ओडिशा में भारी बारिश से बाढ़ का खतरा, स्कूल बंद, 10 हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया
ओडिशा में डीप डिप्रेशन के असर से भारी बारिश के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। 10 हजार लोग राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है।

ओडिशा में डीप डिप्रेशन के असर से भारी से बहुत भारी बारिश हुई और 24 स्थानों पर 100 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
दक्षिणी और पश्चिमी ओडिशा के निचले इलाकों से करीब 10 हजार लोगों को 200 राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है।
बालासोर और जाजपुर की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
भूस्खलन, जलभराव और घरों को नुकसान के बीच प्रशासन ने स्कूल बंद कर दिए हैं और छह दक्षिणी जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
ओडिशा में आज डीप डिप्रेशन के कारण हुई भारी बारिश ने बाढ़ की आशंका बढ़ा दी है। राज्य में कम से कम 24 स्थानों पर 100 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। नदियों का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन, जलभराव और घरों को नुकसान पहुंचने के बाद प्रशासन ने स्कूल बंद कर दिए हैं।
एक दिन पहले आंध्र प्रदेश के तट से टकराने वाला डीप डिप्रेशन ओडिशा में प्रवेश कर गया। इसके चलते शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई।
10 हजार लोग राहत केंद्रों में पहुंचे
पूर्वी तटीय राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में निचले और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले करीब 10,000 लोगों को 200 राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि दक्षिणी ओडिशा के छह जिले इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा पश्चिमी और तटीय इलाकों में भी जनजीवन प्रभावित हुआ है, जिसमें भुवनेश्वर भी शामिल है।
395 मिमी बारिश, कई इलाकों में जलभराव
बारिश की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नबरंगपुर जिले के तेंतुलीखुंटी में सबसे ज्यादा 395 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद नंदाहांडी में 344 मिमी और कोरापुट जिले के बोरीगुमा में 307.8 मिमी बारिश हुई।
भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हुआ है। भूस्खलन के साथ कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रशासन को प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
खतरे के निशान से ऊपर पहुंचीं कई नदियां
अधिकारी के मुताबिक, बालासोर जिले की जलाका और बुधबलंगा नदियों तथा जाजपुर जिले की बैतरणी और कानी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इससे एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
राज्य में मानसून शुरू होने के बाद अब तक दो बार बाढ़ आ चुकी है। ऐसे में मौजूदा भारी बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
