आयुष्मान भारत योजना के तहत मोदी सरकार ने बिहार को नहीं दिया एक भी पैसा, बजट घटाकर किया आधा

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिस आयुष्मान भारत योजना का ढिंढोरा पीटती है, उसी योजना के तहत बिहार की नीतीश सरकार को एक भी पैसा नहीं दिया गया है। साथ ही मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इस योजना का आवंटन घटाकर आधा कर दिया गया है।

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया

मोदी सरकार ने साल पेश आम बजट में कम से कम 18 कल्याण योजनाओं के लिए पैसे के आवंटन में कमी कर दी है। और अब सामने आया है कि मोदी सरकार ने बिहार के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत इस वित्त वर्ष में कोई पैसा जारी ही नहीं किया है।

एक सूत्र ने बताया कि केंद्र ने बिहार की नीतीश सरकार को आयुष्मान भारत – पीएम जान आरोग्य योजना के मद में कोई पैसा जारी नहीं किया है। बिहार में नीतीश कुमार की बीजेपी के साथ सरकार है। हालांकि इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि इस योजना के क्रियान्वयन में बिहार का प्रदर्शन खराब रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने की जिम्मेदारी सत्ताधारी दल की ही होती है।

आयुष्मान भारत के लिए नीतियां निर्धारित करने में महती भूमिका निभाने वाले एक व्हिसिलब्लोअर ने बताया कि, “राज्य के खराब प्रदर्शन का बहाना नहीं बनाया जा सकता क्योंकि बिहार में बरसों से बीजेपी-जेडीयू की सरकार है। वे अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।”

इस सिलसिले में नेशनल हेरल्ड ने जेडीयू प्रवक्ता से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह तो शासन से जुड़ा मामला है। अलबत्ता हमें इस बारे में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से बात करने को कहा गया। लेकिन मंगल पांडे ने व्यस्तता का हवाला देकर इस मामले में कुछ नहीं कहा।

ध्यान रहे कि केंद्र सरकार ने इस साल आयुष्मान भारत योजना के तहत अलग-अलग राज्यों को करीब 1699 करोड़ रुपए जारी किए हैं, लेकिन बिहार के हिस्से में इसमें से कुछ भी नहीं आया है। जबकि, बिहार में इस योजना के कम से कम एक करोड़ लाभारथी परिवार हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक कोई 17 महीने पहले शुरु बुई आयुष्मान भारत योजना के तहत बिहार में करीब 1,56,000 मरीजों ने अस्पतालों में दाखिला लिया है और अब तक सिर्फ 40 लाख लोगों को ही ई-कार्ड जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह संसद में बताया कि, “तीन बड़े राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश) में इस योजना के लाभार्थियों की करीब 30 फीसदी आबादी है और ये राज्य अपने यहां इस योजना को लागू कर रहे हैं। ऐसे में इन राज्यों में अभी भी योजना से फायदा उठाने वालों की मांग बढ़ रह है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में इस योजना के खराब प्रदर्शन का असर योजना के आवंटन पर पड़ा है, जिसके चलते 2019-20 के बजट को संशोधित कर इस योजना के मद का खर्च 6,400 करोड़ से घटाकर 3,200 करोड़ कर दिया गया है।

सरकार के अपने बयान के मुताबिक बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश को भी इस योजना में अभी तक सिर्फ 100 करोड़ रुपए ही आवंटित हुए हैं और इसका कारण योजना का खराब क्रियान्वयन है। इसके अलावा बजट आधा होने के बाद भी सरकार ने अभी तक सिर्फ 1699 करोड़ ही खर्च किए हैं।

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