29 अप्रैल के बाद डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाएगी मोदी सरकार... TMC सांसद ने राज्यसभा में किया दावा
साकेत गोखले ने पूछा कि पिछले चार साल से जब कच्चे तेल के दाम कम थे तो क्या आम लोगों को उसका लाभ पहुंचाया था? उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा कि क्या वह आश्वासन दे सकती हैं कि कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद डीजल और पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे?

पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती को बहुत बड़ी राहत बताने की केंद्र सरकार की कोशिश की पोल खोलते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने राज्यसभा में दावा किया कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के कारण मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि नहीं कर रही है, लेकिन 29 अप्रैल के बाद इनके दाम बढ़ाए जाएंगे।
उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने कहा कि सरकार पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने प्रश्न किया कि पिछले चार साल से जब कच्चे तेल के दाम कम थे तो क्या सरकार ने आम उपभोक्ता को उसका लाभ पहुंचाया था?
उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा कि क्या वह इस बात का आश्वासन दे सकती हैं कि कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद डीजल और पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे? उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को चुनाव होने के बाद इनके दाम बढ़ा दिए जाएंगे। दरअसल 9 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी पश्चिम बंगाल और केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा।
साकेत गोखले ने कहा कि सरकार एक देश एक चुनाव की बात करती है किंतु बार-बार राज्यों में चुनाव होने से आम उपभोक्ता को यह लाभ तो मिलता है कि चुनाव तक सरकार दाम नहीं बढ़ाती। उन्होंने दावा किया कि देश में केवल नौ दिन की कच्चे तेल की आपूर्ति रह गयी है। उन्होंने कहा कि भारत में 74 दिन का तेल रिजर्व रह गया है। गोखले ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उसने पश्चिम बंगाल के लोगों का नौ लाख करोड़ रूपये से अधिक धन दबा रखा है और राज्य में अघोषित आपातकाल लगा रखा है।
डीएमके के पी विल्सन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ सत्ता में आयी थी किंतु आज यह बदल कर हो गया है, ‘‘सबका बोझ इनका विकास’’। उन्होंने कहा कि यह वित्त विधेयक नारों के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती आय असमानता और सरकार की मध्यम एवं कम आय वर्ग के लोगों के प्रति बेपरवाही, चिंता का विषय है। विल्सन ने कहा कि मौजूदा नीतियों के अनुसार दक्षिण के राज्यों से अधिक कर वसूला जाता है किंतु केंद्र की ओर से उत्तर भारत के कई राज्यों को अधिक धन आवंटित किया जाता है।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia