मनीष हत्याकांड में हुआ खेल? मामले में सिर्फ 3 पुलिस कर्मी हैं नामजद, तहरीर में 6 पुलिस कर्मियों के थे नाम

मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी की ओर से दी गई तहरीर में इंस्पेक्टर रामगढ़ ताल जगत नारायण सिंह के साथ सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा, सब इंस्पेक्टर विजय यादव, सब इंस्पेक्टर राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव, कांस्टेबल प्रशांत कुमार का नाम था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में व्यापारी मनीष गुप्ता हत्याकांड में दी गई तहरीर में 6 पुलिस कर्मियों के नाम दिए गए थे। तहरीर के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में सिर्फ तीन पुलिस कर्मी ही नामजद हैं। हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी है, लेकिन पहले दी गई तहरीर और नामजाद को लेकर लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या तहरीर में 6 पुलिस वाले और एफआईआर में महज 3 पुलिस कर्मियों की नामजदगी के पीछे कोई खेल खेला गया है?

कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता की हत्याकांड में गोरखपुर पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। हत्याकांड को लेकर दर्ज एफआईआर और उसमें पुलिस वालों की नामजदगी सवालों के घेरे मैं है। इस मामले में पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सवाल सोशल मीडिया पर वायरल मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता के दस्तखत के साथ एसएसपी गोरखपुर को लिखी गई तहरीर से खड़ा हो रहा है।

मीनाक्षी की ओर से दी गई तहरीर में इंस्पेक्टर रामगढ़ ताल जगत नारायण सिंह के साथ सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा, सब इंस्पेक्टर विजय यादव, सब इंस्पेक्टर राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव, कांस्टेबल प्रशांत कुमार का नाम था। 29 सितंबर रात 1.23 बजे दर्ज की गई हत्या की एफआईआर 391/21 एसएचओ जगत नारायण सिंह, उपनिरीक्षक अक्षय मिश्रा, विजय यादव और तीन अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई है। मीनाक्षी गुप्ता की तहरीर और पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में नामजदगी पर भिन्नता पाई गई। यही वजह है कि सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि पुलिस ने 3 पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए अज्ञात में नाम डाल दिया।

उधर, इस मामले में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति दे दी है। गृह विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मनीष गुप्ता की मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए भारत सरकार को संस्तुति भेज गई है। मनीष गुप्ता की पत्नी को कानपुर विकास प्राधिकरण में ओएसडी के पद पर नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मनीष गुप्ता के परिवार को 40 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी देने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके साथ ही केस को गोरखपुर से कानपुर ट्रांसफर करने का भी निर्देश दिया है। गोरखपुर में मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में दर्ज केस के कानपुर ट्रांसफर होने के बाद जब तक सीबीआई केस को टेकओवर नहीं करती है, तब तक कानपुर में एसआइटी गठित कर केस की जांच शुरू कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके साथ ही मनीष गुप्ता के परिवार को 40 लाख रुपया की आर्थिक सहायता भी देने का निर्देश दिया है। यह धनराशि भी शीघ्र पीड़ित परिवार को प्रदान किया जाएगी। मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने कानपुर में भेंट के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस केस की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने उनको इसका आश्वासन भी दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मनीष हत्याकांड की जांच के लिए पुलिस आयुक्त असीम अरुण ने एसआइटी का गठन भी कर दिया।

गौरतलब है कि गोरखपुर के रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेस में 27 सितंबर को देर रात पुलिस की पिटाई से मनीष गुप्ता की मौत हो गई थी। इस मामले में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा और विजय यादव समेत 6 पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया है। इन सभी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

मृतक मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने शुक्रवार को कहा था कि मुख्यमंत्री योगी ने एक बड़े भाई की तरह अच्छे निर्णय लिए हैं, लेकिन गोरखपुर के एडीजी गलत बयान देकर मेरी हिम्मत तोड़ रहे हैं। सीएम से अपील करती हूं कि पति को न्याय दिलाने के लिए जल्द से जल्द सीबीआई जांच शुरू कराएं। हत्याकांड के बाद गोरखपुर पुलिस और प्रशासन का जो रवैया रहा। इसे देखते हुए मैं उन पर विश्वास नहीं कर सकती।

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