अब दिवाली के बाद लगेगा महंगाई का झटका! NPCI का बड़ा ऐलान, बताया यूपीआई भुगतान पर कब लागू होगा एमडीआर
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है।

NPCI ने चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर फ्रेमवर्क लागू करने का फैसला दिवाली तक टाल दिया है।
NPCI ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू करने की सटीक तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निर्धारित श्रेणी के 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर तय किया गया है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है। NPCI के मुताबिक, चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर यूपीआई एमडीआर दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसे लागू करने की सटीक तारीख का ऐलान अभी नहीं किया गया है।
दिवाली के बाद लागू होगा नया फ्रेमवर्क
NPCI की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए एमडीआर लागू करने का फैसला आगे बढ़ाया है। अब चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर यह व्यवस्था दिवाली के तुरंत बाद लागू होगी। इसकी तारीख की जानकारी अलग से दी जाएगी।
व्यापारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों ने की थी मांग
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब व्यापारी संगठनों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं ने NPCI से नए फ्रेमवर्क को लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। इन संगठनों को आशंका थी कि त्योहारों के दौरान अधिक बिक्री के बीच नई फीस व्यवस्था का कारोबार पर असर पड़ सकता है।
2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR
पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमिटी ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा लेनदेन के लिए एमडीआर की दर 0.4 प्रतिशत यानी 40 बेसिस पॉइंट तय की थी। एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए व्यापारियों से लिया जाता है।
इस दर के हिसाब से 2,000 रुपये के भुगतान पर 8 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये का शुल्क बनता है। हालांकि, यह व्यवस्था सभी यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होगी, बल्कि निर्धारित श्रेणियों के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू की जाएगी।
ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकेगा यह शुल्क
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यूपीआई एमडीआर का भुगतान व्यापारियों को करना होगा। व्यापारी इस शुल्क को किसी भी तरीके से ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे। यानी निर्धारित लेनदेन पर एमडीआर लागू होने के बावजूद ग्राहकों से इसके नाम पर अतिरिक्त रकम वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
नीलकंठ मिश्रा ने शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका को किया खारिज
इससे पहले विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति देने को एक अधिकार प्रदान करने वाला कदम बताया था। उनका मानना है कि भुगतान क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण शुल्क में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की आशंका कम है।
मिश्रा के मुताबिक, बाजार में ऐसी कंपनियां भी मौजूद रही हैं, जिन्होंने एमडीआर शुल्क नहीं लेने के बावजूद अपना कारोबार जारी रखा और प्रतिस्पर्धा में बनी रहीं। ऐसे में उनका मानना है कि बाजार की प्रतिस्पर्धा शुल्क में भारी बढ़ोतरी को सीमित कर सकती है।
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