विपक्ष ने पेश किया पीएम के संबोधन का सार: जागरुकता बच्चे करें, मजदूरों को राज्य देखें, ऑक्सीजन-वैक्सीन का पता नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर विपक्ष ने तीखा प्रहार किया है। विपक्ष ने कहा है कि पीएम ने जागरूक्ता बच्चों के जिम्मे, अनुशासन युवाओं के जिम्मे कर अपना पल्ला झाड़ लिया है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश को संबोधित करते हुए ये तो माना कि कोरोना की दूसरी लहर तूफान बनकर आई है, लेकिन इससे निपटने का जिम्मा समाज के अलग-अलग वर्गों और राज्य सरकारों के जिम्मे कर दिया। इसी पर विपक्ष ने निशाना साधा है। कांग्रेस ने पीएम के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, "प्रधानमंत्री के संबोधन का सार है कि जागरुकता बच्चों के जिम्मे, अनुशासन युवाओं के जिम्मे, श्रमिक राज्यों के जिम्मे, ऑक्सीजन का अता-पता नहीं और वैक्सीन का देखा जाएगा।"

वहीं कांग्रेस ने यह भी कहा कि "प्रधानमंत्री जी देश को कोरोना के समाधान की जरूरत है, आपके ज्ञान की नहीं। "

वहीं महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, "पीएम ने कहा है कि लॉकडाउन आखिरी विकल्प होना चाहिए, लेकिन देश की कई अदालतों ने लॉकडाउन लगाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को उम्मीद थी कि इस संकट के समय में प्रधानमंत्री शायद गरीबों, मजदूरों, छोटे उद्योगों के लिए कोई पैकेज का ऐलान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"


उधर छत्तीसगढ़ के मंत्री टी एस सिंह देव ने कहा कि, "मैं उम्मीद कर रहा था कि प्रधानमंत्री हर नागरिक के लिए वैक्सीन का ऐलान करेंगे। पीएम ने इसका जिक्र नहीं किया और न ही यह बताया कि वैक्सीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है और राज्यों को कितनी डोज मिलेंगी।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी पीएम के संबोधन पर कहा है कि, पीएम के संबोधन का सार यही है कि 'मेरे बस का कुछ नहीं है यात्री अपने सामान यानी जान की रक्षा स्वंय करें।'

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