई अहम फैसले लिए

चुनाव आयोग और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर हुए ताजा खुलासों को लेकर जारी विवादों के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में आयोग के तीनों चुनाव आयुक्त यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए। इस बैठक के बाद तीनों चुनाव आयुक्तों की फोटो भी जारी की गई।

लंबे समय बाद चुनाव आयोग की फुल बॉडी बैठक

लंबे समय बाद चुनाव आयोग की फुल बॉडी बैठक के बाद बताया गया कि इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर कई अहम फैसले लिए। बैठक के बाद कहा गया कि फॉर्म 6 को लेकर जो विवाद है, असल में वह कोई मुख्य मुद्दा है ही नहीं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म-6 के डिक्लेरेशन को सही माना है।

बैठक में लिए गए कई बड़े फैसले

चुनाव आयोग की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति के साथ कई फैसले किए हैं। इसमें कहा गया कि एसआईआर के तहत नोटिस पाए लोगों के घर बीएलओ दस्तावेज लेने जाएंगे। कुछ मामलों को छोड़कर वोटर को सुनवाई के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही कहा गया कि डीईओ जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क लगाएंगे। आयोग ने दोहराया कि एसआईआर में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रही।

एक और अहम फैसले में आयोग ने कहा कि ECINET की समीक्षा वरिष्ठ डीईसी और आईईटी या आईआईएम के स्वतंत्र विशेषज्ञ की समिति करेगी। इसके अलावा दिल्ली में एसआईआर के दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर कर दी गई है।


छूटे और नए लोग नाम जुड़वा सकेंगे

एक और फैसले में आयोग ने कहा कि आयोग की सभी बैठकों में एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही जारी होगी। सभी अधिकारियों की APAR रिपोर्ट हर साल निर्धारित समय 31 दिसंबर तक पूरी होगी। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी। आयुक्तों की तरफ से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

इसके अलावा एक और अहम फैसले में कहा गया कि एसआईआर की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही पूरा हो चुकी है। अगर एसआईआर के दौरान या उसके बाद वोटर लिस्ट में जिन लोगों का नाम छूट गया है, इसके साथ पहली बार वोट देने वाले लोग भी, अपने नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए निरंतर अपडेटेशन के तहत संबंधित ईआरओ के पास आवेदन दे सकते हैं। आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारियों को इसके लिए सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। एसआईआर पूरा होने के बाद सीईओ, डीईओ और ईआरओ छूटे हुए और नए वोटरों के नाम जुड़वाने के लिए तुरंत विशेष अभियान शुरू करेंगे।

कैबिनेट सचिव को पत्र के बारे में सफाई

आयोग की तरफ से यह भी बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी को जो चिट्ठी लिखी गई थी, उसका चुनाव आयोग के पॉलिसी डिसीजन से कोई लेना-देना नहीं था। चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि कैबिनेट सचिव को पत्र आईटी नीति नहीं, प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। देशव्यापी एसआईआर से संबंधित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

इसके साथ ही आयोग ने अपने आधिकारिक बयान के आखिर में कहा कि यह प्रेस विज्ञप्ति 26 सितंबर की आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों और आयोग की पूर्ण मंजूरी से जारी किया गया है।

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