यूपी में पीएम आवास योजना का हाल: ऐसा कोई जिला नहीं, जहां योजना के नाम पर जमकर ठगा नहीं

सरकार मान चुकी है कि ‘एक लाख से अधिक लोगों को फर्जी तरीके से फंड का लाभ मिला। इनमें से करीब 86 हजार लोगों ने मुकदमे के डर से फंड लौटाया है।’ दरअसल, यूपी में कोई जिला ऐसा नहीं है जहां अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे और सर्वेयरों की बर्खास्तगी नहीं हुई है।

सोशल मीडिया
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के संतोष

बीते 30 अगस्त को प्रधानमंत्री आवास योजना के दो लाख 853 लाभार्थियों के खाते में 1341.17 करोड़ रुपये भेजने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि ‘पहले चेक या नकद वितरण में भ्रष्टाचार होता था। एक प्रधानमंत्री ने तो यहां तक कहा था कि गरीबों को भेजे जाने वाले 100 रुपये में 85 रुपये बेईमानी से बीच के लोग हड़प जाते हैं। लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी व्यवस्था की है कि 100 रुपये स्वीकृत हैं, तो पूरा का पूरा पैसा गरीब के खाते में ही जाता है।’

दावा करने में किसी की न हींग लगती है, न फिटकरी। लेकिन रंग चोखा करने से पहले योगी यह भी तो देखें कि पीएम आवास योजना के गोलमाल में इतने मुकदमे क्यों दर्ज हो रहे और अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ इतनी कार्रवाइयां क्यों हो रही हैं?

पीएम आवास योजना में यूपी को देश में नंबर-1 घोषित किया गया है। योगी लोगों को बताना नहीं भूलते कि नगर पालिका परिषद, मिर्जापुर को देश में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। लेकिन यूपी के मंत्री महेंद्र सिंह का बयान ही योगी को आईना दिखाने वाला है। महेंद्र सिंह खुद स्वीकार चुके हैं कि ‘प्रदेश में एक लाख से अधिक लोगों को फर्जी तरीके से फंड का लाभ मिला। इनमें से करीब 86 हजार लोगों ने मुकदमे के डर से फंड लौटाया है।’

दरअसल, यूपी में कोई जिला ऐसा नहीं है जहां अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे और वसूली की शिकायत में सर्वेयरों की बर्खास्तगी नहीं हुई है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर में उनके ही करीबी विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल वसूली के सबूत-संबंधी ऑडियो वायरल कर चुके हैं। घोटालेबाज अफसरों ने तो फर्जी लाभार्थी, फर्जी खाता खोलकर लाखों रुपये का गोलमाल किया है। ऐसे ही मामले में बाराबंकी जिले में पांच अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। यहां दो एडीओ पंचायत, एक सेवानिवृत एडीओ समेत पांच अफसरों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर योजना का लाभ दिलाने का आरोप है। जिला प्रशासन इस मामले में शायद ही कार्रवाई करता, पर हाईकोर्ट के दखल के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।

हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया था कि रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शेखपुर अलीपुर के 15 ऐसे लोगों को आवास योजना का लाभ दिया गया, जिनके पास पहले से पक्के मकान थे। यहीं नहीं, दूसरों की आईडी लगाकर बैंकों में खाते खोले गए और आवास का लाभ दिया गया। बलिया में प्रशासनिक अफसरों की मानें तो जिले में सभी अनुसूचित जाति के जरूरतमंदों का आशियाना बन चुका है। 2019-20 में जिले में सिर्फ सामान्य वर्ग के 5,860 पात्रों को आवास मिला। लेकिन बलिया के दुबहड़ ब्लॉक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर आवास का आवंटन का मामला सामने आ चुका है। यहां के प्रधान शिवकुमार गुप्ता के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है।


तमाम ऐसे मामले भी हैं जहां चयनित लाभार्थियों ने योजना का लाभ तो लिया लेकिन मकान के लिए एक ईंट भी नहीं रखी। बलिया में 154 ऐसे लोग हैं जिन्होंने रुपये लेने के बाद भी निर्माण नहीं कराया। वहीं गोरखपुर के कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने 100 ऐसे लोगों की सूची मीडिया में सार्वजनिक की है जिन्होंने योजना की रकम हड़प ली। उनका कहना है कि ‘सरकारी योजना का रकम हड़पने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाएंगे।’ चंदौली जिले में नौगढ़ और चकरघट्टा के चार गांवों के 66 लाभार्थियों के खिलाफ 1.20 लाख की किस्त मिलने के बाद भी निर्माण नहीं कराने पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। जौनपुर में पीएम आवास के नाम पर भ्रष्टाचार करने के मामले में डीएम मनीष वर्मा की दखल के बाद हल्दीपुर के सभासद जय सिंह मौर्य और उनके भाई के विरुद्ध केस दर्ज हुआ हुआ है। पीओ डूडा अनिल कुमार वर्मा का कहना है कि ‘जांच में 4000 से 10,000 रुपये वसूली की शिकायत की पुष्टि हुई है।’

सर्वेयरों और लेखपालों के जरिये इस तरह का धंधा हो रहा है। गोरखपुर में ही एक सप्ताह में तीन सर्वेयरों को बर्खास्त करने के बाद उनके खिलाफ दो थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है। सहारनपुर में पूर्व विधायक राजीव गुंबर ने पीड़ित महिला के साथ जिलाधिकारी से गुहार लगाई तो 25 हजार घूस मांगने वाले सर्वेयर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। देवरिया में पीएम योजना के नाम पर मदनपुर थाना की निर्मला देवी से 87 हजार रुपये की ठगी कर ली। एसपी के निर्देश पर साइबर सेल मामले की जांच कर रहा है।

महोबा में तो घूस की रकम मिलने पर जिम्मेदारों ने लाभार्थियों के खाते में तीन की जगह 4-4 किस्तें भेज दीं। मामला खुला तो डूडा की तरफ से 79 लाख के गबन में 11 लोगों के खिलाफ सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। पीओ डूडा सौरभ कुमार पांडेय ने जो तहरीर दी, उसके मुताबिक, नौ लाभार्थियों को गलत तरीके से पचास हजार रुपये की क़िस्त दो बार भेजी गई जिन्हें वापस लेने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया। इसके अलावा डेढ़ लाख की क़िस्त 78 लोगों को दो बार और चार लोगों को तीन बार दी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अराजी लाईन ब्लॉक के परिजनपुर गांव में योजना का लाभ मिलते-जुलते नाम वालों को दे दिया गया। मामले में ग्राम प्रधान के साथ ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

गोरखपुर नगर निगम में पार्षद अमरनाथ यादव कहते हैं कि ‘परिवार के बालिग सदस्य को योजना का लाभ देने का प्रावधान है लेकिन लेखपाल घूस नहीं मिलने पर दर्जनों को अपात्र कर चुके हैं। ऐसे कई युवाओं की शादियां नहीं हो पा रही हैं।’

एक रिटायर्ड प्रशानिक अधिकारी कहते हैं कि ‘गोलमाल के जो मामले खुल रहे हैं, वहां विवाद लेनदेन का है, अन्यथा पूरी योजना आपसी सेटिंग से चल रही है। बिना लेनदेन के एक भी व्यक्ति को योजना का लाभ नहीं मिल रहा। लोगों को लगता है कि फ्री का 2.50 लाख मिल रहा है तो 30-40 हजार देने में गलत क्या है?’ समाजवादी पार्टी की नेता जूही सिंह भी कहती हैं कि ‘जब योजना फूलप्रूफ है, भ्रष्टाचार मुक्त है, तो कार्रवाई और शिकायतें कैसी? हकीकत यह है कि लाभार्थियों के चयन से लेकर हर किस्त में घूस लिया जा रहा है।’

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