नीट पेपर लीकः सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही तय किये जाने पर जोर दिया, NTA और समिति पर उठाए गंभीर सवाल, मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए सिस्टम के अंदर अकाउंटेबिलिटी को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जवाबदेही तय नहीं की गई है। अकाउंटेबिलिटी तभी असरदार होगी जब आप यह पहचानेंगे कि जिम्मेदारी किसके कंधों पर है।

उच्चतम न्यायालय ने नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में हुई चूक को लेकर शुक्रवार को एनटीए और उच्चाधिकार प्राप्त समिति पर कई गंभीर सवाल उठाए और जवाबदेही तय किये जाने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा कुछ होता है, तो यह न केवल विद्यार्थियों बल्कि उनके परिवारों के लिए भी वास्तव में बहुत दुखद होता है। हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए केंद्र और शिक्षा मंत्रालय को एक अलग हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें एक ऐसा सिस्टम बनाने का ब्यौरा हो जिसके तहत नीट परीक्षाएं कराने और खत्म करने की प्रक्रिया को एनटीए हर साल इंस्टीट्यूशनल तौर पर लागू करेगा।
कोर्ट ने कहा कि एफिडेविट में यह बताना होगा कि एनटीए के अंदर स्पेशल स्टाफ और एक्सपर्ट्स की बड़ी संख्या में तैनाती के ज़रिए इंस्टीट्यूशनल मेमोरी और एक्सपर्टीज़ कैसे डेवलप की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह पक्का करने की कोशिश होनी चाहिए कि एनटीए के पास “2024 और 2026 के नीट एग्जाम विवादों जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए ज़रूरी फिजिकल और इंटेलेक्चुअल साधन हों”। एफिडेविट को छह हफ़्ते के अंदर फाइल करने का निर्देश दिया गया है।
इन याचिकाओं में से एक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन करने और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सवाल किया कि हाई पावर्ड कमेटी की रेगुलर मॉनिटरिंग और मीटिंग के बावजूद यह फेलियर कैसे हुआ। कोर्ट ने पूछा, “क्या आप रेगुलर मीटिंग कर रहे हैं? इतनी सारी मॉनिटरिंग के बावजूद यह फेलियर कैसे हुआ?”
जस्टिस नरसिम्हा ने मॉनिटरिंग सिस्टम के असरदार होने पर चिंता जताई। उन्होंने पूछा, “ ओरिजिनल रिकमेन्डेशन में कुछ गड़बड़ है या असरदार मॉनिटरिंग नहीं हुई है। यह कैसे हुआ?” कोर्ट ने एनटीए सिस्टम के अंदर अकाउंटेबिलिटी को लेकर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा, “अकाउंटेबिलिटी तय नहीं की गई है। अकाउंटेबिलिटी तभी असरदार होगी जब आप यह पहचानेंगे कि ज़िम्मेदारी किसके कंधों पर है।” कोर्ट ने आगे कहा कि “डिफ्यूज़्ड ऑब्लिगेशन” का नतीजा यह होता है कि ज़िम्मेदारी आम तौर पर सरकार की तरफ शिफ्ट हो जाती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि कोई खामी न रह जाए। पीठ ने कहा, ‘‘जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक असल समस्या का समाधान नहीं होगा।’’
पीठ ने इंस्टीट्यूशनल सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, “इंस्टीट्यूशनल सुधार, लोग नहीं। लोग आएं या जाएं, सिस्टम में कुछ तो होना ही चाहिए जो डेवलप हो।” कोर्ट ने छात्रों और परिवारों पर बार-बार होने वाले एग्जाम के विवादों के इमोशनल असर पर भी ज़ोर दिया। बेंच ने कहा, “यह असल में बहुत ट्रॉमेटिक है। सिर्फ़ स्टूडेंट्स के लिए ही नहीं, बल्कि परिवारों के लिए भी। इसमें सालों की पढ़ाई और इमोशंस का इन्वेस्टमेंट होता है।” कोर्ट ने कहा कि वह कुछ और समय तक मामले पर नज़र रखेगा और मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ़्ते में तय की।
एनटीए ने तीन मई को नीट परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इक्कीस जून को पुनर्परीक्षा निर्धारित की गई है।इस पूरे प्रकरण की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है। वर्ष 2024 में नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रश्न पत्र लीक से निपटने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी किये थे।
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