एसआईआर के खिलाफ लोग: साझा दुश्मन से हो रही है साझा लड़ाई

जैसे-जैसे विरोध-प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं, वोट के अधिकार की रक्षा के लिए शुरू हुआ यह अभियान पूरे भारत में दूर-दूर तक फैल रहा है।

जंतर मंतर अब देश के हर जिले-कस्बे में बन गया है और लोग एसआईआर का विरोध कर रहे हैं
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एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ छात्रों और युवा संगठनों के ‘जंतर-मंतर चलो’ आह्वान के दिन 2 अक्टूबर 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे केन्द्रीय दिल्ली की सड़कों पर पुलिस के साथ गुत्थमगुत्था दिखे। प्रदर्शनकारी नागरिकों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी थी। हर रास्ते पर कई स्तर की बैरिकेडिंग के साथ केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल और आरएएफ के जवान तैनात थे। आंसू गैस के गोले दागने वाले वाहन और वॉटर कैनन को भी मुस्तैद किया गया था। यह सबकुछ इसलिए था कि लोग जंतर-मंतर जाकर मताधिकार वापस पाने की अपनी लड़ाई के लिए धरने पर न बैठने पाएं। सड़कों पर उतरे लोग तब पुलिस का किला भेद नहीं पाए मगर तीन हफ्ते बाद तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। छात्रों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और नागरिक संगठनों के जज़्बे ने हर सड़क को जंतर-मंतर बना दिया है। इस तरह वोट देने का अधिकार बचाने की यह लड़ाई जाति, धर्म, संप्रदाय और क्षेत्र से ऊपर उठ हर गली-कूचे तक पहुंचने लगी है। 

पीपुल अगेंस्ट एसआईआर (https://peopleagainstsir.org) के बैनर तले 145 संगठन, देश के 18 राज्यों के 100 से ज्यादा शहरों में उठ खड़े हुए हैं। यह संगठन सिर्फ जंतर-मंतर पर अपना हक़ वापस पाने की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि मताधिकार छीनने की मोदी सत्ता की आपराधिक साजिशों के खिलाफ जनता को जागरूक भी कर रहे हैं।

एसआईआर के खिलाफ लोग: साझा दुश्मन से हो रही है साझा लड़ाई

पीपुल अगेंस्ट एसआईआर की कोऑर्डिनेशन टीम से जुड़े अश्लेष बिरादर कहते हैं कि ‘23 अक्टूबर को देश भर में 150 से ज्यादा जगहों पर नागरिक संगठनों ने प्रोटेस्ट किया है। डेटा और डिटेल्स टीम को न मिल पाने के चलते हम उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं कर पाए हैं, अन्यथा भारत के पूरे नक्शे में आपको कई सौ जंतर-मंतर दिखाई देते।’

पीपुल अगेंस्ट एसआईआर की वेबसाइट 18 राज्यों में 103 जगहों पर विरोध प्रदर्शन का आधिकारिक डेटा दिखा रही है। यह दक्षिण भारत में ज्यादा सघन दिखता है। कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु में नागरिक संगठनों ने वोट चोरी के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किए हैं। 23 अक्टूबर के बाद यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में तेजी से फैला है। गुजरात और उत्तर पश्चिम क्षेत्र में कम प्रदर्शन के सवाल पर वह कहते हैं कि ‘प्रदर्शन हुआ है, हमारे पास डेटा नहीं है, इसलिए वहां खाली दिखता है।’ 

23 अक्टूबर की दोपहर दिल्ली में गोल मार्केट के करीब कालीबाड़ी रोड पर पीपुल अगेंस्ट एसआईआर से जुड़े संगठनों ने बड़ा प्रदर्शन किया। इसी दिन देर शाम को एसएफआई, डीवाईएफआई, सीटू और एडवा जैसे संगठनों ने सोनिया विहार के आवासीय इलाके में जागरूकता अभियान चलाया। उत्तर प्रदेश के बलिया सहित अनगिनत जगहों पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया।  

फोटो सौजन्य : peopleagainstsir.org
फोटो सौजन्य : peopleagainstsir.org

पंजाब के बरनाला, मनसा, फरीदकोट और फतेहगढ़ में किसान सड़कों पर उतरे। कर्नाटक के कलबुर्गी में संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) ने विरोध प्रदर्शन किया। हैदराबाद (तेलंगाना), बशीरहाट (पश्चिम बंगाल), अंडमान (अंडमान और निकोबार), अमलापुरम (आंध्र प्रदेश), अहिल्यानगर (महाराष्ट्र), भुवनेश्वर (ओडिशा), श्रीगंगानगर (राजस्थान), छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) सहित 150 से ज्यादा जगहों पर नागरिक संगठन सड़कों पर उतरे।

पीपुल अगेंस्ट एसआईआर दरअसल सैकड़ों संगठनों का एक साथ आना है। यह मोदी-शाह के कथित सत्तावाद के खिलाफ नागरिक संगठनों का गठबंधन है। 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में बैठक के बाद नागरिक संगठनों ने इसका ऐलान किया। ‘नो एसआईआर नेशनल प्लेटफॉर्म’ के बैनर तले आयोजित इस बैठक में अभिनेता प्रकाश राज, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, गणेश देवी, परकला प्रभाकर, तारा राव, निखिल डे और नदीम खान सहित कई प्रमुख लोग शामिल हुए।

बैठक में एसआईआर के विरोध को समन्वित रूप देने के लिए ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ के नाम से एक साझा मंच का औपचारिक गठन हुआ। साथ ही सभी संगठनों की भागीदारी से एक समन्वय समिति बनाई गई । सचिवालय, जमीनी गतिविधियों, मीडिया, कानूनी सहायता और पब्लिक ऑडिट से जुड़े कामों के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। कम्युनिकेशन के लिए एक केन्द्रीय वाट्सएप समूह सहित विशेष संचार व्यवस्था बनी हैं।

फोटो सौजन्य : peopleagainstsir.org
फोटो सौजन्य : peopleagainstsir.org

इंडियन एक्सप्रेस (23 सितंबर 2026) के खुलासे (पिछले 10 महीने में दो चुनाव आयुक्तों ने केन्द्रीय चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार अपनी असहमति/आपत्ति दर्ज कराई) के बाद देश में एसआईआर और वोट चोरी के खिलाफ दबा हुआ आक्रोश फट पड़ा। नागरिकों संगठनों ने अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की, और 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर चलो का आह्वान किया, मगर सरकार ने इस जनाक्रोश को दबाने के लिए जंतर-मंतर को किले में तब्दील कर दिया। आवाज उठाने वाला हर नागरिक हिरासत में लिया जाने लगा। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर जाकर तिरंगा फहराने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के बाद नागरिक संगठनों की समझ में आ गया कि आगे की लड़ाई लंबी है, और इसके लिए एकजुटता का मतलब व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, संगठनिक स्तर पर भी एक साथ आना होगा। 

एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में जन-सुनवाइयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। साल 2002-03 में, ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ (एमकेएसएस) के शंकर सिंह ने चुनाव आयोग के कहने पर मतदाता सूचियों की जांच के लिए जन-सुनवाइयां आयोजित की थीं। अब 2026 में, वह चुनाव आयोग के कामकाज की जांच करने के लिए जन-सुनवाइयां कर रहे हैं। इस विडंबना को समझाते हुए वह कहते हैं, “लोग बहुत डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा, जरूरी सेवाओं तक उनकी पहुंच खत्म कर दी जाएगी, या उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा।”


राजस्थान के राजसमंद जिले से आने वाले शंकर सिंह सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ रंगकर्मी भी हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा रॉय और निखिल डे के साथ मिलकर एमकेएसएस की स्थापना की थी। ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) कानून लागू करवाने के लिए जानी जाने वाली यह संस्था अब ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ से जुड़ गई है।

27 अक्टूबर 2026 को पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी स्थित रामलीला पार्क में एक जन-सुनवाई आयोजित की गई, जिसका नेतृत्व एमकेएसएस, वोटर अधिकार मंच, जन सरोकार और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन ने किया। उन्होंने पाया कि त्रिलोकपुरी विधानसभा क्षेत्र के चार मतदान केन्द्रों- इंदिरा कैंप के बूथ 42 और 43, तथा ब्लॉक 34 के बूथ 79 और 80 पर 416 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए थे।

शंकर सिंह बताते हैं, “300 परिवारों के स्थानीय निवासी इस जनसुनवाई में शामिल हुए, क्योंकि इन संगठनों के सदस्य घर-घर जाकर लोगों को बता रहे थे कि जिन लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें वापस जुड़वाने में मदद के लिए एक जनसुनवाई आयोजित की जा रही है।”

त्रिलोकपुरी की जनसुनवाई में शामिल हुए निखिल डे कहते हैं, “हमें लड़ना होगा। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है। लेकिन यह काम सिर्फ नागरिक संगठनों का नहीं है; राजनीतिक दलों को भी इसमें शामिल होना चाहिए, तभी आगे का कोई रास्ता निकल पाएगा। जनसुनवाई लोगों की लोकतांत्रिक आवाज़ होती है। सत्ता में बैठे लोग विपक्ष को दबा सकते हैं- जिसके नेता इन जनसुनवाइयों में आ रहे हैं, लेकिन वे जनता को नहीं दबा सकते। कोई भी व्यक्ति जनसुनवाई में आकर यह नहीं पूछ सकता कि आपने वह पोस्टर क्यों लगाया या ये नारे क्यों लगाए।” ऐसी ही जनसुनवाइयां कर्नाटक के 100 मतदान केन्द्रों के साथ-साथ तेलंगाना और राजस्थान में भी आयोजित की जा रही हैं।

अलग-अलग पेशेवर पृष्ठभूमि वाले 200 से ज़्यादा स्वयंसेवकों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए समय निकालकर इसमें हिस्सा लिया है। दिल्ली के 22 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अक्षित त्यागी, मशीन लर्निंग के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ (People Against SIR) वेबसाइट बनाई है और वे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन- दोनों तरह से इसका समर्थन करते हैं। इस साल जुलाई में जंतर-मंतर 1.0 पर अक्षित नियमित रूप से मौजूद रहते थे। जब एसआईआर के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ, तो वे फिर वापस आ गए।

वकील सागरिका राजोरा प्रवासी मज़दूरों के अधिकारों के लिए काम करती हैं। लोगों को एसआईआर प्रक्रिया में मदद करने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर उन्होंने ‘वोटर अधिकार मंच’ बनाया, जो अब ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ की मदद कर रहा है। सागरिका सोशल मीडिया पर अन्य स्वयंसेवकों के साथ तालमेल बिठाती हैं, फील्ड विज़िट करती हैं और वर्किंग-ग्रुप की बैठकों में हिस्सा लेती हैं। वह कहती हैं, “यह एक बड़ी लड़ाई है, और लोग अब ज़्यादा जागरूक हो गए हैं। आप इसे सड़कों पर देख सकते हैं।”

हरियाणा की एक टेक कंपनी में काम करने वाले 43 वर्षीय विनीत, एमकेएसएस से जुड़े हैं। वह अपने खर्च पर दिल्ली आए ताकि त्रिलोकपुरी की जन-सुनवाई में हिस्सा ले सकें। वह मंगोलपुरी भी गए, जहां उन्होंने लोगों को ‘फॉर्म 6’ भरने में मदद की। पूरे दिन निवासियों को सलाह देने और उन्हें आगे के कदमों के बारे में समझाने के बाद, वे बस पकड़कर हिसार लौट गए।


याद रखना ज़रूरी है कि लखनऊ, हैदराबाद हो या फिर मुंबई, नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन 23 अक्टूबर 2026 से काफी पहले ही शुरू कर दिए थे। 16 अक्तूबर को, नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में सैकड़ों लोग ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने को इकट्ठा हुए।

तेभागा और तेलंगाना आंदोलनों में भाग ले चुकीं दिल्ली की सरोज कहती हैं, “मैंने इतनी नाकाबिल सरकार कभी नहीं देखी। जिन लोगों ने हमें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया था, वे आज बलात्कारियों को बचाने के लिए तिरंगा मार्च निकाल रहे हैं, जबकि देश के ही नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोक रहे हैं!”

गुजरात के विराग उस दिन कनॉट प्लेस में मौजूद थे। उन्होंने और उनके साथियों ने अहमदाबाद में एक सार्वजनिक पुस्तक पाठ कार्यक्रम आयोजित किया था, जहां उन पर विहिप और बजरंग दल के सदस्यों ने हमला कर दिया। विराग कहते हैं, “इस देश में तानाशाही चल रही है। एक दिन, तानाशाह कांप उठेगा, और तब हर किसी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

खुद को एक स्वतंत्र राजनेता घोषित कर चुके पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर मेघनाद कहते हैं कि यह आंदोलन अब विकेन्द्रीकृत हो चुका है: “हमें देवघर से एक कॉल आया। वे सिर्फ चार-पांच लोगों के साथ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करना चाहते थे और उन्होंने पूछा कि क्या हम इसे ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ की वेबसाइट और मैप पर जोड़ सकते हैं। लोग खुद आगे आ रहे हैं। भीड़ कितनी बड़ी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह नागरिकों की बात है। ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ एक ऐसा मंच बन रहा है जिसके ज़रिये लोग आपस में जुड़ रहे हैं।” वह आगे कहते हैं, “सरकार के लिए हम सबको पूरी तरह से दबा देना या खत्म कर देना आसान नहीं होगा।”

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