‘एक बार जो जगह मस्जिद बन गई, वह हमेशा मस्जिद ही रहेगी’

बाबरी मस्जिद मामले में 1994 के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई में वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक बार जब कोई जगह मस्जिद बन जाती है तो वह हमेशा के लिए इबादत की जगह हो जाती है।

फोटो: सोशल मीडिया 
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आईएएनएस

अयोध्या मामले पर 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जिरह करते हुए ‘जमियत उलेमा ए हिंद’ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को बताया, "मस्जिद को भले ध्वस्त कर दिया गया हो, लेकिन फिर भी वह इबादत की जगह बनी रहेगी।"

राजीव धवन ने ये बातें शीर्ष अदालत की पीठ द्वारा 1994 के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं। इस फैसले में कहा गया था कि मस्जिद इस्लामिक धर्म परंपरा का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस करने के कार्य को 'बर्बर कृत्य' करार देते धवन ने कहा, "जिस चीज को अपवित्र किया गया वह एक मस्जिद थी और अदालत से जो कुछ भी कहा जा रहा है वह मूर्ति (रामलला की मूर्ति) की सुरक्षा के लिए कहा जा रहा है।" यह कहते हुए कि सरकार किसी धर्मस्थल का अधिग्रहण कर सकती है, धवन ने कहा, "यह पूरी तरह से साफ है कि एक मस्जिद के साथ किसी भी मंदिर के समान व्यवहार होना चाहिए और रामजन्मभूमि मस्जिद के बराबर है।"

राजीव धवन की दलीलों का समर्थन करते हुए जमियत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने बाबरी मस्जिद मामले पर अदालत में हुई सुनवाई पर कहा कि जमियत अपने वकीलों की बहस से संतुष्ट है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले को बड़ी बेंच के हवाले करने के लिए जमियत के वकीलों ने जो दलीलें रखी हैं, उनपर अदालत गंभीरता से विचार करेगी। मौलाना मदनी ने कहा कि “एक बार जब कहीं मस्जिद बन जाए तो उसे ना ही स्थानांतरित किया जा सकता है और ना ही उस जगह पर कोई दूसरा निर्माण हो सकता है।” उन्होंने आगे कहा, "हम देशभक्त नागरिक हैं और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। हमें भरोसा है कि इस महत्वपूर्ण मामले में भी अदालत इंसाफ के सभी तकाजों को पूरा करने वाला फैसला देगी।"

बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की दो रथयात्राओं की ओर इशारा करते हुए धवन ने पीठ से कहा कि बाबरी मस्जिद के ध्वंस के लिए एक कठोर, नियोजित और सुविचारित प्रयास किया गया था।अदालत ने कहा कि अगर वह 1994 के फैसले पर फिर से विचार का फैसला लेती है तो यह इस सिद्धांत पर आधारित होगा कि क्या मस्जिद इस्लामी धार्मिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा है। मामले में अगली सुनवाई 5 अप्रैल को होगी, जिसमें धवन अदालत को बताएंगे कि इस्लाम के अनुसार मस्जिद का क्या अर्थ है।

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