वाई खेमचंद सिंह ने ली मणिपुर के सीएम पद की शपथ, नेमचा किपगेन और लोसी दिखो बने डिप्टी सीएम

कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल. डिखो ने मणिपुर के उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वहीं बीजेपी के गोविंदास कोंथौजम और एनपीपी नेता के. लोकेन सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

वाई खेमचंद सिंह ने ली मणिपुर के सीएम पद की शपथ, नेमचा किपगेन और लोसी दिखो बने डिप्टी सीएम
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नवजीवन डेस्क

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के कुछ ही घंटे बाद मणिपुर में नई सरकार का शपथ ग्रहण हो गया। राज्यपाल अजय भल्ला ने लोकभवन में आयोजित समारोह में बीजेपी नेता वाई खेमचंद सिंह को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह बीजेपी द्वारा नई दिल्ली में 61 वर्षीय मैतेई समुदाय के नेता खएमचंद सिंह को नया विधायक दल नेता घोषित किए जाने के एक दिन बाद हुआ।

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लोक भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री के साथ, दो उपमुख्यमंत्रियों और दो अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने वाले अन्य मंत्री बीजेपी के नेमचा किपगेन और गोविंदास कोंथौजम, नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के लोइशी दिखो और राष्ट्रीय जन पार्टी के खुरैजाम लोकेन सिंह हैं। पूर्व मंत्री नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से ऑनलाइन माध्यम से उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल. दिखो ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार का विस्तार बाद में किया जाएगा क्योंकि सात मंत्रियों के पद अभी भी रिक्त हैं। बीजेपी के नवनियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पार्टी के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा, पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रता सिंह, राज्य बीजेपी अध्यक्ष अधिकारीमयुम शारदा देवी और कुछ विधायक तथा कई शीर्ष गणमान्य व्यक्ति शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित थे।

इससे पहले बुधवार को केंद्र सरकार ने मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया, जिससे राज्य में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। अशांत मणिपुर पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन के अधीन था। पिछले साल नौ फरवरी को मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक जारी रही जातीय हिंसा के बाद बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इस्तीफे दे दिया था, जिसके बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। मणिपुर में तब से, इस हिंसा में कुकी और मेइती दोनों समुदायों के सदस्यों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम 260 लोग मारे गए हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हुए हैं।

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