मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- जांच में हत्या का कोई सबूत नहीं, सभी लड़कियां जीवित

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि किसी लड़की की हत्या नहीं हुई। यहां रहने वाली सभी 35 लड़कियों को जीवित पाया गया। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि मुजफ्फरपुर के बालिका गृह समेत बिहार के सभी 17 शेल्टर होम की जांच पूरी की जा चुकी है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में किसी लड़की की हत्या नहीं हुई है। सीबीआई ने यह दावा सुप्रीम कोर्ट में किया है। सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि जांच दौरान जो कंकाल मिले हैं, उनमें कोई भी कंकाल नाबालिग लड़की का नहीं है।

सुनवाई के दौरान, सीबीआई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में किसी लड़की की हत्या नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि जांच के दौरान जो कंकाल मिले थे उसमें कोई कोई भी नाबालिग लड़की का नहीं था। हालांकि, जांच के दौरान मिले कंकाल किसके हैं, इसको लेकर वेणुगोपाल ने कोई जानकारी नहीं दी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी स्टेटस रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने कहा कि 4 प्रारंभिक जांच में किसी आपराधिक कृत्य को साबित करने वाला साक्ष्य नहीं मिला और इसलिए कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सीबीआई ने स्थिति रिपोर्ट में कह कि सभी 17 बालिका गृह मामलों में जांच पूरी हो गई है। 13 नियमित मामलों में अंतिम रिपोर्ट सक्षम कोर्ट को भेजी गई है। 4 शुरुआती मामलों की जांच पूरी हो गई है और आपराधिक कृत्य को साबित करने वाले साक्ष्य नहीं मिले और इसलिए इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

बता दें कि इस कांड में शेल्टर होम के कर्मचारी और बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे। टीआईएसएस की एजेंसी 'कोशिश' के ऑडिट में यौन शोषण का खुलासा होने के बाद मामला सामने आया था। इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद बिहार सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार लिया था। उसके बाद इस केस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और मामले को बिहार से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था।

गौरतलब है कि सीबीआई की जांच में बिहार के 17 शेल्टर होम में बच्चों के साथ यौन शोषण और यातना करने का खुलवसा हुआ था। इस खुलासे के बाद राज्य के अधिकारियों की लापरवाही पाई गई थी। जांच एजेंसी ने 25 डीएम और 46 अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की। वहीं, बिहार के 52 अन्य लोगों और एनजीओ को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने और उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अनुशंसा भी की।

बता दें कि मुंबई स्थित टीआईएसएस द्वारा बिहार सरकार को सौंपी गई सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट के आधार पर इस मामले का खुलासा हुआ था कि समाज कल्याण विभाग के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में लड़कियों के साथ यौन शोषण हो रहा है। इसके बाद यहां की लड़कियों की चिकित्सकीय जांच के बाद 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी।

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