साहित्य अकादमी विजेता केपी रामानुन्नी ने कहा, कट्टर हिंदू ताकतों को पर्दे के पीछे से बढ़ावा दे रही है सरकार 

लेखक केपी रामानुन्नी का कहना है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार परोक्ष रूप से हिंदू सांप्रदायिक चरमपंथियों को बढ़ावा दे रही है, जिससे देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक केपी रामानुन्नी का मानना है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से हिंदू सांप्रदायिक चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है और उन्हें बढ़ावा दे रही है। इस वजह से देश में अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है रामानुन्नी ने कहा, "सरकार हिंदू सांप्रदायिक चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। वह इस मुद्दे से बच रही है, जो अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने जैसा है।" उन्होंने आगे कहा, "जब बात अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की आती है तो वे (सरकार) कानून के तहत सख्त कदम नहीं उठाते हैं। देश में अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं।"

मलयालम भाषा के लेखक रामानुन्नी पिछले सप्ताह तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने साहित्य अकदामी पुरस्कार लेने के कुछ ही मिनटों बाद पुरस्कार में मिली राशि को जुनैद खान की मां को दे दिया था। 2017 के जून में दिल्ली से हरियणा स्थित अपने घर जाते वक्त ट्रेन में 16 वर्षीय जुनैद की लोगों के एक समूह ने हत्या कर दी थी। उन्होंने इनाम में मिली राशि में से केवल तीन रुपये अपने पास रखे और बाकी के एक लाख रुपये जुनैद की मां सायरा बेगम को दे दिए थे।

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अपनी पुरस्कार राशि जुनैद की मां को सौंपते हुए केपी रामानुन्नी

लेखक रामानुन्नी ने कहा, "सांप्रदायिक घृणा कैंसर की तरह है और जब यह हो जाता है तो इसे रोक पाना बहुत मुश्किल होता है।" यह पूछने पर कि क्या आपको लगता है कि सांप्रदायिक घटनाएं वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद बढ़ गई हैं, उन्होंने कहा, “हां, वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद कई सांप्रदायिक मुद्दे उठे हैं। जब मैं सांप्रदायिक कहता हूं तो मेरा दोनों पक्षों से मतलब नहीं होता, यह अधिकतर हिंदू समुदाय के लिए है, जो मुस्लिमों के साथ असहिष्णुता बरत रहे हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार इन सांप्रदायिक झगड़ों को समाप्त करने का प्रयास नहीं कर रही है और एक दर्शक की तरह बर्ताव कर रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात राष्ट्र के हित के लिए खराब हैं। रामानुन्नी के साहित्यिक काम सांप्रदायिक सद्धभाव के उनके संदेश के लिए जाने जाते हैं। उनकी किताब 'दैवाथिंते पुस्तकम' (ईश्वर की अपनी पुस्तक) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार 2017 मिला है। जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने अपनी इनाम की राशि जुनैद की मां को क्यों दी, तो उन्होंने कहा, "यह दान नहीं है। अगर ऐसा होता तो मैं जुनैद की मां को उनके घर जाकर यह देता। जब आप यह साहित्य अकादमी के मंच पर दे रहे हैं तो इसके कई मायने हैं। यह अन्य लेखकों को अत्याचारों के बारे में लिखने के लिए प्रोत्साहित करेगा और दूसरे हिंदुओं को बताएगा कि असली और सच्चे हिंदू सिद्धांतों के मुताबिक आपको सांप्रदायिक नहीं होना चाहिए।"

रामानुन्नी ने कहा कि जुनैद की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि वह मुस्लिम था और यह सच्ची और असली हिंदू संस्कृति के लिए शर्मनाक है। रामानुन्नी को जुलाई 2017 में उनका दाहिना हाथ काटने की धमकी मिली थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें लेखक के दिमाग को जकड़ देती हैं। उन्होंने कहा, "बहुत से लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं सांप्रदायिक एकता पर लिखना बंद कर दूंगा। मैंने उनसे कहा कि नहीं। यह आत्महत्या करने जैसा होगा। एक लेखक के लिए अपना पक्ष नहीं जाहिर करना आत्महत्या के समान है।" उन्होंने कहा , "हालांकि यह भी सही है कि आप यह सब कहते तो हैं, लेकिन जब आपको धमकियां मिलती हैं तो कई लोगों का अवचेतन मन उन्हें सब कुछ कहने से रोकता है। यह एक तरह से किसी को परोक्ष रूप से नियंत्रित करना है। धमकियां लोगों में यह डर पैदा करती हैं। यह तथ्य है।" इंटरनेट के आज के दौर में किताबों के बारे में पूछने पर रामानुन्नी ने कहा कि पढ़ने की गुणवत्ता पिछले कुछ सालों में कम हुई है। उन्होंने कहा कि पढ़ने में लोग अब उस तरह का आनंद नहीं लेते जैसे पहले लिया जाता था। पढ़ने की आदत मरी तो नहीं है लेकिन इसकी गुणवत्ता घटी है।

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