देश के पूर्व हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की पत्नी पीएम मोदी को लौटाएंगी सभी अवार्ड, उपेक्षाओं से हैं नाराज 

भारतीय हॉकी टीम को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाले पद्मश्री मोहम्मद शाहिद ने देश को हॉकी में कई मेडल दिलवाए, लेकिन आज उनके परिवार ने सरकारी महकमे की अनदेखी की वजह से सभी पुरस्कारों को सरकार को लौटाने मन बना लिया है।

फोटो: सोशल मीडिया 
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नवजीवन डेस्क

भारतीय हॉकी को नए मुकाम पर पहुंचाने वाले पद्मश्री मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन ने सरकारी उपेक्षा के विरोध में पति को मिले सभी मेडल वापस करने का फैसला किया है। 21 जुलाई को मोहम्मद शाहिद की पुण्यतिथि पर परवीन दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेडल और कई पुरस्कार लौटाएंगी। उन्होंने कहा कि उनके पति ने देश को कई मेडल दिए। यही वजह है कि उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया, लेकिन आज उनका परिवार जब संकट की स्थिति में है तो कोई सुन नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार बनारस आये। उनसे मिलने के लिए हम लोगों ने समय मांगा लेकिन समय नहीं दिया गया।

विधवा पेंशन के बल पर परिवार का खर्च चला रही पद्मश्री मोहम्मद शाहिद की पत्नी का कहना है कि सरकार ने उस वक्त तो बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उनमें से एक वादा भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि 2 साल पहले जब मोहम्मद शाहिद का इंतकाल हुआ था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्ड भेज कर अपना दुख प्रकट किया था। कुछ केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार की तरफ से भी कई मंत्रियों का आना हुआ। उन्होंने कहा कि मोहम्मद शाहिद के नाम पर स्टेडियम का नाम रखा जाएगा, उनके नाम पर प्रदेश में हॉकी खिलाड़ियों को सम्मान दिया जाएगा और हर साल पद्मश्री मोहम्मद शाहिद के नाम पर एक राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट भी कराया जाएगा। लेकिन सरकार ने ये काम नहीं किए। बीते साल उन्होंने अपना पैसा लगाकर टूर्नामेंट कराया। लेकिन इस साल नहीं करा पाईं क्योंकि उनके पास अब परिवार चलाने भर का ही बमुश्किल से पैसा जुट पाता है।

मोहम्मद शाहिद का जन्म 14 अप्रैल 1960 को बनारस में हुआ था। शाहिद वर्ष 1980 में मॉस्को में हुए ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे थे। इसके अलावा, वह वर्ष 1982 के एशियन गेम्स में रजत पदक और 1986 के एशियाड खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे। उन्हें वर्ष 1980-81 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हॉकी में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

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