‘नेशनल हेरल्ड’ और ‘नवजीवन’ के एडिटर-इन-चीफ नीलाभ मिश्र का निधन

बेहद दुख और पीड़ा के साथ हमें यह बताना पड़ रहा हैकि हमारे एडिटर-इन-चीफ, गाइड और दोस्त नीलाभ मिश्र का निधन हो गया।

फोटो : प्रमोद पुष्कर्णा
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नवजीवन डेस्क

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हमारे दोस्त, गाइड, लीडर और एडिटर-इन-चीफ नीलाभ मिश्र नहीं रहे। बेहद दुख और पीड़ा के साथ हमें यह बताना पड़ रहा है किआज (24फरवरी, 2018) सुबह 7.30 बजे चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनका निधन हो गया। 57 वर्षीय नीलाभ के परिवार में उनकी लंबे समय से दोस्त और पार्टनर कविता श्रीवास्तव, भाई शैलोज कुमार, भाभी सुधा और भतीजी नवाशा हैं।

उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 3.30 बजे नुंगमबक्कम इलेक्ट्रिक क्रीमेटोरियम में होगा। उनका शव दोपहर करीब 2.30 बजे नुंगमबक्कम क्रीमेटोरियम में लाया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी।

नीलाभ को नॉन-एल्कोहॉलिक लिवर सिरॉसिस के कारण ज्यादा तबियत खराब होने पर चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के चलते उनका लिवर ट्रांसप्लांट नहीं कराया जा सका. और 24 फरवरी को उन्होंने आखिरी सांस ली। उस समय उनके पास उनके रिश्तेदार, दोस्त, कॉमरेड्स और नजदीकी लोग थे।

नीलाभ ने 2016 में नेशनल हेरल्ड को डिजिटल स्वरूप में एक वेबसाइट के रूप में री-लांच किया था। नेशनल हेरल्ड की स्थापना देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में की थी। नीलाभ नेशनल हेरल्ड ऑन संडे वीकली न्यूज पेपर भी लांच किया और साथ ही नेशनल हेरल्ड के सहयोगी प्रकाशन नवजीवन और कौमी आवाज को भी डिजिटल फार्मेट में वेबसाइट के रूप में शुरु किया।

नेशनल हेरल्ड के एडिटर-इन-चीफ बनने से पहले नीलाभ कई वर्षों तक आउटलुक हिंदी के संपादक रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम ए करने वाले नीलाभ ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ अपने गृहनगर पटना से की थी। वहां से नीलाभ राजस्थान चले गए और न्यूज टाइम के जयपुर संवाददाता के रूप में काम किया। उन्होंने 1998 में राजस्थान में इनाडू टीवी भी शुरु कराया।

पत्रकारिता में तीन दशक से भी ज्यादा समय तक सक्रिय रहे नीलाभ ने बहुत से युवा पत्रकारों को पत्रकारिता की बारीकियां सिखाईं और समझाईं। नीलाभ का लहजा सदा सत्य की शक्ति और जमीनी हकीकत से जुड़ा रहा। सत्य को सामने लाने की पत्रकारिता को समर्पित एक सच्चे पत्रकार नीलाभ ने नागरिक अधिकारों के विस्तार के लिए पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ के साथ बिहार, राजस्थान और दूसरे राज्यों में काम किया। विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के लिए वे सदैव एक सच्चे और अच्छे मित्र रहे। सभी सामाजिक संगठन सदा सलाह के लिए उनकी मदद लेते रहे। जिन आंदोलनों से वे नजदीकी से जुड़े में राजस्थान का मजदूर किसान शक्ति संगठन और सूचना के अधिकार का आंदोलन भी है। महिलावादी आंदोलन ने सदा नीलाभ को अपना मित्र माना। नीलाभ एक सतर्क और उत्साही राजनीतिक विश्लेषक और पर्यवेक्षक थे। साथ ही कविता और कहानियों में उनकी गजब की रूचि थी। इतिहास को पढ़ना और उसके प्रसंगों को समझना नीलाभ का जुनून था।

नेशनल हेरल्ड नीलाभ के उस संकल्प के साथ काम करता रहेगा जो देश की बहुमूल्य लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए सदा समर्पित रहा और जिसे नेशनल हेरल्ड के संस्थापक पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्थापित मूल्यों से प्रेरणा मिली।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन पर दुख जताया है। उन्होंने लिखा है, “संपादकों के संपादक, एक ऐसे शख्स जो सत्य की ताकत पहचानते थे। वे ऐसे शख्स थे जो संस्थाएं बनाते थे। नीलाभ मिश्र के दुखद निधन पर उनके परिवार के लिए, मित्रों, साथियों और चाहने वाले के प्रति गहरी संवेनाएं।”

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Published: 24 Feb 2018, 8:00 AM