चुनाव आयुक्त के खाली पद भरने के लिए 15 मार्च को बैठक, पीएम मोदी की अध्यक्षता में पैनल करेगा नाम फाइनल

अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही रह गए हैं। इससे पहले अनूप पांडे 15 फरवरी को चुनाव आयुक्त पद से रिटायर हुए थे। पांडे के रिटायरमेंट के बाद से चुनाव आयोग में एक पद खाली था।

चुनाव आयुक्त के खाली पद भरने के लिए 15 मार्च को बैठक, पीएम मोदी करेंगे पैनल की अध्यक्षता
चुनाव आयुक्त के खाली पद भरने के लिए 15 मार्च को बैठक, पीएम मोदी करेंगे पैनल की अध्यक्षता
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नवजीवन डेस्क

लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद तीन में से दो चुनाव आयुक्त के पद खाली हो जाने से खड़ी हुई समस्या को देखते हुए सरकार ने इन पदों को भरने की कवायद शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में पीएम मोदी की अध्यक्षता वाले पैनल की 15 मार्च को शाम 6 बजे अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में दो नए चुनाव आयुक्त के नाम पर मुहर लग सकती है। गोयल के इस्तीफे से आयोग में केवल एक मुख्य चुनाव आयुक्त ही रह गए हैं, क्योंकि एक आयुक्त का पद पहले से खाली था।

देश में चुनाव संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो चुनाव आयुक्त होते हैं। आयोग के एक चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे फरवरी 2024 में रिटायर हो गए हैं, जिससे आय़ोग में केवल दो चुनाव आयुक्त रह गए। लेकिन दूसरे चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने 9 मार्च को अचानक पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में इस वक्त सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही रह गए हैं।

ये है चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया

यहां बता दें कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने 29 दिसंबर 2023 को ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून बदला है। इसके मुताबिक, सबसे पहले केंद्रीय विधि मंत्री और दो केंद्रीय सचिवों की सर्च कमेटी 5 नाम शॉर्टलिस्ट कर चयन समिति को देगी। इसके बाद प्रधानमंत्री, उनके द्वारा मनोनित एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता या सबसे बड़े विरोधी दल के नेता की तीन सदस्यीय समिति चुनाव आयुक्त के नाम तय करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति होगी।


राजीव कुमार और अरुण गोयल के बीच मतभेद!

अरुण गोयल के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि वह मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में थे। दरअसल मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार फरवरी 2025 में रिटायर होने वाले हैं। वहीं गोयल का कार्यकाल 5 दिसंबर 2027 तक था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोयल और राजीव कुमार के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गया था। हालांकि गोयल ने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया है। लेकिन खबरें हैं कि गोयल की सेहत बिल्कुल ठीक है।

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयोग लोकसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने पश्चिम बंगाल गए थे। लेकिन गोयल ने अचानक पश्चिम बंगाल में तैयारियों से जुड़ी जानकारी देने के लिए कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से इनकार कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद हो गए थे। इसके बाद 5 मार्च को राजीव कुमार ने अकेले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि खराब सेहत के चलते गोयल दिल्ली लौट गए।

अरुण गोयल की नियुक्ति पर उठा था विवाद

यहां बता दें कि गोयल की नियुक्ति पर भी काफी विवाद हुआ था। गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 18 नवंबर 2022 को भारी उद्योग विभाग के सचिव पद से वीआरएस लिया था और ठीक एक दिन बाद चुनाव आयुक्त बना दिए गए थे। इसके बाद एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स गोयल की चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। लेकिन सुनवाई से पहले ही दो जज जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

एडीआर ने याचिका में कहा था कि गोयल की नियुक्ति कानून के मुताबिक सही नहीं है। साथ ही यह निर्वाचन आयोग की सांस्थानिक स्वायत्तता का भी उल्लंघन है। एडीआर ने सरकार और चुनाव आयोग पर खुद के फायदे के लिए अरुण गोयल की नियुक्ति करने का आरोप लगाया था। साथ ही गोयल की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की थी।


सुप्रीम कोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की फाइल बिजली की रफ्तार से क्लियर की गई। जिस दिन आवेदन आय़ा, उसी दिन क्लियरेंस दे दी जाती है और प्रधानमंत्री भी नाम को मंजूरी दे देते हैं। ऐसी अर्जेंसी क्या थी, जो सारा काम एक दिन में ही करके नियुक्ति दी गई। हमें भी पता है कि कुछ काम बिजली की रफ्तार से करने पड़ते हैं, लेकिन यहां तो वैकेंसी 15 मई से थी। हालांकि, बाद में सरकार ने संसद से कानून में संशोधन कर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर एकाधिकार स्थापित कर लिया।

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