जेएनयू में नकाबपोश गैंग के हमले के तीन दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं, पुलिस को देने होंगे कई सवालों के जवाब
दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों पर जानलेवा हमले के तीन दिन बाद भी अभी तक दिल्ली पुलिस ने कोई भी गिरफ्तारी नहीं की है। तीन दिन बाद बुधवार को पुलिस ने इतना भर कहा कि कुछ नकाबपोशों की पहचान हुई है और जल्द ही उन्हें सामने लाया जाएगा।

दिल्ली पुलिस की दो टीमें जेएनयू में रविवार को छात्रों पर हॉस्टल में घुसकर नकाबपोश गैंग द्वारा किए गए हमले की जांच कर रही हैं। मामले की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच के साथ ही एक और टीम को भी सौंपा गया है। लेकिन अभी तक कुछ भी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। आखिर क्यों नहीं पहचान पा रही दिल्ली पुलिस उन हमलावरों को जिन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में घुसकर दर्जनों छात्रों की जान लेने की कोशिश की, परिसर में तोड़ फोड़ की।
इसके अलावा भी कुछ सवाल हैं जिनके जवाब जेएनयू प्रशासन और दिल्ली पुलिस दोनों को देने हैं।
· आखिर जेएनयू प्रशासन ने शनिवार को हुई घटना की तो एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन रविवार की घटना की एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई? नकाबपोश गैंग के हमले की एफआईआर पुलिस ने अपनी तरफ से लिखी है
· शाम 6 बजे के करीब जब नकाबपोश गैंग ने हॉस्टल में घुसकर छात्र-छात्राओं पर हमला किया तो विश्वविद्यालय परिस के अंदर और विश्वविद्यालय जाने वाले रास्ते पर बाहर की स्ट्रीट लाइट क्यों और किसने बंद की?
· पुलिस की एफआईआर में जब लिखा गया है कि दोपहर 3.45 बजे उसे नकाबपोश और डंडे आदि से लैस गैंग के परिसर में मौजूदगी की खबर मिली थी, तो भी पुलिस ने आखिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
· नकाबपोश गैंग के हमले के दौरान जेएनयू विश्वविद्यालय की सिक्यूरिटी कहां थी?
· एबीवीपी की प्रवक्ता ने नेशनल न्यूज़ चैनल पर माना कि जेएनयू के हमलावरों में विद्यार्थी परिषद के दो सदस्य डंडों के साथ मौजूद थे। तो फिर अभी तक पुलिस ने इस प्रवक्ता या पहचान लिए गए एबीवीपी सदस्यों से पूछताछ क्यों नहीं की?
सवाल तो और भी हैं जिनके जवाब खोजे जाने हैं, लेकिन इस सबके बीच जेएनयू वीसी एम जगदीश कुमार अलग ही राग अलाप रहे हैं। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि नकाबपोश लोग यूनिवर्सिटी के छात्र ही थे। उन्होंने कहा कि “हम हमलावरों पर कोई धारणा नहीं बनाना चाहते हैं। फिलहाल दिल्ली पुलिस और जेएनयू की एक कमेटी मामले की जांच कर रही है।”
यहां सवाल उठता है कि अगर जेएनयू वीसी नकाबपोश हमलावरों को जेएनयू का ही छात्र बता रहे हैं तो फिर उन्हें इन छात्रों की पहचान भी पता होगी। फिर क्यों नहीं पुलिस को वे सारे नाम बता देते हैं। साथ ही जगदीश कुमार को यह भी बताना होगा कि अगर सारे हमलावर जेएनयू छात्र थे तो फिर कोमल शर्मा नाम की दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा इन हमलावरों के साथ क्या कर रही थी?
इसके अलावा सवाल यह भी है कि अगर सभी हमलावर छात्र थे, तो फिर हिंदू रक्षा दल नाम के संगठन ने क्यों दावा किया कि हमला करने वाले उनके संगठन के लोग थे। कहीं जेएनयू वीसी यह तो नहीं कह रहे कि जेएनयू छात्रों में हिंदू रक्षा दल के लोग भी हैं।
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