MPSC परीक्षा में अनियमितताओं पर भड़की शिवसेना UBT, सरकार से कहा- छात्रों के आक्रोश को नजरअंदाज न करें
MPSC परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर शिवसेना UBT ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बढ़ते आक्रोश को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पार्टी ने कहा कि अगर छात्रों का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा और उसे समय रहते नहीं संभाला गया तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
कई शहरों में सड़कों पर उतरे प्रतियोगी परीक्षार्थी
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पुणे, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती समेत प्रमुख शहरों में प्रतियोगी परीक्षा के हजारों उम्मीदवारों के प्रदर्शन का जिक्र किया। प्रदर्शनकारी MPSC के कथित भ्रष्ट नेतृत्व को तत्काल हटाने, डेटा लीक की पूरी और निष्पक्ष जांच कराने और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय में MPSC के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकार पर तीखा निशाना साधा गया। इसमें ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के दौरान हुए पेपर लीक का भी जिक्र किया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकारी पदों की लाखों रुपये में नीलामी हो रही है और इससे मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य पर चोट पहुंच रही है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) ने पेपर लीक मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि छोटे स्तर पर जुड़े लोगों को तो पकड़ा जा रहा है, लेकिन पेपर लीक रैकेट के कथित मास्टरमाइंड, सरगना और राजनीतिक संरक्षण देने वाले बड़े लोग अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे जाने से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे मेहनती छात्रों के सपने टूट रहे हैं। संपादकीय के मुताबिक, छात्रों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि पेपर लीक सिंडिकेट के प्रमुख सूत्रधार और उसके कथित उच्चस्तरीय समर्थकों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
‘परीक्षा के पेपर और नेता दोनों लीक हो रहे हैं’
‘सामना’ के संपादकीय में MPSC विवाद को महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति से जोड़ते हुए सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला किया गया। संपादकीय में कहा गया कि आयोग में बैठे लोग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करते हैं, जबकि सरकार में बैठे लोग राजनीतिक दलों, विधायकों और पार्षदों को लीक करते हैं। संपादकीय ने दोनों को एक ही तरह का धंधा बताया।
पुणे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से लगाए गए पोस्टरों का भी जिक्र किया गया। इन पोस्टरों में सवाल किया गया था कि क्या सरकार विधायकों को तोड़ने के लिए ही सत्ता में बैठी है?
सरकार के रवैये पर ठाकरे खेमे का निशाना
संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिछले एक दशक के दौरान महाराष्ट्र की राजनीति पर व्यापक प्रभाव का जिक्र करते हुए शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा गया। आरोप लगाया गया कि सरकार उन लीक को रोकने में विफल रही है, जिनसे युवाओं के करियर पर लगातार असर पड़ रहा है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आंदोलन कर रहे छात्रों की अनदेखी करने और ठेकेदारों के साथ बातचीत में व्यस्त रहने के लिए राज्य के मंत्रियों की आलोचना की। पार्टी ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के दौर की ‘शिवशाही’ व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मंत्रियों को प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर उनसे सीधे संवाद करने और जनता की शिकायतों को प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए जाते थे।
इसके उलट, संपादकीय में मौजूदा प्रशासन को निष्क्रिय और संवादहीन बताया गया, जो युवाओं की चिंताओं से दूर है। शिवसेना (यूबीटी) ने MPSC पेपर लीक मामले में शामिल सभी दोषियों और साजिशकर्ताओं की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
पार्टी ने चेतावनी देते हुए कहा, “विभाजन और दलबदल से बनी सरकार लीक के अलावा कुछ नहीं दे सकती। आग से मत खेलो। अगर छात्रों का बढ़ता गुस्सा बेकाबू हो गया, तो यह खोखली सरकार पूरी तरह राख हो जाएगी।”
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
