निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट से दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज, जज बोले- ट्रायल और जांच सही

निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय की फांसी की सजा को बरकरार रखा है और तीन सदस्यीय बेंच ने बुधवार को उसकी पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस भानुमति ने कहा कि ट्रायल और जांच सही हुई है और उसमें कोई खामी नहीं है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

निर्भया केस में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई है। अब चारों दोषियों को फांसी देने का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दोषी के वकील को पूरा मौका दिया गया लेकिन दोषी के वकील ने कोई नई बात नहीं की है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस भानुमति ने कहा कि ट्रायल और जांच सही हुई है और उसमें कोई खामी नहीं है। मृत्युदंड का सवाल है तो उसमें कोर्ट ने बचाव का पूरा मौका दिया है। जस्टिस भानुमति ने आगे कहा कि हमें याचिका में कोई ग्राउंड नहीं मिला है।

इसके बाद दोषी अक्षय के वकील एपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि दोषी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करना चाहता है और इसे दायर करने के लिए तीन हफ्ते का समय चाहिए। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक हफ्ते का वक्त मिलता है।

दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद निर्भया की मां की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। वहीं पिता ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है। हम अभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। जब तक पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा डेथ वारंट जारी नहीं किया जाता है, हम संतुष्ट नहीं होंगे।”


इससे पहले जस्टिस भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। दोषी अक्षय के वकील एपी सिंह ने नैतिक दलील देते हुए कहा, “मानवाधिकार का कहना है कि आप अपराधी को मार सकते हैं, अपराध को नहीं। भारत ने जीवन को पवित्र माना है। यह हिंसा का कार्य है। गरीब मौत की सजा के शिकार होते हैं। अमीर फांसी पर नहीं चढ़ते।”

अक्षय के वकील ने दिल्ली के प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा कि फांसी सजा का प्रचीन तरीका है। कलयुग में लोग केवल 60 साल तक जीते है जबकि दूसरे युग में और ज़्यादा जीते थे। हम दिल्ली में रहते हैं जो प्रदूषण की वजह से वैसे ही गैस चैम्बर बन चुकी है। जिससे लोग मर रहे हैं तो मौत की सजा क्यों? महात्मा गांधी ने भी कहा था कि मौत की सजा उचित समाधान नहीं है। अपराधियों को पुनर्वास का मौका मिलना चाहिए। गरीब अपने लिए कानूनी उपाय सही से नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें मौत की सजा दी जाती है। फांसी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। भारत विरोधी संस्कृति का लक्षण है। इसलिए इसे खत्म कर देना चाहिए।”


उन्होंने आगे कहा कि मौत की सजा एकमात्र समाधान नहीं है। सुधार के लिए मौका दिया जाना है। यह सजा का उद्देश्य है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को मीडिया के दबाव, जनता के दबाव और राजनीतिक दबाव आदि के चलते दोषी ठहराया गया था।

सुनवाई के दौरान एपी सिंह ने निर्भया के दोस्त के बयान पर सवाल खड़ा किया। अक्षय के वकील ने कहा कि पीड़ित का दोस्त मीडिया से पैसे लेकर इंटरव्यू दे रहा था। इससे केस प्रभावित हुआ। वह विश्वसनीय गवाह नहीं था। इस तर्क पर जज भूषण ने कहा कि इसका इस मामले से क्या संबंध है। वकील ने कहा कि वह लड़का मामले में इकलौता चश्मदीद गवाह है। उसकी गवाही मायने रखती है। इसके अलावा तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ अफसर सुनील गुप्ता की किताब का भी जिक्र किया। एपी सिंह ने किताब में राम सिंह की आत्महत्या पर सवाल उठाए थे।

इसके बाद एपी सिंह ने रेयान इंटरनेशनल केस में स्कूल छात्र की हत्या का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा,“इस मामले मैं बेकसूर को फंसा दिया गया था। अगर सीबीआई की तफ्तीश नहीं होती तो सच सामने नहीं आता। इसलिए हमने इस केस मे भी सीबीआई जांच की मांग की थी।”

दोषी अक्षय के वकील एपी सिंह की दलीलों पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया और पुनर्विचार याचिका खारिज करने की मांग की। तुषार मेहता ने कहा, “ट्रायल कोर्ट ने सभी दलीलों और सबूतों को परखने के बाद फांसी सुनाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना है। यह अपराध ऐसा गंभीर है जिसे भगवान भी माफ नहीं कर सकता, जिसमें सिर्फ फांसी की सजा ही हो सकती है।”


बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में 23 साल की पीड़िता के साथ 6 आरोपियों द्वारा चलती बस में गैंगरेप किया गया था। इसके बाद पीड़िता पर गंभीर रूप से हमला किया गया था और उसे और उसके पुरुष साथी को इस सबके बाद चलती गाड़ी से नीचे फेंक दिया गया था। गंभीर हालात में भर्ती पीड़िता की मौत इलाज के दौरान हो गया। इस हैवानिय ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

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