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बिलकीस बानो केस में विपक्ष के निशाने पर मोदी सरकार, बीजेपी-आप ने ओढ़ी रहस्यमयी खामोशी

बिलकिस बानो मामले में उपेक्षा के मुताबिक BJP की तरफ से एक भी नेता ने बलात्कारियों की रिहाई पर मुंह नहीं खोला। इतना ही नहीं 2012 के निर्भाय केस में उबले लोगों को गुस्से और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की लहर पर सवार होकर सत्ता तक पहुंची आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे पर चुप है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का सम्मान भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में महिलाओं का अपमान करने वाली हर चीज से छुटकारा पाने का संकल्प लें। लेकिन गुजरात सरकार ने 2002 के बिलकिस बानो मामले में बलात्कार और हत्या के दोषी 11 लोगों को इस भाषण के चंद घंटों बाद ही जेल से रिहा कर दिया। इसके बाद कई विपक्षी दलों ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है।

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जैसी कि अपेक्षा थी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से एक भी नेता ने बलात्कारियों की रिहाई पर मुंह नहीं खोला। इतना ही नहीं 2012 के निर्भाय केस में उबले लोगों को गुस्से और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की लहर पर सवार होकर सत्ता तक पहुंची आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे पर चुप है। उधर उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी में भी इस बात पर रहस्यमयी सन्नाटा है।

लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गुजरात सरकार के आदेश को ‘अभूतपूर्व’ करार देते हुए सवाल किया है कि क्या यही ‘अमृत महोत्सव’ है। कांग्रेस ने कहा कि, “अगर हम सिर्फ अपराध की प्रकृति पर ही विचार करते, तो क्या बलात्कार उस श्रेणी में नहीं आता है जिसे कठोर से कठोर सजा दी जाए, और इस अपराध के दोषीके लिए कोई भी सजा कम है? लेकिन बीजेपी सरकार ने ऐसे लोगों को न सिर्फ रिहा कर दिया बल्कि उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। तो क्या यही अमृत महोत्सव है?

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कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि वे आगे कर बताएं कि उन्होंने अपने लाल किले के भाषण में जो कहा, वह सही शब्द हैं, या फिर उनका कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जो कुछ कहते हैं क्या उसका कोई अर्थ नहीं होता है? या फिर उनकी अपनी पार्टी, और उनकी पार्टी की सरकारों ने उनकी बात सुनना बंद कर दिया है? या फिर ऐसा है कि वह देश को एक बात कहते हैं और अपनी पार्टी की सरकार को कुछ और? पवन खेड़ा ने कठुआ और उन्नाव मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के समर्थक बलात्कारियों के समर्थन में रैलियां निकालते हैं तो पूरे देश का सिर शर्म से झुक जाता है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि, "जिन्होंने 'आजादी के अमृत महोत्सव' के मौके पर ऐसे लोगों को रिहा कर दिया जिन्होंने 5 माह की गर्भवती महिला से बलात्कार किया था और उसकी 3 वर्षीय लड़की की हत्या कर दी थी।" नारी शक्ति की बात करने वाले देश की महिलाओं को अपने इस कृत्य से क्या संदेश देना चाहते हैं? प्रधानमंत्री जी, पूरा देश आपके शब्‍दों और कार्यों में अंतर देख रहा है।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी इस मुद्दे पर कहा कि जिस समीक्षा समिति ने इन 11 अपराधियों को रिहाने करने का फैसला किया उनमें बीजेपी को दो विधायक सीके राउलजी और सुमन चौहान शामिल हैं। इसके अलावा समिति में एक अन्य सदस्य मुरली मूलचंदानी हैं जो गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में सरकारी पक्ष के प्रमुख गवाह थे। इस समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर थे।

इस मुद्दे पर बाकी दलों जैसे आरजोडी, एआईएमआईएम, सीपीएम, तृणमूल और बीएसपी ने भी गुजरात सरकार के इस कदम की आलोचना की है। आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि, “प्रधानमंत्री मोदी नारी शक्ति के सम्मान पर बड़ी-बड़ी बातें कीं, लेकिन गुजरात सरकार ने क्या किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं लेकिन उनकी पार्टी की सरकार ऐसा करती है।”

सीपीएम ने भी कहा है कि “न्यू इंडिया का असली चेहरा यही है जहां सजायाफ्ता हत्यारों-बलात्कारियों को रिहा किया जा रहा है और इंसाफ के लिए लड़ने वाले तीस्ता सीतलवाड जैसे लोगों को जेल में डाला जा रहा है।”

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