बिहार में मॉनसून की विदाई करीब, फिर भी 35% बारिश कम, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की मार
बिहार में मॉनसून की विदाई करीब है, लेकिन बारिश की कमी के बीच कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

बिहार में मॉनसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन इस साल राज्य में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। एक तरफ सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, तो दूसरी ओर गंगा, कोसी, गंडक समेत कई प्रमुख नदियों के उफान ने राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। यानी बिहार में इस मानसून एक ही समय में कहीं बाढ़ तो कहीं बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, मॉनसून की अवधि एक जून से 30 सितंबर तक रहती है और अब इसके समाप्त होने में करीब 15 दिन ही बचे हैं। इसके बावजूद राज्य में अब तक सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश हुई है। औरंगाबाद को छोड़कर बिहार के सभी 37 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
कई जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी
एक जून से 14 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक बिहार के कई जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। सबसे अधिक कमी शिवहर में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 62 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। सीतामढ़ी और जहानाबाद में भी बारिश की कमी 58 प्रतिशत रही।
बारिश की कमी के बावजूद राज्य में कई प्रमुख नदियों ने इस मानसून रौद्र रूप दिखाया। गंगा, कोसी, गंडक समेत सात बड़ी नदियों और पुनपुन समेत छह से अधिक छोटी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी रही।
गंगा ने पटना और भागलपुर में तोड़े पुराने रिकॉर्ड
गंगा नदी का जलस्तर पटना और भागलपुर में कई पुराने रिकॉर्ड पार कर गया। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंच गया था। यह वर्ष 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से छह सेंटीमीटर अधिक था।
इसी तरह भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर तक पहुंच गया। इसने वर्ष 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर को पार कर दिया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर तक नदियों के बढ़े जलस्तर और बाढ़ से राज्य के 15 जिलों में व्यापक असर पड़ा है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों के करीब 48.70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
खेतों पर दोहरी मार, कहीं पानी में फसल तो कहीं सूखने का खतरा
बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गईं। कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। वहीं, राज्य के दूसरे हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से कृषि कार्य प्रभावित हुआ है और फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
बिहार में इस साल मानसून की यही सबसे बड़ी विडंबना है। एक ही जिले में नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी फसलों को डुबो रहा है, जबकि उसी जिले के दूसरे हिस्सों में बारिश के अभाव में खेतों में नमी की कमी बनी हुई है।
बचे 15 दिन किसानों के लिए अहम
बारिश की कमी और बाढ़ ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। मानसून की विदाई में अब करीब 15 दिन ही बचे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बारिश कृषि और जल संसाधन, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
एक तरफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी घटने और जनजीवन सामान्य होने का इंतजार है, तो दूसरी ओर कम बारिश वाले जिलों के किसान मानसून की बची अवधि में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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