मराठा आरक्षणः जरांगे अनशन शुरू करने पर अड़े, महाराष्ट्र सरकार को 28 अगस्त की समय सीमा दी
सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्रियों शंभूराज देसाई, राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की और उनसे आंदोलन पर आगे नहीं बढ़ने की अपील की। हालांकि, जरांगे अपने फैसले पर अडिग रहे।

महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा आरक्षण का मुद्दा जोर पकड़ता दिख रहा है। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे जालना ज़िले के अंतरवाली सराटी में 29 अगस्त से अनशन शुरू करने पर अड़े हुए हैं। जरांगे ने ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग पर महाराष्ट्र सरकार को 28 अगस्त की समयसीमा दी है।
सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्रियों शंभूराज देसाई, राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की और उनसे आंदोलन पर आगे नहीं बढ़ने की अपील की। हालांकि, जरांगे अपने फ़ैसले पर अडिग रहे और अपनी मांगों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को 28 अगस्त की समय सीमा दी।
जरांगे ने सरकार को 28 अगस्त तक की समयसीमा दी
जरांगे ने मांग की है कि मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज जारी करने की लंबित प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी कर ली जाए। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन में भाग लेने वालों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की भी मांग की। जरांगे ने कहा कि समुदाय कानून के दायरे में और 1967 के रिकॉर्ड के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मराठाओं के ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनकी कुनबी पहचान की पुष्टि करते हैं, उन्हें कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाने चाहिए।
अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक मीडिया और मराठा समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में हुई। जरांगे ने आरोप लगाया कि मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और संजय शिरसाट मराठा समुदाय को आरक्षण देने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
जरांगे ने पूछा- क्या सरकार आरक्षण नहीं देने जा रही है?
बैठक में मंत्री सामंत ने कहा कि लगभग 58 लाख रिकॉर्ड की जांच से कई जरूरी प्रविष्टियों की पहचान हो पाई, जबकि कुछ रिकॉर्ड अभी अपलोड किए जाने बाकी हैं। हालांकि, जरांगे ने पूछा कि जांचे गए कुल रिकॉर्ड में से असल में कितने वैध कुनबी रिकॉर्ड की पहचान की गई है।प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे और शिंदे समिति के सदस्यों के बीच बातचीत भी कराई।
जरांगे ने कहा कि योग्य आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी हो जानी चाहिए। उन्होंने सरकार के प्रतिनिधियों से पूछा, ‘‘हमें साफ़-साफ़ बताएं कि क्या सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं देने जा रही है?’’
जरांगे ने फडणवीस और एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाया
जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रति भी असंतोष जताया और आरोप लगाया कि योग्य आवेदकों को कुनबी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रियों ने कहा कि न तो मुख्यमंत्री और न ही उपमुख्यमंत्री प्रमाणपत्र या वैधता दस्तावेज जारी करने में कोई रुकावट डाल रहे हैं।
जरांगे से मुलाक़ात के बाद मंत्री विखे पाटिल ने पत्रकारों से कहा कि सरकार मराठा समुदाय के सदस्यों द्वारा मांगे जा रहे कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने और उनके सत्यापन में आने वाली कमियों तथा प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए काम कर रही है। मंत्री ने कहा, ‘‘हमने जरांगे से आंदोलन जारी रखने के अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया है। हम दो-तीन दिन में समस्याओं का समाधान कर लेंगे।’’
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29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन जारी रहेगा
विखे पाटिल ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण लागू करने में कुछ देरी और गलतियों को स्वीकार किया और कहा कि सरकार सुधार के कदम उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी दस्तावेज जारी करने और सत्यापन के दौरान बाधाएँ पैदा कर रहे हैं।मंत्री ने कहा, ‘‘यह एक गंभीर मामला है। अगर अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’
हालांकि, जरांगे ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी प्रमाणपत्र की वैधता रद्द कर रहे हैं और ऐसे मामलों का तुरंत समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 29 अगस्त को प्रस्तावित आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार का आश्वासन ठोस कार्रवाई में नहीं बदलता।
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