मोदी कैबिनेट का फैसला, चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियम किए सरल, अब भारत में धुआंधार निवेश करेगा ड्रैगन
सरकार ने चीन समेत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों को सरल बना दिया। इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया गया है।

सरकार ने मंगलवार को भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में ढील दी। अब इन देशों की 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां बिना अनिवार्य अनुमति के भारत में निवेश कर सकती हैं।
पहले, इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य अनुमति लेनी पड़ती थी। हालांकि, इन निवेश पर क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाएं और प्रवेश मार्ग समेत एफडीआई नियमों की अन्य शर्तें लागू रहेंगी। साथ ही, इन निवेश से संबंधित जानकारी डीपीआईआईटी (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) को पहले से देना अनिवार्य होगा।
सरकार ने इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। डायरेक्ट एफडीआई में बदलाव का मकसद स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों के लिए वैश्विक निधियों से ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार करने में आसानी के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।
प्रेस नोट 3 के अनुसार, भारत के साथ बॉर्डर साझा करने वाले किसी देश की इकाई, या जहां भारत में निवेश का लाभकारी स्वामी ऐसे किसी देश में स्थित है या उस देश का नागरिक है, सरकार की मंजूरी लेना जरूरी था। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो।
अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा।
कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक 'फास्ट ट्रैक' अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा।
सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के जबरिया अधिग्रहणों को रोकने के लिए 17 अप्रैल, 2020 को प्रेस नोट-3 (2020) के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन किया था।
लिस्ट में चीन-पाकिस्तान, दोनों के नाम
इस प्रेस नोट के तहत जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेने की जरूरत है। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं।
गलवान संघर्ष के बाद चीन से रिश्तों में खटास
भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आए कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत यानी 2.51 अरब अमेरिकी डॉलर है और वह 23वें स्थान पर है। जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई थी। इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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