ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन गद्दारी.. प्रियंका चतुर्वेदी ने उद्धव के सांसदों के बगावत पर साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर कहा कि जो नेता किसी राजनीतिक दल के नाम और चुनाव चिह्न पर जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचते हैं, उनके लिए पार्टी छोड़ने के बाद भी उस सीट पर बने रहना उचित नहीं है।

शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो नेता किसी राजनीतिक दल के नाम और चुनाव चिह्न पर जीतकर संसद या विधानसभा पहुंचते हैं, उनके लिए पार्टी छोड़ने के बाद भी उस सीट पर बने रहना उचित नहीं है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि किसी नेता को अपनी पार्टी से असंतोष है तो उसे जनता के बीच जाकर अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए और नया जनादेश प्राप्त करना चाहिए। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों को 'ऑपरेशन टाइगर' कहना गलत है। इसे 'ऑपरेशन गद्दारी' कहा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष संविधान का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा है। यह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है और पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को तोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपए का ऑफर दिए जाने संबंधी संजय राउत के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि कोई वरिष्ठ नेता किसी संभावित राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी होने का दावा करता है, तो उसके पीछे कुछ न कुछ आधार अवश्य हो सकता है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से संपर्क साधे जाने और संभावित दलबदल की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में इस तरह की चर्चाओं पर उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी खरीद-फरोख्त और राजनीतिक सौदेबाजी के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे घटनाक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस के एवियन शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि औपचारिक मुलाकात हुई या नहीं, हालांकि कुछ तस्वीरें सामने आई थीं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी नेतृत्व के सामने भारत की चिंताओं को मजबूती से उठाएंगे। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की जान जाने और भारत के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी चिंता जताई और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े हालिया फैसलों के संदर्भ में भारत के हितों की रक्षा की आवश्यकता का जिक्र किया।
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