पॉल मिलग्रोम और रॉबर्ट विल्सन को मिला अर्थशास्त्र का नोबल, निलामी सिद्धांत पर काम के लिए सम्मान

साल 2020 के लिए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार का ऐलान हो गया है। इस साल यह सम्मान नीलामी के सिद्धांत में सुधार और नए निलामी स्वरूपों की खोज के लिए पॉल आर मिलग्रोम और रॉबर्ट बी विल्सन को दिया गया है। स्टॉकहोम स्थित नोबेल कमिटी ने यह फैसला लिया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आसिफ एस खान

आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में साल 2020 के नोबेल पुरस्कार का ऐलान हो गया है। इस साल यह सम्मान अमेरिकी अर्थशास्त्री पॉल आर मिलग्रोम और रॉबर्ट बी विल्सन को संयुक्त रूप से देने की घोषणा की गई है। स्टॉकहोम स्थित नोबेल पुरस्कार समिति ने सोमवार को छठे और अंतिम पुरस्कार के तौर पर मिलग्रो और विल्सन को ऑक्शन थ्योरी (नीलामी सिद्धांत) में सुधार और निलामी के नए स्वरूपों की खोज के लिए यह पुरस्कार देने का ऐलान किया है।

अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चयनित मिलग्रोम और विल्सन दोनों अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं। उन्होंने संयुक्त रूप से अध्ययन किया है कि नीलामी कैसे काम करती है और साथ ही ऐसी वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए नीलामी प्रारूपों की खोज की है, जिन्हें पारंपरिक तरीके से बेचना मुश्किल है, जैसे- रेडियो फ्रिक्वेंसी आदि। उनकी इस खोज से दुनिया भर की सरकारों विक्रेताओं, खरीदारों को लाभ पहुंचा है।

इससे पहले चिकित्सा, भौतिकी और रसायन के क्षेत्र के अलावा साहित्य और शांति के लिए नोबेल पुरस्कारों का ऐलान हो चुका है। रसायन क्षेत्र में दो महिला वैज्ञानिकों ईमैनुएल चार्पियर और जेनिफर डूडना को तो भौतिकी में तीन वैज्ञानिकों- रोजर पेनरोज, रीनहार्ड गेंजेल और एंड्रिया गेज को संयुक्त रूप से यह पुरस्कार देने का ऐलान हुआ है। वहीं चिकित्सा क्षेत्र में खोज के लिए अमेरिका के हार्वे जे अल्टर, चार्ल्स एम राइस और ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल ह्यूटन को संयुक्त रूप से नोबेल देने का ऐलान हुआ। सभी पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में दिए जाएंगे।

दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बनार्ड नोबेल की याद में दिया जाता है। अल्फ्रेड ने अपनी मृत्यु से पहले अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा एक ट्रस्ट के नाम कर दिया था, ताकि उस धनराशि से मानव जाति के हित में काम करने वाले दुनिया भर के लोगों को सम्मानित किया जा सके। पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में दिया गया था। इन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार के रूप में एक मेडल और 8 करोड़ रुपये मिलेंगे।

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