जंतर-मंतर पर आज फिर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ी, लोग अब पीछे हटने के मूड में नहीं, जोश पहले से ज्यादा हाई

जंतर-मंतर पहुंचे छात्रों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया है और वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। युवाओं ने कहा कि सोमवार को पुलिस की बर्बरता से वे डरे नहीं हैं बल्कि इस घटना ने आंदोलन में और लोगों को जोड़ा है।

जंतर-मंतर पर आज फिर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ी, लोग अब पीछे हटने के मूड में नहीं, जोश पहले से ज्यादा हाई
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एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान छात्रों-युवाओं पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के बावजूद आज फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोगों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अब पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं और उनका जोश पहले से और ज्यादा हाई है। मंच से लगातार भाषण और नारे जारी हैं, जबकि नीचे लोग अलग-अलग ग्रुप में अपने-अपने अंदाज में प्रदर्शन कर रहे हैं।

भीड़ को देखते हुए पुलिस ने कई रास्तों के बंद किया

शाम साढ़े पांच बजे तक जंतर-मंतर पूरी तरह खचाखच भर चुका है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने शाम पांच बजे के बाद संसद मार्ग की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया है और लोगों से रास्ता खाली करने की अपील की है। ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि जनपथ की ओर जाने वाले मार्ग को भी पुलिस बंद करने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का भी कहना है कि उस रास्ते पर आवाजाही रोक दी गई है। फिलहाल, संसद मार्ग थाने के सामने से केरल हाउस के बगल से होकर जाने वाला मार्ग खुला है।

पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को और मजबूत किया

जंतर-मंतर पहुंचे छात्रों और युवाओं का कहना है कि पुलिस के बल प्रयोग की कार्रवाई ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया है और वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। दोपहर तक ही जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल छात्रों, उनके अभिभावकों और समर्थकों से खचाखच भर गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं को लेकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।

कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सोमवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ आमना सामना होने से वे डरे नहीं हैं बल्कि इस घटना ने आंदोलन में और लोगों को जोड़ा है। सोमवार के संसद मार्च में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी चंदा ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से आंदोलन और तेज हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने जिस तरह की पुलिस की बर्बरता देखी, उससे हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है। हम दोबारा इसलिए लौटे हैं क्योंकि यह आंदोलन कई लोगों के त्याग और संघर्ष से खड़ा हुआ है। हम उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। जब तक हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।’’


कई छात्रों के साथ अभिभावक भी पहुंचे

साक्षी चंदा के साथ खड़ी उनकी मां ने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज यहां इसलिए आई हूं क्योंकि यह हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर हम अभी उनके साथ नहीं खड़े होंगे, तो कौन होगा? वे अपनी शिक्षा और करियर से जुड़े सवाल उठा रहे हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।’’

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन अब कथित पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यापक मुहिम बन गया है। इस दौरान जंतर-मंतर पर ‘‘धर्मेंद्र प्रधान, इस्तीफा दो’’ और ‘‘एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे’’ के नारे लगातार गूंजते रहे।

प्रदर्शन में बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे

स्नातकोत्तर छात्रा रितिका शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है। उन्होंने कहा, ‘‘हममें से कई लोगों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं। हम यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि इसलिए आए हैं क्योंकि छात्रों को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए।’’

इस प्रदर्शन में दिल्ली के बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। गाजियाबाद से आए आदित्य सिंह ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शनकारियों का हौसला तोड़ने में नाकाम रही। उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने बैरिकेडिंग, हिरासत और बल प्रयोग देखा, लेकिन इसका आज के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा। बल्कि इसके उलट, और अधिक लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘इतिहास गवाह है कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि जब नागरिक अपने सवालों के साथ सड़कों पर उतरते हैं, तो उनकी आवाज को दबाना बहुत मुश्किल होता है।’’

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कांग्रेस सेवा दल ने पहुंचाया खाना

वहीं प्रदर्शन स्थल पर अब भी बड़ी संख्या में लोग खाना, पानी और अन्य आवश्यक रसद सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं। कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों को खाने के पैकेट्स बांटे और ये भरोसा दिलाया कि आप अकेले नहीं हो। हम मिलकर मोदी सरकार की छात्र विरोधी शिक्षा व्यवस्था को बदलकर रहेंगे- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर रहेंगे। वहीं निजी तौर पर भी कई छात्र और युवा लगातार प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंच रहे हैं।

विपक्ष के कई दिग्गज नेता पहुंचे

वहीं आज भी कई विपक्षी नेताओं का जंतर-मंतर पहुंचने और प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का सिलसिला जा रहा। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और अरविंद सावंत भी जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से मिलकर अपना समर्थन जताया। वहीं आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह भी जंतर-मंतर पहुंचे।

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दीपके ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने संगठन के साथ बातचीत शुरू करने की केंद्र सरकार की मंशा पर मंगलवार को सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो कॉजपा के साथ बातचीत कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है।

दीपके ने कहा, “सरकार ने हमारा समय बर्बाद किया। उसने हमारे प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया और उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए। आशुतोष रांका और सौरव दास को एक तरह से जेपी नड्डा के आवास पर नजरबंद कर दिया गया था।” दीपके ने आरोप लगाया, “पूरी योजना हमारी टीम को तितर-बितर करने की थी, ताकि जब अफरातफरी मचे तो कोई वहां मौजूद न हो। इसी वजह से उन्हें पांच घंटे तक बैठाए रखा गया और हमारा समय बर्बाद किया गया। एक तरफ आप बातचीत के लिए बुलाते हैं और दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियां बजवाते हैं।”

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हिरासत में लिए गए छात्रों का पता नहीं

वहीं, सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिये गए छात्रों के परिवारों ने कहा कि वे घंटों से उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज किया गया है या नहीं। तिलक नगर निवासी कार्तिकेन ने बताया कि उनके 20 वर्षीय भाई हर्षित को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया और माना जा रहा है कि उसे उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के किसी थाने में रखा गया है। कार्तिकेन ने बताया कि उनका भाई इस साल दो बार नीट परीक्षा दे चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘हम शालीमार बाग इलाके के एक थाने जा रहे हैं। वहां पहुंचने के बाद ही हमें स्थिति का पता चलेगा।’’

एक अन्य मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई कर चुके और वर्तमान में एलएलएम कर रहे 26 वर्षीय अमित उपाध्याय के परिवार ने बताया कि उसे भी हिरासत में लिया गया है और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के एक अन्य थाने में रखा गया है। परिवार ने कहा कि वे अमित से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया है कि उसे कब रिहा किया जाएगा या उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज किया गया है या नहीं।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे प्रमुख मांग

छात्र संगठनों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र थे। प्रदर्शनकारियों से जुड़े वकीलों के अनुसार, हिरासत में लिये गए 38 लोगों को पहले बुराड़ी थाने ले जाया गया और बाद में शाम को छत्रसाल स्टेडियम स्थानांतरित कर दिया गया। वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्हें स्टेडियम में हिरासत में लिये गए लोगों से मिलने या पुलिस अधिकारियों से बात करने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं, औपचारिक गिरफ्तारी हुई है या आरोप लगाए गए हैं।

कॉजपा द्वारा आहूत इस प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए थे, जिनमें छात्र संगठन आइसा, केवाईएस और एसएफआई के सदस्य और अन्य लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक और नई लागू की गई डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के कारण कक्षा 12 के परिणामों में बड़े पैमाने पर विसंगतियों को लेकर शिक्षा सुधारों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

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