मराठा आरक्षणः जरांगे ने मुंबई मार्च का ऐलान किया, 19 सितंबर से आजाद मैदान में करेंगे अनशन, सरकार को दी चेतावनी

जरांगे ने समुदाय के मकसद के लिए इसे "आखिरी लड़ाई" बताते हुए कहा कि हमारा मकसद शांति से मुंबई पहुंचना और जीत हासिल करके लौटना है। हम इस मुद्दे को मुंबई लेकर जाएंगे। यह अंतिम लड़ाई है और एक भी मराठा घर में नहीं रहना चाहिए।

जरांगे ने मुंबई मार्च का ऐलान किया, 19 सितंबर से आजाद मैदान में करेंगे अनशन, सरकार को दी चेतावनी
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मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार को ऐलान किया कि वह 15 सितंबर को मुंबई मार्च शुरू करेंगे और 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। जरांगे ने मुख्यमंत्री और पुलिस से उन्हें नहीं रोकने की अपील भी की। जरांगे ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को रोका जाता है तो ऐसी कार्रवाई की जिम्मेदारी फडणवीस की होगी। यह आंदोलन 14 से 25 सितंबर तक मनाए जाने वाले गणपति उत्सव के बीच शुरू होगा।

अंतरवाली सराटी गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने मार्च के रूट की पूरी जानकारी दी। जरांगे ने कहा कि यह मार्च मराठा समुदाय के गौरव और अस्तित्व का प्रतीक है। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले इलाकों के समर्थकों से अपील की कि अगर वे मुंबई तक नहीं जा सकते तो भी बाहर निकलकर अपना आशीर्वाद दें। उन्होंने समुदाय के लोगों से यह भी कहा कि वे तय तारीखों पर अपना काम-काज रोककर आंदोलन में शामिल हों।

15 सितंबर को मार्च शुरू, 19 सितंबर को मुंबई पहुंचेगा

जरांगे के अनुसार, मार्च अंतरवाली – शाहगढ़ – गेवराई – बीड – मंजरसुम्भा – लिम्बा गणेश – पाटोदा रूट से होते हुए मुंबई की ओर बढ़ेगा। गाड़ियों के बड़े काफिले के धीमी गति से चलने के कारण यह यात्रा कई चरणों में पूरी होगी। पहला पड़ाव पाटोदा (बीड जिला) में होगा, दूसरा पड़ाव श्रीगोंडा (अहिल्यानगर जिला) में, तीसरा पड़ाव हडपसर (पुणे जिला) में और चौथा पड़ाव खोपोली (रायगढ़ जिला)/ कोपरखैरने (नवी मुंबई) में होगा (अभी खोपोली तय किया गया है)। अंतिम मंज‍िल मुंबई का आजाद मैदान होगी।

जरांगे ने कहा कि मुंबई की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी 15 सितंबर को बीड जिले के पाटोदा में रुकेंगे। इसके बाद अगले दिन वे अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंदा, 17 सितंबर को पुणे जिले के हडपसर और 18 सितंबर को रायगढ़ जिले के खोपोली में ठहरेंगे। इसके बाद वे नवी मुंबई के खारघर में डेरा डालेंगे और फिर महानगर (मुंबई) की ओर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपने निर्धारित पड़ावों पर पहुंचने से पहले हर दिन करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। उन्होंने बताया कि दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन 19 सितंबर को दिन में 10 बजे शुरू होगा।


पुलिस जहां रोकेगी, वहीं सड़क पर बैठ जाएंगे

अलग-अलग इलाकों से आई मांगों पर बात करते हुए जरांगे पाटिल ने बताया कि हडपसर वाला रूट इसलिए चुना गया, ताकि पुणे और पश्चिमी महाराष्ट्र के उन समर्थकों को भी शामिल किया जा सके, जिन्हें पिछले मार्च के दौरान छूट जाने का एहसास हुआ था। उन्होंने राज्य के अधिकारियों से अपनी अपील दोहराते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस और पुलिस से कहा कि वे इस शांतिपूर्ण रैली में कोई बैरिकेड न लगाएं और न ही कोई रुकावट डालें।

जरांगे पाटिल ने कहा, "हम अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से भूख हड़ताल करना चाहते हैं। अगर हाईवे पर कहीं भी पुलिस हमें रोकती है, तो हम बैरिकेड्स को नहीं हटाएंगे और न ही अधिकारियों से भिड़ेंगे। जहां भी हमें रोका जाएगा, हम बस शांति से सड़क पर बैठ जाएंगे।" उन्होंने काफिले में शामिल सभी लोगों को सख्त अनुशासन बनाए रखने, ओवरटेकिंग न करने, आम जनता को कोई नुकसान न पहुंचाने और तय रास्ते पर ही चलने का निर्देश दिया।

जरांगे ने बताया "आखिरी लड़ाई"

जरांगे पाटिल ने हड़ताल के 15वें दिन अपनी सेहत के बारे में बात करते हुए कहा कि वे सिर्फ आईवी फ्लूइड्स की वजह से ही बोल पा रहे हैं। समुदाय के मकसद के लिए इसे "आखिरी लड़ाई" बताते हुए उन्होंने भीड़ से पूछा कि उन्हें अंतरवाली में ही रुकना चाहिए या मुंबई की ओर कूच करना चाहिए। भीड़ ने जोरदार नारों के साथ जवाब दिया- "मुंबई, मुंबई!" जरांगे पाटिल ने राज्य की राजधानी तक मार्च करने का फैसला सुनाते हुए कहा, "हमारा मकसद शांति से मुंबई पहुंचना और जीत हासिल करके लौटना है। हम इस मुद्दे को मुंबई लेकर जाएंगे। यह अंतिम लड़ाई है और एक भी मराठा घर में नहीं रहना चाहिए।’’

पिछले साल मुंबई में अनशन से जनजीवन प्रभावित हुआ था

गौरतलब है कि मुंबई में पिछले साल अगस्त-सितंबर में जरांगे के अनशन के कारण शहर के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ था। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के आसपास के इलाके भी शामिल थे, जहां गतिविधियां ठप हो गई थीं। जरांगे की प्रमुख मांगों में से एक यह है कि एक सरकारी आदेश जारी किया जाए, जिससे मराठा समुदाय पुराने रिकॉर्ड और गजट दस्तावेजों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में कुनबी समुदाय को आरक्षण का दावा कर सके।

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