लोकसभा स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, विपक्ष पक्षपाती आचरण को उजागर करने में हुआ सफल
राहुल गांधी ने कहा कि जब भी हम बोलने के लिए उठते हैं, हमें बोलने से रोक दिया जाता है। कई बार मुझे बोलने से रोका गया है। भारत के इतिहास में पहली बार नेता विपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया गया। हमारे प्रधानमंत्री कंप्रमाइज्ड हैं और यह सब जानते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज हो गया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किये गए संकल्प पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद, पीठासीन सभापति ने इसे मतदान के लिए सदन के समक्ष रखा, जिसे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे तय हुए थे, लेकिन समय से ज्यादा चर्चा हुई। लगभग 13 घंटे तक सदन में पक्ष और विपक्ष की तरफ से चर्चा हुई और इसमें 42 से ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया। संकल्प पर चर्चा और मतदान के दौरान बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे, लेकिन उनके द्वारा नियुक्त पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कार्यवाही का संचालन किया, जिसपर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए।
संख्या बल को देखते हुए ये पहले से ही तय था कि ये अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो जाएगा। हालांकि, करीब चार दशक के बाद किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के जरिये विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के पक्षपाती रवैये और सदन के संचालन में सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव को देश के सामने उजागर कर दिया।
अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला पर उन्हें और विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यहां डेमोक्रेटिक प्रोसेस और स्पीकर के रोल के बारे में चर्चा हो रही है। कई बार मेरा नाम लिया जा रहा है, मेरे बारे में गंदी बातें कही जा रही हैं। यह सदन भारत के लोगों की अभिव्यक्ति है। यह हसदन किसी एक पार्टी को नहीं, पूरे देश को दिखाता है। जब भी हम बोलने के लिए उठते हैं, हमें बोलने से रोक दिया जाता है। पिछली बार जब मैंने बात की थी, तो मैंने हमारे प्रधानमंत्री के किए गए समझौतों के बारे में एक बुनियादी सवाल उठाया था। कई बार मुझे बोलने से रोका गया है। भारत के इतिहास में पहली बार नेता विपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया गया। हमारे प्रधानमंत्री कंप्रमाइज्ड हैं और यह सब जानते हैं।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जब स्पीकर, जो सदन के हर सदस्य का कस्टोडियन होता है, निष्पक्ष रहना बंद कर दे और रूलिंग पार्टी के चीफ की तरह काम करे, तो यह गंभीर चिंता की बात है। नेता विपक्ष पार्लियामेंट्री सिस्टम का एक जरूरी हिस्सा है। लेकिन यहां, जब नेता विपक्ष खड़ा होता है, तो माइक बंद कर दिया जाता है। मोदी सरकार इसलिए परेशान है क्योंकि हमारे नेता विपक्ष में सच बोलने की हिम्मत है। पिछले सत्र में, सरकार ने पंडित जवाहरलाल नेहरू पर हमला किया, लेकिन अब वे उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। एक दिन वे डेमोक्रेसी की रक्षा के लिए राहुल गांधी जी की भी तारीफ़ करेंगे। माननीय स्पीकर ने बयान दिया है कि हमारी महिला सांसद पीएम मोदी के खिलाफ़ कुछ बड़ा प्लान कर रही हैं। यह स्पीकर का दिया गया सबसे गैर-ज़िम्मेदाराना बयान है। मोदी सरकार सोच रही है कि संसद सिर्फ बीजेपी के लिए है, और उन्होंने देश के पूरे सिस्टम को हाईजैक कर लिया है।
कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि इतिहास और हमारी परम्पराओं के बहुत से ऐसे प्रसंग हैं, जो हमें मर्यादा और न्याय का महत्व सिखाते हैं। महाभारत में जब दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण किया, तो वो मर्यादाओं, सभ्यताओं और पूरी नारी शक्ति का अपमान था। उस समय वहां मौजूद लोग उसे रोकते, तो महाभारत का युद्ध नहीं होता। संसद में विपक्ष की आवाज को दबाया जाता है, माइक बंद कर दिया जाता है। ये लोकतंत्र का चीरहरण है, देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं का चीरहरण है।
बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा, ‘‘मुझे अफसोस है कि आसन ने वह निष्पक्षता खो दी है जिसकी (जवाहरलाल) नेहरू जी और हमारे अन्य संविधान निर्माताओं को उम्मीद थी।’’ सिन्हा ने कहा, ‘‘असली लोकतंत्र वह है जिसमें सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को भी लगे कि उसकी आवाज़ सुनी जा सकती है। यहां, जब भी कोई (विपक्ष का) सांसद बोलने के लिए खड़ा होता है, तो उसे अध्यक्ष के आसन से सिर्फ ‘‘नो-नो’’ (नहीं) सुनने को मिलता है।’’
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्य विजय कुमार हंसदा ने कहा कि यह लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला का दूसरा कार्यकाल है और प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के नाम का उल्लेख करने के बाद इस सदन में सबसे ज़्यादा बोला जाने वाला शब्द ‘‘नो’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘जब विपक्ष के सांसद बोलते हैं, तो उन्हें रोका जाता है, और यह एक परंपरा बन गई है।
बीते महीने फरवरी में विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं और सत्ता पक्ष के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं। विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा था। इस प्रस्ताव पर विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर थे। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया था, जो अब ध्वनिमत से खारिज हो चुका है। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया था कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया जाता है, जिस वजह उन्हें अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जैसा कदम उठाना पड़ा।
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