हिमंता के 'जहरीले' बयानों पर हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग, चालीस से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने लिखा पत्र

पत्र में कहा गया कि बांग्ला भाषी मुसलमान 100 से ज्यादा वर्षों में व्यापक तौर पर असमिया समाज का हिस्सा बन गए हैं और मुख्यमंत्री सरमा के बयान अमानवीय, सामूहिक रूप से बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों वाले प्रतीत होते हैं, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।

हिमंता के 'जहरीले' बयानों पर हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग, चालीस से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने लिखा पत्र
i
user

नवजीवन डेस्क

google_preferred_badge

असम के शिक्षाविदों, चिकित्सकों, लेखकों और सेवानिवृत्त नौकरशाहों समेत 40 से ज्यादा जाने-माने नागरिकों ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से अपील की है कि वह असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक खास समुदाय के खिलाफ हालिया बयानों पर स्वत: संज्ञान ले। उन्होंने कहा कि संवैधानिक उल्लंघनों के खिलाफ चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मुझे अपने असमिया गमोसा पर बहुत गर्व है! हिरेन गोहेन के नेतृत्व में असम के 43 बड़े लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रोफेशनल्स और एक्टिविस्ट्स ने हिमंता बिस्वा सरमा की निंदा की है और गुवाहाटी हाई कोर्ट से अपील की है कि वह मियां समुदाय के खिलाफ उनके बार-बार दिए गए हेट स्पीच, वोटर लिस्ट में बदलाव में एग्जीक्यूटिव दखल और अलग-अलग संवैधानिक उल्लंघनों पर खुद से संज्ञान ले।

योगेंद्र यादव ने कहा कि असम में लेखकों की एक खास जगह है, जिसे बाहर के लोगों के लिए समझना मुश्किल है। वे असम के समाज की अंतरात्मा हैं। उन्होंने सीम सरमा की उन घटिया बातों के खिलाफ आवाज उठाई है जिनसे राज्य की बदनामी हो सकती है। उनमें से कई लोगों को जानने पर गर्व है।


मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार को गुरुवार को लिखे एक पत्र में, प्रबुद्ध नागरिकों ने हिमंता बिस्वा सरमा के कई सार्वजनिक बयानों की ओर उच्च न्यायालय का ध्यान दिलाया, ‘‘जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को खुलेआम बदनाम करने जैसे हैं।’’ पत्र में मुख्यमंत्री की ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ टिप्पणियों का जिक्र किया गया है।

पत्र में कहा गया कि बांग्ला भाषी मुसलमान 100 से ज्यादा वर्षों में ‘‘व्यापक तौर पर असमिया समाज का हिस्सा’’ बन गए हैं, और मुख्यमंत्री सरमा के बयान ‘‘अमानवीय, सामूहिक रूप से बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों वाले प्रतीत होते हैं, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।’’ ‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है, जिसका उपयोग सीएम हिमंत शर्मा उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में इंगित करने के लिए कर रहे हैं।

Google न्यूज़व्हाट्सएपनवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia