गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, सांबा में इंटरनेशनल बॉर्डर पर BSF ने एक घुसपैठिए को किया ढेर

बीएसएफ जवानों ने घुसपैठिए को चुनौती और चेतावनी दी। हालांकि, जब उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा की तरफ बढ़ता रहा, तो सैनिकों ने गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उसका शव बॉर्डर के पास पाकिस्तान की तरफ पड़ा है।

गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान की साजिश नाकाम, सांबा में इंटरनेशनल बॉर्डर पर BSF ने एक घुसपैठिए को किया ढेर
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नवजीवन डेस्क

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सोमवार को इंटरनेशनल बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया। अधिकारियों ने बताया कि रविवार देर रात इंटरनेशनल बॉर्डर पर भारतीय सैनिकों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गोली मार दी। घुसपैठिया रामगढ़ सेक्टर के माजरा इलाके में एक बॉर्डर चौकी से भारतीय इलाके में घुसने की कोशिश कर रहा था, तभी चौकस बीएसएफ जवानों ने उसकी हरकत देख ली।

अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ जवानों ने घुसपैठिए को चुनौती और चेतावनी दी। हालांकि, जब उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा की तरफ बढ़ता रहा, तो सैनिकों ने गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने आगे बताया, "मारे गए पाकिस्तानी नागरिक का शव इंटरनेशनल बॉर्डर के पास पाकिस्तान की तरफ पड़ा है।"


जम्मू और कश्मीर में सांबा, कठुआ और जम्मू जिलों में 240 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। बीएसएफ भारत की तरफ इंटरनेशनल बॉर्डर की रखवाली करती है, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तानी रेंजर्स इसकी रखवाली करते हैं। इस केंद्र शासित प्रदेश में कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों और पुंछ, राजौरी और कुछ हद तक जम्मू जिलों में 740 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ कंट्रोल है। सेना लाइन ऑफ कंट्रोल की रखवाली करती है। सेना और बीएसएफ की ड्यूटी बॉर्डर पर घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और पाकिस्तान की तरफ से होने वाली ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए लगाई गई है।

इन ड्रोन का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तानी सेना की मदद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बनाए रखने के लिए हथियार/गोला-बारूद, कैश और ड्रग्स गिराने के लिए करते हैं। इन पेलोड्स को आतंकी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर उठाते हैं और आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हैं। इन अभियानों में तस्करी विरोधी अभियान भी शामिल हैं। माना जाता है कि ड्रग तस्करी और हवाला मनी रैकेट से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

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