पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई की हालत गंभीर, रायपुर एम्स के आईसीयू में भर्ती

तीजन बाई का जन्म साल 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को नई पहचान दिलाई। पंडवानी एक ऐसी लोककला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गायन और अभिनय के जरिए मंच पर प्रस्तुत किया जाता है।

पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई की हालत गंभीर, रायपुर एम्स के आईसीयू में भर्ती
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नवजीवन डेस्क

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पद्म विभूषण से सम्मानित और पंडवानी गायिका तीजन बाई को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद रायपुर में एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (एमआईसीयू) में रखा गया है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, 69 वर्षीय तीजन बाई को बुधवार देर रात अस्पताल लाया गया था। उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जिसके बाद परिवार और करीबी लोग उन्हें तुरंत एम्स रायपुर लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उनकी जांच की और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत एमआईसीयू में भर्ती कर लिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।


मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, तीजन बाई कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्हें फेफड़ों में इन्फेक्शन है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा, उनके खून में भी संक्रमण फैल गया है, जिसे मेडिकल भाषा में सेप्सिस कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति काफी गंभीर मानी जाती है क्योंकि इससे शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही उनकी किडनी में भी दिक्कत सामने आई है और ब्लड प्रेशर लगातार कम बना हुआ है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उनकी देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है। इस टीम में क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के डॉक्टर) और हेमेटोलॉजिस्ट (खून से जुड़ी बीमारियों के डॉक्टर) शामिल हैं। सभी डॉक्टर चौबीस घंटे उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


तीजन बाई का जन्म साल 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास स्थित गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को नई पहचान दिलाई। पंडवानी एक ऐसी लोककला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गायन और अभिनय के जरिए मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1988 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य बड़े सम्मान भी मिले हैं।

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