अफगानिस्तान पर दबदबा तो फिलहाल पाकिस्तान का है, लेकिन कंगाल हो चुके पाक के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाएगा चीन

रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ एक ही सवाल पूछ रहे हैं, "अफगानिस्तान के लिए आगे की राह क्या है?" इस प्रश्न का उत्तर इस क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न खिलाड़ियों के अगले कदमों की रणनीतिक भविष्यवाणी करके या तो खुले तौर पर या छाया में खोजा जा सकता है।

फोटो : आईएएनएस
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आईएएनएस

इस समय अफगानिस्तान पर पूरी दुनिया का ध्यान है। काबुल का पतन न तो अचानक हुआ था, न ही यह '3 लाख मजबूत अफगानी फौजियों' के तेजी से और अप्रत्याशित आत्मसमर्पण के कारण हुआ था। यह एक लंबी खूनी लड़ाई थी जो पिछले छह महीनों में काबुल के पतन के साथ अशरफ गनी की सरकार के ताबूत में अंतिम कील बनकर रह गई थी। दरअसल चर्चा तो होनी थी कि आखिर 'ताबूत में आखिरी कील इतनी चिकनी क्यों थी' लेकिन विश्लेषक इससे विचलित हैं कि आखिर ताबूत मौजूद ही क्यों था जिसमें आखिरी कील ठोंक दी गई।

मौजूदा हालात में हर रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ एक ही सवाल पूछ रहे हैं, "अफगानिस्तान के लिए आगे की राह क्या है?" इस प्रश्न का उत्तर इस क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न खिलाड़ियों के अगले कदमों की रणनीतिक भविष्यवाणी करके या तो खुले तौर पर या छाया में खोजा जा सकता है।

मोटे तौर पर देखा जाए तो अभी अफगानिस्तान में पाकिस्तान का दबदबा नजर आ रहा है। पाकिस्तान के लिए यह पिछले 20 वर्षों से पोषित निवेश को भुनाने का समय भी है। एफएटीएफ को अपनी पीठ से दूर रखने के लिए पाकिस्तान से अपनी आतंकी गतिविधियों को आउटसोर्स करने के लिए अफगानिस्तान का उपयोग करने की आशंका भी बढ़ गई है। इसके अलावा, पाकिस्तान यह भी सुनिश्चित करना चाहेगा कि अफगानिस्तान से भारत के सामरिक, धार्मिक और आर्थिक पदचिह्न् पूरी तरह से समाप्त हो जाएं।

इतना ही नहीं वह इसके अलावा तालिबान लड़ाकों को काम करने के लिए एक नया कारण देकर उनका लाभ उठाने की भी कोशिश करेगा। लेकिन, इस योजना में पाकिस्तान की बदकिस्मती उसका खाली खजाना है। पाकिस्तान के पास इस एजेंडे का समर्थन करने के लिए वित्तीय साधन नहीं है। ऐसे में वह चीन की तरफ टकटकी लगाएगा, इसलिए भी क्योंकिचीन उअफगानिस्तान में उसकेा साझीदार है।


वैसे भी तालिबान के प्रति चीन पहले ही गर्मजोशी दिखा चुका है। अफगान सरकार के खिलाफ तालिबान के युद्ध का नतीजा उस समय स्पष्ट हो गया जब विदेश मंत्री वांग यी चीन में तालिबान नेताओं से मिले। वैश्विक राजनीति में चीन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह संभावना नहीं है कि देश वर्चस्व के संघर्ष में एक कमजोर शक्ति के खिलाफ दांव लगाएगा।

हाल ही में, चीन ने तालिबान को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए सहायता की पेशकश की। चीन के लिए, वर्तमान अफगानिस्तान 2008 का श्रीलंका है, जिसे अपने बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए धन की सख्त जरूरत थी, और प्रतिबंधों से बचने के लिए विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों में चीन के समर्थन की जरूरत थी। इसलिए चीन के आर्थिक कदमों का अंदाजा उसके श्रीलंका के पुराने गेम प्लान से लगाया जा सकता है।

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